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समाज के सभी लोग करें मतदान
13-Apr-2019    |    Views : 000299

LUCKNOW. भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, जनता ही देश की सरकार को चुनती है। इसमें जोश और होश दोनों की जरूरत है जिसके तहत युवा और वरिष्ठ नागरिकों की अहम भूमिका साबित होती है।

समाज के सभी लोग करें मतदान

LUCKNOW.  भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, जनता ही देश की सरकार को चुनती है। इसमें जोश और होश दोनों की जरूरत है जिसके तहत युवा और वरिष्ठ नागरिकों की अहम भूमिका साबित होती है। जनती की इसी भागीदारी को जानने के लिए यूनाइट फाउण्डेशन ने माह के दूसरे और चौथे शनिवार को आयोजित होने वाले यूनाइट मंथन के तहत एक परिचर्चा रखी जिसका विषय था लोकतंत्र में वरिष्ठजन और युवाओं की भूमिका। इस परिचर्चा में विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थियों ने भाग लिया।

वरिष्ठ नागरिक जन कल्याण समिति के उपाध्यक्ष वीर चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि आज के लोकतांत्रिक देश में लोगों को सजग करने की जरूरत है, वरना युवाओं को बरगलाने में देर नही लगती है, वे भटक सकते है। तर्कपूर्ण भाषा में वरिष्ठ जनों को समझाना पड़ेगा। युवाओं को सही उदाहरण देकर देश राष्ट्र कर्तव्यों के बारे में समझाने की जरूरत है, जिससे आने वाले समय में देश की दशा और दिशा की राजनीति प्रभावित हो। उन्होने कहा कि समाज के हर वर्ग को जागरुक कर मतदान के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। मतदान जरूर करें, अगर मतदान न करने को मिले तो उसके खिलाफ आवाज उठायें।

समाधान फाउण्डेशन के सचिव अरूणेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र का वीभत्स रूप नजर आता है, कोई पार्टी उससे अछूती नही है। सैद्धांतिक रूप से कोई पार्टी खरी नही उतरती। सरकार में अपनी भागीदारी को निभाकर ही युवा देश के लिए कुछ कर सकते है। उन्होने कहा कि 34 प्रतिशत मतदान से सांसद या विधायक का चयन होता है, जो उचित नही है, जब 65 प्रतिशत लोगों ने हिस्सा ही नही लिया, तो चयन कैसे हुआ।

एमआरएसपी सेवा समिति के पी.के. पात्रा ने कहा कि मतदान शत प्रतिशत हो, सही व्यक्ति की चयन करें और पार्टी का भी ध्यान देना जरूरी है कि व्यक्ति बड़ा या दल है। दल विशेष का सिद्धांत काम करता है।

अधिवक्ता योगेश मिश्रा ने बताया कि देश का प्रधानमंत्री भारत के विधि एवं संविधान के प्रति शपथ लेता है, न कि जनता  व भारत देश के प्रति जिम्मेदारी की शपथ लेता है। उन्होने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री पद पर रहकर यदि वह एक व्यक्ति के लिए प्रचार करता और वोट मांगता है तो वह अपनी शपथ का उलंघन स्वयं करता है इसके साथ ही वह लोकतंत्र के साथ मजाक है। वास्तविक लोगतंत्र के लिए सभी दलों के चिन्ह रद्द कर दिये जाने चाहिए। सभी दलों और निर्दलीयों को 14 दिन के लिए ही चुनाव चिन्ह दिया जाना चाहिए।

परिचर्चा के दौरान यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष डा. पी.के. त्रिपाठी, राधेश्याम दीक्षित ने भी वरिष्ठजन और युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए मतदान पर जोर दिया। इस कार्यक्रम के दौरान दर्जनों उपस्थित लोगों ने अपनी अपनी बात रखी।

 

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