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कैरियर की ऊंचाईयों में अभिनेत्री को हो गयी हृदय की बीमारी
14-Feb-2019    |    Views : 000281

LUCKNOW. मधुबाला का पूरा नाम मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी था। उनका जन्म 14 फ़रवरी 1933 को दिल्ली में हुआ था। वह एक प्रसिद्ध भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री हैं। मुग़ल-ए-आज़म', 'हावडा ब्रिज', 'काला पानी' तथा 'चलती का नाम गाडी जैसी फ़िल्में आज भी सिनेप्रेमियों के दिल के काफ़ी क़रीब है।

कैरियर की ऊंचाईयों में अभिनेत्री को हो गयी हृदय की बीमारी

LUCKNOW. मधुबाला का पूरा नाम मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी था। उनका जन्म 14 फ़रवरी 1933 को दिल्ली में हुआ था। वह एक प्रसिद्ध भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री हैं। मुग़ल-ए-आज़म', 'हावडा ब्रिज', 'काला पानी' तथा 'चलती का नाम गाडी जैसी फ़िल्में आज भी सिनेप्रेमियों के दिल के काफ़ी क़रीब है।

सिने जगत् में मधुबाला के नाम से मशहूर महान् अभिनेत्री मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी का जन्म दिल्ली शहर के मध्य वर्गीय मुस्लिम परिवार में 14 फ़रवरी, 1933 को हुआ था। मधुबाला अपने माता-पिता की 5वीं सन्तान थी। उनके माता-पिता के कुल 11 बच्चे थे। मधुबाला के पिता अताउल्लाह ख़ान दिल्ली में एक कोचमैन के रूप मे कार्यरत थे। मधुबाला के जन्म के कुछ समय बाद उनका परिवार दिल्ली से मुम्बई आ गया।

बचपन के दिनों से ही मधुबाला अभिनेत्री बनने का सपना देखा करती थी। वर्ष 1942 में मधुबाला को बतौर बाल कलाकार बेबी मुमताज़ के नाम से फ़िल्म 'बसंत' में काम करने का मौक़ा मिला। बेबी मुमताज़ के अभिनय से प्रभावित होकर हिन्दी फ़िल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री देविका रानी ने उनसे अपने बैनर 'बाम्बे टाकीज' की फ़िल्म 'ज्वार भाटा' में काम करने की पेशकश की लेकिन मधुबाला उस फ़िल्म मे काम नहीं कर सकी। मधुबाला को फ़िल्म अभिनेत्री के रूप में पहचान निर्माता निर्देशक केदार शर्मा की वर्ष 1947 मे प्रदर्शित फ़िल्म 'नील कमल' से मिली।

वर्ष 1949 मे बॉम्बे टाकीज के बैनर तले बनी फ़िल्म 'महल' की कामयाबी के बाद मधुबाला फ़िल्म इंडस्ट्री मे अपनी पहचान बनाने में सफल हो गयीं। वर्ष 1950 से 1957 तक का वक्त मधुबाला के सिने कैरियर के लिये बुरा साबित हुआ। इस दौरान उनकी कई फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल हो गयीं। लेकिन वर्ष 1958 में उनकी फागुन, हावडा ब्रिज, काला पानी तथा चलती का नाम गाड़ी की सफलता ने एक बार फिर मधुबाला को शोहरत की बुंलदियों पर पहुँचा दिया। फ़िल्म हावड़ाब्रिज में मधुबाला ने क्लब डांसर की भूमिका अदा कर दर्शकों का मन मोह लिया। इसके साथ ही वर्ष 1958 में हीं प्रदर्शित फ़िल्म चलती का नाम गाड़ी में उन्होंने अपने कॉमिक अभिनय से दर्शकों को हंसाते-हंसाते लोटपोट कर दिया।

पचास के दशक मे स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान मधुबाला को यह अहसास हुआ कि वह हृदय की बीमारी से ग्रसित हो चुकी है। इस दौरान उनकी कई फ़िल्में निर्माण के दौर में थी। मधुबाला को लगा यदि उनकी बीमारी के बारे में फ़िल्म इंडस्ट्री को पता चल जायेगा तो इससे फ़िल्म निर्माता को नुकसान होगा इसलिये उन्होंने यह बात किसी को नहीं बतायी। के.आसिफ की फ़िल्म मुग़ल ए आज़म के निर्माण मे लगभग दस वर्ष लग गये। इस दौरान मधुबाला की तबीयत काफ़ी ख़राब रहा करती थी फिर भी उन्होंने फ़िल्म की शूटिंग जारी रखी क्योंकि मधुबाला का मानना था कि अनारकली के किरदार को निभाने का मौक़ा बार-बार नहीं मिल पाता है। वर्ष 1960 में जब मुग़ल ए आज़म प्रदर्शित हुई तो फ़िल्म में मधुबाला के अभिनय को देख दर्शक मुग्ध हो गये। हालांकि बदकिस्मती से इस फ़िल्म के लिये मधुबाला को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फ़िल्म फेयर पुरस्कार नहीं मिला लेकिन सिने दर्शक आज भी ऐसा मानते है कि मधुबाला उस वर्ष फ़िल्म फेयर पुरस्कार की हकदार थी।

साठ के दशक में मधुबाला ने फ़िल्मों मे काम करना काफ़ी हद तक कम कर दिया था। चलती का नाम गाड़ी और झुमरू के निर्माण के दौरान ही मधुबाला किशोर कुमार के काफ़ी क़रीब आ गयी थीं। मधुबाला के पिता ने किशोर कुमार को सूचित किया कि मधुबाला इलाज के लिये लंदन जा रही है और लंदन से आने के बाद ही उनसे शादी कर पायेगी। लेकिन मधुबाला को यह अहसास हुआ कि शायद लंदन में हो रहे आपरेशन के बाद वह जिंदा नहीं रह पाये और यह बात उन्होंने किशोर कुमार को बतायी इसके बाद मधुबाला की इच्छा को पूरा करने के लिये किशोर कुमार ने मधुबाला से शादी कर ली। शादी के बाद मधुबाला की तबीयत और ज़्यादा ख़राब रहने लगी। वर्ष 1964 में एक बार फिर से मधुबाला ने फ़िल्म इंडस्ट्री की ओर रुख़ किया। लेकिन फ़िल्म चालाक के पहले दिन की शूटिंग में मधुबाला बेहोश हो गयी और बाद में यह फ़िल्म बंद कर देनी पड़ी।

अपनी दिलकश अदाओं से लगभग दो दशक तक सिने प्रेमियों को मदहोश करने वाली महान् अभिनेत्री मधुबाला ने मुम्बई में 23 फ़रवरी 1969 को इस दुनिया से अलविदा कह दिया।

14 फ़रवरी को लोग सिर्फ वैलेंटाइन दिवस के रूप में ही जानते हैं लेकिन इस दिन देश विदेश के इतिहास में बहुत सी महत्वपूर्ण घटित-घटनाएँ हैं जो हमें जरुर जाननी चाहिए, साथ में ही उन महान लोगों के नाम जो आज के ही दिन यानि 14 फ़रवरी के दिन इस दुनिया में आये थे और उन महान लोगों के नाम जिन्होंने आज के दिन इस दुनिया को अलविदा कहा।

14 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह की 1537 में पुर्तगालियों से बच कर भागने के दौरान डूबने से मौत।

पंजाब के गुरुदासपुर जिले के कलानौर में 1556 में 13 वर्ष उम्र में अकबर का राजाभिषेक हुआ।

शाहजहाँ 1628 में आगरा की गद्दी पर बैठा।

कनाडा 1663 में फ़्रांस का एक प्रान्त बना।

हेनरी पेलहम 1743 में ब्रिटेन के वित्त विभाग के पहले प्रमुख बने।

भारत के पहले होमयोपैथिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना 1881 में कोलकाता में हुईं।

अमेरिकी कांग्रेस ने 1899 में संघीय चुनाव में वोटिंग मशीन के इस्तेमाल को मंजूरी दी।

लंदन के पास ग्रोटन शहर में 1912 में पहली डीजल पनडुब्‍बी बनाई गई।

पोलिस-सोवियत युद्ध 1919 से आरंभ।

शिकागो में महिला मतदाता लीग की स्थापना 1920 में की गयी।

न्यूयॉर्क में आइबीएम की स्थापना 1924 में हुई।

पेरू, चिली, पराग्वे और इक्वाडोर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य 1945 में बने।

अमेरिका ने 1972 में चीन के साथ व्यापार प्रतिबंधों में ढील की घोषणा की।

अमेरिका ने 1978 में सऊदी अरब, मिस्र, और इसरायली को अरबों डॉलर के हथियार बेचने की घोषणा की।

काबुल में अमेरिकी राजदूत एडोल्फ़ डक्स की मुस्लिम उग्रवादियों द्वारा 1979 में हत्या।

भोपाल गैस कांड की जिम्‍मेदारी यूनियन कार्बाइड 1989 में सरकार को मुआवजा देने पर राजी हुई थी।

बंगलौर में इंडियन एयरलाइंस 605 पर सवार 92 लोग 1990 में विमान दुर्घटना में मारे गये।

भारतीय क्रिकेट ख़िलाड़ी कपिल देव ने 1993 400 विकेट और 5000 रनों का रिकार्ड बनाया

इम्फाल में 1999 में पांचवे राष्ट्रीय खेलों की शुरुआत हुई।

उमर शेख़ ने 2002 में कहा, पर्ल जीवित नहीं, किन्तु तलाश जारी।

जर्मन निदेशक की ‘हेड आन’ फ़िल्म को 2004 में गोल्डन बीयर पुरस्कार मिला।

2005 में प्रसिद्ध साहित्यकार डाक्टर विद्यानिवास मिश्र की सड़क दुर्घटना में मृत्यु।

दुनिया भर में वीडियो शेयरिंग वेबसाइट यूट्यूब को 2005 में एक्टिवेट किया गया था।

न्यायाधीशों के विरोध में 2006 में सद्दाम हुसैन भूख हड़ताल पर गये।

2007 में मध्य प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे श्यामाचरण शुक्ल का निधन हुआ।

नैया मसूद को 2008 में उनके कहानी संग्रह तऊस चमन की मैना के लिए वर्ष 2007 का ‘सरस्वती सम्मान’ प्रदान किया गया।

सानिया मिर्ज़ा ने 2009 में पटाया ओपन टेनिस के फाइनल में प्रवेश किया।

14 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति

मुग़ल साम्राज्य के सम्राट बाबर का जन्म 1483 में हुआ।

राज्य परिषद के अध्यक्ष अलेक्जेन्डर मडीमैन का जन्म 1875 में हुआ।

प्रमुख मुस्लिम दार्शनिक सैयद ज़फ़रुल हसन का जन्म 1885 में हुआ।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता मोहन धारिया का जन्म 1925 में हुआ।

खूबसूरत अभिनेत्री मधुबाला का जन्‍म 1933 में हुआ था।

हिन्दी के प्रसिद्ध आलोचक कमला प्रसाद का जन्‍म 1938 में हुआ था।

भारतीय जनता पार्टी की महिला राजनीतिज्ञ सुषमा स्वराज का जन्‍म 1952 में हुआ था।

भारतीय अभिनेत्री सकीना जाफ़री का जन्‍म 1962 में हुआ था।

14 फ़रवरी को हुए निधन

1964 में भारतीय सिविल सेवक और प्रशासक वी.टी. कृष्णमाचारी का निधन हुआ था।

1975 में मशहूर लेखक सर पेल्‍हम ग्रेनिवाल वुडहाउस का निधन हुआ था।

2005 में हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार विद्यानिवास मिश्र का निधन हुआ था।

14 फ़रवरी के महत्त्वपूर्ण उत्सव

वैलेंटाइन दिवस।

 

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