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दूध सभी पीना चाहते हैं, लेकिन पशु कोई नहीं पालना चाहता
09-Jul-2018    |    Views : 000173

दूध सभी पीना चाहते हैं, लेकिन पशु कोई नहीं पालना चाहता

LUCKNOW. यूनाइट फाउण्डेशन की ओर से जूनोसिस दिवस (6 जुलाई) से आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यशाला का समापन विद्यार्थी दिवस(9 जुलाई) के मौके पर हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम में छ़ात्रों को सफल होने के टिप्स बताए गये, इसके साथ ही पशुओं की महत्ता को भी रेखां​कित किया और उन्हें पशु कल्याण से ​जुड़े नियमों की जानकारी दी। इस कार्यक्रम का आयोजन यूनाइट फाउण्डेशन के लखनऊ स्थित कार्यालय में किया गया है। कार्यशाला में सह आयोजक एमआरएसपी सेवा समिति और श्री गोपेश्वर गौशाला और लखनऊ कैनाइन प्रैक्टिशनर क्लब ने सहयोग किया है। कार्यशाला में अंतिम दिन 40 से ज्यादा प्रशिक्षार्णियों ने भाग लिया। सभी प्रशिक्षणार्थियों को इस अवसर पर सर्टिफिकेट वितरित किये गये।

कार्यक्रम में एमअरएसपी सेवा समिति की अध्यक्ष कविता दासलक्ष्मण गौशाला के टीएन दीक्षित समेत कई विषय विशेषज्ञों ने कार्यशाला को सम्बोधित किया है। इस चार दिवसीय प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यशाला में सामाजिक संगठनों के प्रशिक्षित लोगों ने प्रशि​णार्थियों को पशु कल्याणजीवजंतु कल्याण,पशुओं के उपचार और उन्हें गम्भीर बीमारियों से बचाने और जूनोसिस बीमारियों से स्वयं को बचाने के टिप्स भी दिए और अंतिम दिन विद्यार्थी दिवस पर छात्रों को सफलता के गुर भी सिखाए। इससे पहले प्रशिक्षणार्थियों से कई प्रश्न पूछे गए और उनका समाधान किया गया।

 कार्यक्रम की अध्यक्षता यूनाइट फाउण्डेशन के अध्यक्ष पियूषकांत मिश्रा ने की। उन्होंने कार्यक्रम के अंत में सभी का अभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन राधेश्याम दीक्षित ने किया। कार्यक्रम में अंत में करीब 40 प्रशिणार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही यूनाइट फाउण्डेशन के संयोजक संदीप पाण्डेयएमआरएसपी सेवा समिति की शबा खान के अलावा डॉ. नवनीत कुमारश्रीकांत वर्मापुनीत शर्मामुकेश कुमार मौर्याटी. एन. दीक्षितसोनू सैनीरमाकांत पटेल समेत करीब 50 लोग मौजूद रहे।

 

 हमें सृष्टि को बचाने की जरूरत है 

यूनाइट फाउण्डेशन के सचिव सौरभ मिश्र ने समापन अवसर पर कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का बहुत ही महत्व है। किताबों के कंठस्थ करने की जगह इमैजिनेशन करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में लोग रटने प्रयास करते हैं। अगर रटने की जगह इमैजिन करें, विजुअलाइज करें, जिससे चीजें जल्दी समझ में आती हैं। वहीं, उन्होंने स्वास्थ्य और पशु कल्याण की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि दूध हर कोई पीना चाहता है, लेकिन पशुओं को कोई पालना नहीं चाहता है। उन्होंने कहा कि हर परिवार में कम से कम एक दुधारू पशु होना चाहिए, जिससे हम स्वस्थ भी रहेंगे। उन्होंने कहा कि बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थ में तेजी आ गई है। सबसे ज्यादा मिलावट खाद्य पदार्थों में ही होती है, ऐसे में जब दुधारू पशु होंगे तो मिलावटी पदार्थों से बच सकेंगे। उन्होंने बताया कि पशु कल्याण के लिए दो चीजें जरूरी हैं, एक तो उनका खानपान, स्वास्थ्य और दूसरी चीज है जनांदोलन यानि समाज को पशुओं से जोड़ने की। उन्होंने कहा कि लाखों योनियों और जीव जंतुओं के खत्म होने में सृष्टि की सरंचना पर संकट पैदा हो गया है, हमें इसे बचाने की जरूरत है।

जीवों से प्यार करेंगे तो सुखी रहेंगे

यूनाइट फाउण्डेशन के कोषाध्यक्ष भास्कर दुबे ने कहा कि हमारे समाज में इंसान और मानव का बहुत गहरा रिश्ता रहा है। उन्होंने कहा कि मनुष्यों का दायित्व है कि प्रकृति ने जो कुछ उन्हें दिया है, उसे सहेज कर रखें। पेड़ पौधों को खादपानी दें, जानवरों के लिए चारेपानी की व्यवस्था करें, ये उनका दायित्व है। जानवरों के प्रति प्यार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज डेंगू की बीमारी तेजी से फैल रही है, जो हमारी ही देन है। पहले मछलियां मच्छर के लार्वा को खा जाती थीं, लेकिन आज तालाब खत्म हो गए, इंसानों ने उन पर कब्जा कर लिया है, मछलियां खत्म हो गई, जिसका परिणाम हम लोगों के सामने है। इसलिए जानवरों, पशुपक्षियों और जीवों से जितना प्यार करेंगे हम उतना ही सुखी रहेंगे।

सकरात्मक सोचना चाहिएनकारात्मकता से दूर रहना चाहिए

एनीमल वेलफेयर (ए.डब्ल्यू.बी.आई) के पूर्व सलाहकार डॉ. एनडी शर्मा ने छ़ात्रों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि गुरू कठोर होता है, लेकिन उसका भाव उतना ही सरल होता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में समय बहुमूल्य है। समय कभी भी वापस नहीं आता है, ऐसे में समय का सदुपयोग करें। उन्होंने कहा कि हमें अनुशासित रहना चाहिए। हमारें क्रियाकलापों से ही व्यक्तित्व की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि देश को विश्वगुरु बनाना है तो चरित्र को जरूर वॉच करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही हमारे साथ होता है। इसलिए हमें अच्छा सोचना चाहिए। सकरात्मक सोचना चाहिए, नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने पशु कल्याण और उनके स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की बात कही। उन्होंने पशुओं के प्राथमिक उपचार के टिप्स भी दिए।

सामाजिक आंदोलनों में प्रतिभाग करना चाहिए 

यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष डॉ. पीके त्रिपाठी ने कहा कि छात्रों को सामाजिक आंदोलनों में प्रतिभाग करना चाहिए और आगे आकर समाज को जागरूक भी करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने पशुओं के कल्याण को लेकर भी काफी चर्चा की और प्रशिक्षणार्थियों की ओर से पूछे गए सवालों प्रयोगात्मक तरीके से जवाब दिए।

सीखने की कोई उम्र नहीं होती हैलेकिन जिज्ञासा होना जरूरी

एमआएसपी सेवा समिति के पीके पात्रा ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है, लेकिन जिज्ञासा होना जरूरी है। जिज्ञासा के बिना हम कुछ नहीं सीख सकते हैं। हमें अनुभवी लोगों से सीखना चाहिए। इस दौरान पीके पात्रा और सबा खान लोगों प्रशिक्षार्णियों को सांप पकड़ने के टिप्स भी दिए। उन्होंने सांप को दिखाकर उसे कैचर के जरिए पकड़ने के तरीके बताए। साथ ही उन्होंने कहा कि सांप को कभी भी मारे नहीं, उसे किसी सपेरे या जीवजन्तु प्रेमी को दें दें या जंगल में छोड़ दें।

 

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