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जैसा व्यवहार पशुओं के साथ करेंगें वैसा ही व्यवहार वह करेंगें- केशव प्रसाद मौर्या
17-Apr-2018    |    Views : 000266

जैसा व्यवहार पशुओं के साथ करेंगें वैसा ही व्यवहार वह करेंगें- केशव प्रसाद मौर्या

LUCKNOW.  प्रकृति ,सुंदरता, मनुष्य ,पक्षी व पशु एक दूसरे के बिना अधूरे है। हम जैसा व्यवहार पशुओं के साथ करेंगें वैसा ही व्यवहार वह हमारे साथ करेंगें। आजकल की पीढ़ी प्रकृति की व्यवहारिक शिक्षा वन क्षेत्रों से प्राप्त करने के स्थान पर डिस्कवरी जैसे चैनलों से प्राप्त कर रही है। सूबे के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने इन्दिरागांधी प्रतिष्ठान में आयोजित मानव वन्यजीव संघर्ष पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए बतौर मुख्य अतिथि यह बात कही। इस अवसर पर वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान मंत्री दारा सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे।

कार्यशाला के दौरान उपमुख्यमंत्री और वन मंत्री द्वारा वन्यजीवों के रेस्क्यू आपरेशन में सराहनीय कार्य करने वाले 28 नागरिकों, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। इसी के साथ ही लिविंग विद दि वाईल्ड मिटीगेटिंग कन्फ्लिक्ट बिटवीन ह्यूमन एण्ड बिग कैट स्पेशिज इन उत्तर प्रदेश पुस्तक का विमोचन किया।

इस अवसर पर सांसद रवि वर्मा, प्रमुख सचिव वन एवं वन्य जीव रेणुका कुमार, सचिव वन एवं वन्य जीव रूपक डे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय सिंह, प्रबंध निदेशक वन निगम एस के उपाध्याय, प्रमुख वन संरक्षक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण एस के शर्मा के साथ ही सेवानिवृत्त वनाधिकारी एवं महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड के वनाधिकारी, विषय विशेषज्ञ आदि लोगों ने भाग लिया।  

गिद्धों की कम संख्या चिंता का विषय

केशव प्रसाद मौर्या ने हमारे आसपास पाये जाने वाले गिद्धों की कम होती संख्या पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकृति के सफाईकर्मी गिद्धों को वापस लाने हेतु हम सबको मिल जुलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। गंगा की सफाई हेतु गांगा को प्राकृतिक रूप से स्वच्छ रखने वाले कछुए व अन्य जलीय प्राणियों को संरक्षित रखने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

वन्य प्राणियों के व्यवहार की जानकारी जरूरी

 वन पर्यावरण जन्तु उद्यान एवं उद्यान उत्तर प्रदेश दारा सिंह चैहान ने कहा कि शहरों में आ गये वन्य प्राणियों से शहरवासियों को भय की भावना से मुक्त करने, उनके व्यवहार की जानकारी शहरवासियों को देने एवं समाज को इसके प्रति संवेदनशील बनाने में प्रचार माध्यमों की अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री चौहान ने कहा कि गंगा को प्रदूषण मुक्त करने एवं गंगा के किनारे वनावरण व वृक्षावरण सृजित करने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा गंगा हरीतिमा अभियान प्रारम्भ किया गया है।

 वन्य जीव एवं मनुष्य के संघर्ष का निराकरण जरुरी

सांसद रवि वर्मा ने हाथी, सांप, बन्दर व तेंदुआ के वन क्षेत्र से बाहर आकर मनुष्य को क्षति पहॅुचाने एवं इसके कारण संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होने पर चिन्ता व्यक्त की। उन्होने इसके तत्काल निराकरण के लिये प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया।     

 जागरुकता जरूरी है

प्रमुख सचिव वन एवं वन्यजीव श्रीमती रेणुका कुमार ने कहा कि वन क्षेत्र के निकटवर्ती ग्रामों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिये इन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित करने, 20 वर्षो से भी अधिक समय से दैनिक पारिश्रमिक पर कार्यरत श्रमिकों को सुविधाएं प्रदान करने की जरूरत है। व्यापक जन जागरूकता उत्पन्न कर स्थानीय समुदाय व कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर एवं स्थानीय ग्रामवासियों को गाईड के रूप में सुरक्षा कार्यों से जोड़कर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी लायी जा सकती है।

 शहर वन विकसित होना आवश्यक है

 उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहका केशव वर्मा ने पारिस्थितिकीय तंत्र में बाघो के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ व गाजियाबाद की तरह प्रत्येक शहर में एक शहर-एक वन की अवधारणा पर शहर वन विकसित होना आवश्यक है।

 मानव-वन्यजीवों के मध्य संघर्ष न हो

प्रधान मुख्य वन संरक्षक डा0 रूपक डे ने कहा कि वन्य प्राणियों के जीने के अधिकार का सम्मान करते हुए ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करे जिससे मानव-वन्यजीवों के मध्य संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो।

 मानव-वन्यजीव का सहअस्तित्व अत्यन्त प्राचीन है

प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव, एस0के0 उपाध्याय ने कहा कि मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है किन्तु वन्यजीव प्राकृतवास पर बढ़ता दबाव जैविक दबाव, प्राकृतवास, विखण्डन, वन्यजीवों के आवागमन में बाधा सहित विभिन्न कारणों से वन्यजीवों व हमारे मध्य के सम्बन्धों में नकारात्मक प्रभाव पड़ा तथा परस्पर संघर्ष की स्थित उत्पन्न हुई।

 तकनीकी जानकारी        

तकनीकी सत्रों में प्रवीन राव व डा0 उत्कर्श शुक्ला द्वारा उत्तर प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पर जानकारी उपलब्ध करवाई गई। डा0 हरीष गुलेरिया द्वारा वन क्षेत्र एवं ग्रास लैण्ड मैनेजमेण्ट का प्रस्तुतीकरण किया गया। अपर प्रमुख वन संरक्षक महाराष्ट्र सुनील लिमये , अपर पुलिस अधीक्षक, एस0टी0एफ0 अरविन्द चतुर्वेदी, सहायक संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश सुनील कुमार सिन्हा आदि द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतीकरण किया गया।

 

 

 

 

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