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पशुओं से करें इंसानों जैसा ही व्यवहार
08-Jul-2018    |    Views : 00023

पशुओं से करें इंसानों जैसा ही व्यवहार

LUCKNOW. यूनाइट फाउण्डेशन की ओर से चार दिवसीय प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यशाला के तीसरे दिन रविवार के पशुओं/जानवरों की प्राकृतिक चिकित्सा और मृत पशुओं के निस्तारण को लेकर लोगों को जागरूक किया गया।  इस कार्यक्रम का आयोजन यूनाइट फाउण्डेशन के लखनऊ स्थित कार्यालय में किया गया है। कार्यशाला में सह आयोजक एमआरएसपी सेवा समिति और श्री गोपेश्वर गौशाला और लखनऊ कैनाइन प्रैक्टिशनर क्लब ने सहयोग किया है। कार्यशाला में तीसरे दिन विभिन्न संस्थाओ के   करीब 30 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता यूनाइट फाउण्डेशन के अध्यक्ष पीयूषकांत मिश्र ने की। उन्होंने कार्यक्रम के अंत में सभी का अभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष डा. पीके त्रिपाठी ने किया। इसके साथ ही यूनाइट फाउण्डेशन के संयोजक संदीप पाण्डेयएमआरएसपी सेवा समिति से पी.के. पात्रा और शबा खान के अलावा डॉ. राजकुमार वर्मानवनीत कुमारश्रीकांत वर्मापुनीत शर्मामुकेश कुमार मौर्याटी. एन. दीक्षितसोनू सैनी, रमाकांत पटेल समेत करीब 30 लोग मौजूद रहे।

 

 मृत पशुओं को सरकारी पशु निस्तारण प्लांट को दे

यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष डॉ. पीके त्रिपाठी पशुओं के ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े तमाम पहलुओं से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि हम लोगों को इस बात का खास ध्यान रखना है कि कहीं आप छोटी ट्रक में आठ से 10 पशुओं को तो नहीं भरकर ले जा रहे हैं, अगर ऐसा है तो ये पशु क्रूरता की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि हमें इसानों जैसा ही पशुओं के साथ व्यवहार करना चाहिए। उनके खाने पीने के लिए सही समय पर व्यवस्था की जाए, जिससे पशुओं को कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि पशुओं को पैदल पांच किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा न कराएं। अगर आप कंटेनर आदि में पशुओं को भरकर ले जा रहें तो हमें पता होना चाहिए कि कहीं कोई पशु प्रेगनेंट तो नहीं है। यदि प्रेगनेंट है या स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो उसे कतई ट्रैवल न कराएं। इसके अलावा उन्होंने पशु कल्याण और गोवध अधिनियम से जुड़ी तमाम जानकारियां साझा की। इसके अलावा डॉ. त्रिपाठी ने मृत पशुओं के निसतारण पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि मृत पशुओं को सरकारी पशु निस्तारण प्लांट को दे दें। यदि पशु निस्तारण प्लांट नहीं है तो उनके निस्तारण के लिए उचित स्थान ही चुनें।

प्राथमिक उपचार के दौरान भी तमाम सावधानियां बरतनी चाहिए

पशु चिकित्सक डॉ. कौशलेन्द्र ने कहा कि पशुओं से जुड़ी बीमारियों पर चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने उनकी प्राकृतिक चिकित्सा कैसे करें, इस पर भी ढेर सारी जानकारियां दी। उन्होंने बताया कि कोई भी आवारा जानवर हो या पालतू, उसका उपचार करने से पहले उसके मूड को अवश्य जान लें। उन्होंने बताया कि पशु अगर घायलावस्था में है तो वह गुस्से में भी हो सकता है। ऐसे में में पहले उसे अपने अनुकूल कर लें और सबसे पहले फस्ट एड किट की मदद लें, जिससे उपचार के दौरान जानवर बेकाबू न हो गए। पशु को कम चोट है तो प्राथमिक उपचार करें। प्राथमिक उपचार के दौरान भी तमाम सावधानियां बरतनी चाहिए। पशु अगर गम्भीर रूप से घायल है तो किसी नजदीकी चिकित्सक से सम्पर्क करें। इसके अलावा उन्होंने आवारा पशुओं के चोटिल होने और बीमार होने की स्थिति में कैसे हम उनका उपचार करें, इसका प्रशिक्षण भी दिया गया है।

बिना कानूनी प्रक्रिया के यूथनेसिया किसी पशु को देना अपराध है

डॉ. नागेंद्र गुप्ता ने भी पशुओं के उपचार और पशु कल्याण के लिए बनाए गए कानूनों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि अगर कोई जानवर बहुत गम्भीर अवस्था में है और उसके ठीक होने की सम्भावना नहीं तो इसके लिए हम पशु चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं। अगर बिना कानूनी प्रक्रिया के यूथनेसिया किसी पशु को दी जाती है, तो अपराध माना जाएगा।

चोटिल पशुओं के उपचार के लिये आगे आये

एमआएसपी सेवा समिति के पीके पात्रा ने कहा कि अगर कोई आवारा पशु या जानवर सड़क चोटिल दिख जाए तो उसके उपचार के लिए आगे आएं। उन्होंने अपील कि यदि आप प्राथमिक उपचार कर सकते हैं तो जरूर करें। यदि आप उपचार करने की स्थिति में नहीं तो सम्बंधित संस्थाओं से सम्पर्क कर इसकी जानकारी जरूर दें। इससे पहले कार्यशाला और प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन सबसे पहले प्रशिक्षणार्थियों से कई प्रश्न पूछे गए और उनका समाधान किया गया।

 

 

 

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