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स्वतंत्रता के बाद वीर सावरकर पर चला झूठा मुकदमा
26-Feb-2019    |    Views : 000157

LUCKNOW. विनायक दामोदर सावरकर, न सिर्फ़ एक क्रांतिकारी थे बल्कि एक भाषाविद, बुद्धिवादी, कवि, अप्रतिम क्रांतिकारी, दृढ राजनेता, समर्पित समाज सुधारक, दार्शनिक, द्रष्टा, महान् कवि और महान् इतिहासकार और ओजस्वी आदि वक्ता भी थे। उनके इन्हीं गुणों ने महानतम लोगों की श्रेणी में उच्च पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया।

स्वतंत्रता के बाद वीर सावरकर पर चला झूठा मुकदमा

LUCKNOW. विनायक दामोदर सावरकर, न सिर्फ़ एक क्रांतिकारी थे बल्कि एक भाषाविद, बुद्धिवादी, कवि, अप्रतिम क्रांतिकारी, दृढ राजनेता, समर्पित समाज सुधारक, दार्शनिक, द्रष्टा, महान् कवि और महान् इतिहासकार और ओजस्वी आदि वक्ता भी थे। उनके इन्हीं गुणों ने महानतम लोगों की श्रेणी में उच्च पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया।

वीर सावरकर का पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था। अंग्रेज़ी सत्ता के विरुद्ध भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले विनायक दामोदर सावरकर साधारणतया वीर सावरकर के नाम से विख्यात थे। वीर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को नासिक के भगूर गाँव में हुआ। उनके पिता दामोदरपंत गाँव के प्रतिष्‍ठित व्यक्तियों में जाने जाते थे। जब विनायक नौ साल के थे तभी उनकी माता राधाबाई का देहांत हो गया था। विनायक दामोदर सावरकर, 20वीं शताब्दी के सबसे बड़े हिन्दूवादी थे। उन्हें हिन्दू शब्द से बेहद लगाव था। वह कहते थे कि उन्हें स्वातन्त्रय वीर की जगह हिन्दू संगठक कहा जाए। उन्होंने जीवन भर हिन्दू हिन्दी हिन्दुस्तान के लिए कार्य किया। वह अखिल भारत हिन्दू महासभा के 6 बार राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। 1937 में वे 'हिन्दू महासभा' के अध्यक्ष चुने गए और 1938 में हिन्दू महासभा को राजनीतिक दल घोषित किया था। 1943 के बाद दादर, मुंबई में रहे। बाद में वे निर्दोष सिद्ध हुए और उन्होंने राजनीति से सन्न्यास ले लिया।

1940 ई. में वीर सावरकर ने पूना में ‘अभिनव भारती’ नामक एक ऐसे क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य आवश्यकता पड़ने पर बल-प्रयोग द्वारा स्वतंत्रता प्राप्त करना था। आज़ादी के वास्ते काम करने के लिए उन्होंने एक गुप्त सोसायटी बनाई थी, जो 'मित्र मेला' के नाम से जानी गई।

सावरकर वे पहले कवि थे, जिसने कलम-काग़ज़ के बिना जेल की दीवारों पर पत्थर के टुकड़ों से कवितायें लिखीं। कहा जाता है उन्होंने अपनी रची दस हज़ार से भी अधिक पंक्तियों को प्राचीन वैदिक साधना के अनुरूप वर्षोंस्मृति में सुरक्षित रखा, जब तक वह किसी न किसी तरह देशवासियों तक नहीं पहुच गई।

1910 ई. में एक हत्याकांड में सहयोग देने के रूप में वीर सावरकर एक जहाज़ द्वारा भारत रवाना कर दिये गये। परन्तु फ़्रांस के मार्सलीज़ बन्दरगाह के समीप जहाज़ से वे समुद्र में कूदकर भाग निकले, किन्तु पुनः पकड़े गये और भारत लाये गये।

एक विशेष न्यायालय द्वारा उनके अभियोग की सुनवाई हुई और उन्हें आजीवन कालेपानी की दुहरी सज़ा मिली। सावरकर 1911 से 1921 तक अंडमान जेल (सेल्यूलर जेल) में रहे। 1921 में वे स्वदेश लौटे और फिर 3 साल जेल भोगी। 1937 ई. में उन्हें मुक्त कर दिया गया था, परन्तु भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को उनका समर्थन न प्राप्त हो सका 1947 में इन्होंने भारत विभाजन का विरोध किया। महात्मा रामचन्द्र वीर (हिन्दू महासभा के नेता एवं सन्त) ने उनका समर्थन किया। और 1948 ई. में महात्मा गांधी की हत्या में उनका हाथ होने का संदेह किया गया। इतनी मुश्क़िलों के बाद भी वे झुके नहीं और उनका देशप्रेम का जज़्बा बरकरार रहा और अदालत को उन्हें तमाम आरोपों से मुक्त कर बरी करना पड़ा।

सावरकर वे पहले कवि थे, जिसने कलम-काग़ज़ के बिना जेल की दीवारों पर पत्थर के टुकड़ों से कवितायें लिखीं। कहा जाता है उन्होंने अपनी रची दस हज़ार से भी अधिक पंक्तियों को प्राचीन वैदिक साधना के अनुरूप वर्षोंस्मृति में सुरक्षित रखा, जब तक वह किसी न किसी तरह देशवासियों तक नहीं पहुच गई।

वे प्रथम क्रान्तिकारी थे, जिन पर स्वतंत्र भारत की सरकार ने झूठा मुकदमा चलाया और बाद में निर्दोष साबित होने पर माफी मांगी। उन्होंने अनेक ग्रंथों की रचना की, जिनमें ‘भारतीय स्वातंत्र्य युद्ध’, मेरा आजीवन कारावास’ और ‘अण्डमान की प्रतिध्वनियाँ’ (सभी अंग्रेज़ी में) अधिक प्रसिद्ध हैं।

1909 में लिखी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस-1857' में सावरकर ने इस लड़ाई को ब्रिटिश सरकार के ख़िलाफ़ आज़ादी की पहली लड़ाई घोषित की थी। सावरकर एक प्रख्यात समाज सुधारक थे। उनका दृढ़ विश्वास था, कि सामाजिक एवं सार्वजनिक सुधार बराबरी का महत्त्व रखते हैं व एक दूसरे के पूरक हैं। सावरकर जी की मृत्यु 26 फ़रवरी, 1966 में मुम्बई में हुई थी। वीर सावरकर के निधन पर भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया है। इनके नाम पर ही पोर्ट ब्लेयर के विमानक्षेत्र का नाम वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया है।

पूरे देश और दुनिया के इतिहास में आज के दिन बहुत कुछ हुआ है, जिसको जानकर हम अपने सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकते है। आइये आज जानते हैं 26 फरवरी के इतिहास की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के बारेंमे,

26 फरवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

चंद्रगुप्त प्रथम को 320 में पाटलिपुत्र का शासक बनाया गया।

आज ही के दिन सन 1832 में पोलैंड के संविधान को हटाया गया।

पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में अंग्रेजों के खिलाफ 1857 में पहला सैन्य विद्रोह।

असम शाही परिवार को फिर से गद्दी दिलाने के प्रयासों के कारण 1858 में पियाली बरूआ और दीवान मणिराम दत्ता को फांसी पर चढाया गया।

अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने 1863 में अमेरिकी मुद्रा अधिनियम पर हस्ताक्षर किये।

जापान में सेना ने 1936 में तख्तापलट किया।

वर्धा के निकट अरवी में स्थित विक्रम अर्थ सेटेलाइट स्टेशन 1972 में भारत के चौथे राष्ट्रपति वीवी गिरि ने देश को समर्पित किया।

गुजरात के अहमदाबाद में 1975 में देश का पहला पतंग संग्रहालय ‘शंकर केन्द्र’ स्थापित किया गया।

सद्दाम हुसैन ने कुवैत से अपने सैनिकों को 1991 में इराक़ी रेडियो पर वापसी की घोषणा की।

आज ही के दिन सन 1993 में न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर बम हमले में छह लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा घायल हो गए थे।

कॉपीराइट मुद्दे पर 1995 में चीन तथा सं.रा. अमेरिका के मध्य समझौता।

पांच ग्रैमी अवार्ड जीतकर रैप गायिका लॉरिन हिल ने 1999 में नया रिकार्ड बनाया।

आतंकवादी संगठन तालिबान ने 2001 में अफगानिस्तान के बामियान में बुद्ध की दो विशाल मूर्तियों को नष्ट कर दिया।

परमाणु परिशोधन पर 2006 में रूस और ईरान में समझौता।

अल्जीरिया के राष्ट्रपति ने अरब देशों की बदलती राजनीतिक स्थिति के कारण देश में 19 साल पहले लगाए गए आपातकाल को 2011 में आधिकारिक रूप से समाप्त किया।

26 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति

फ्रेंच लेखक विक्टर ह्यूगो का 1802 में जन्म।

एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी और राजनीतिज्ञ बेनेगल नरसिंह राव का 1887 में जन्म।

भारत के दसवें मुख्य न्यायाधीश कैलाश नाथ वांचू का 1903 में जन्म।

बांग्ला साहित्यकार लीला मजूमदार का 1908 में जन्म।

अमेरिकी अर्थशास्त्री विलियम बौमॉल का 1922 में जन्म।

ब्रिटिश अभिनेत्री मार्गरेट लीटन का 1922 में जन्म।

इसरायली प्रधानमंत्री एरियल शेरॉन का 1928 में जन्म।

अमेरिका के महान गायक जॉनी कैश का 1932 में जन्म।

पत्रकार एवं साहित्यकार मृणाल पाण्डे का 1946 में जन्म।

महिला टेनिस खिलाड़ी ली ना का 1982 में जन्म।

26 फ़रवरी को हुए निधन

सन 1712 में आज ही के दिन बहादुर दिल्ली का सातवाँ मुग़ल बादशाह शाह प्रथम का निधन।

सन 1886 में आज ही के दिन गुजराती भाषा के युग प्रवर्तक माने जाने वाले रचनाकार नर्मद का निधन।

सन 1887 में आज ही के दिन भारत की प्रथम महिला डॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी का निधन।

सन 1966 में आज ही के दिन स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर का निधन।

सन2001 में आज ही के दिन क्रिकेट के महानतम खिलाड़ी सर डॉन ब्रैडमैन का निधन।

सन 2004 में आज ही के दिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण का निधन।

सन 2004 में आज ही के दिन मकदुनिया के राष्ट्रपति बेरिस ट्रेज कोवस्की की विमान दुर्घटना में मृत्यु।

 

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