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अंतरिक्ष यात्री जो सितारों की दुनिया में हो गई विलीन
01-Feb-2019    |    Views : 000264

LUCKNOW. कल्पना चावला एक भारतीय अमरीकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थी और अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी। वे कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं।

अंतरिक्ष यात्री जो सितारों की दुनिया में हो गई विलीन

LUCKNOW. कल्पना चावला एक भारतीय अमरीकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थी और अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी। वे कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं।

भारत की बेटी-कल्पना चावला करनाल, हरियाणा, भारत में एक हिंदू भारतीय परिवार में जन्म लिया था। उनका जन्म 17 मार्च् सन् 1962 में एक भारतीय परिवार में हुआ था। उसके पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला और माता का नाम संजयोती था। वह अपने परिवार के चार भाई बहनो में सबसे छोटी थी। कल्पना की प्रारंभिक पढाई “टैगोर बाल निकेतन” में हुई। कल्पना बचपन से ही अंतरिक्ष में घूमने की कल्पना करती थी। कल्पना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण था - उसकी लगन और जुझार प्रवृति। कलपना न तो काम करने में आलसी थी और न असफलता में घबराने वाली थी। उनकी उड़ान में दिलचस्पी 'जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटासे प्रेरित थी जो एक अग्रणी भारतीय विमान चालक और उद्योगपति थे।

कल्पना चावला ने प्रारंभिक शिक्षा टैगोर पब्लिक स्कूल करनाल से प्राप्त की। आगे की शिक्षा वैमानिक अभियान्त्रिकी में पंजाब इंजिनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़, भारत से करते हुए 1982 में अभियांत्रिकी स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वे संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए 1982 में चली गईं और 1984 वैमानिक अभियान्त्रिकी में विज्ञान निष्णात की उपाधि टेक्सास विश्वविद्यालय आर्लिंगटन से प्राप्त की। कल्पना जी ने 1986 में दूसरी विज्ञान निष्णात की उपाधि पाई और 1988 में कोलोराडो विश्वविद्यालय बोल्डर से वैमानिक अभियंत्रिकी में विद्या वाचस्पति की उपाधि पाई। कल्पना जी को हवाईजहाज़ों, ग्लाइडरों व व्यावसायिक विमानचालन के लाइसेंसों के लिए प्रमाणित उड़ान प्रशिक्षक का दर्ज़ा हासिल था। उन्हें एकल व बहु इंजन वायुयानों के लिए व्यावसायिक विमानचालक के लाइसेंस भी प्राप्त थे। अन्तरिक्ष यात्री बनने से पहले वो एक सुप्रसिद्ध नासा कि वैज्ञानिक थी।

1988 के अंत में उन्होंने नासा के एम्स अनुसंधान केंद्र के लिए ओवेर्सेट मेथड्स इंक के उपाध्यक्ष के रूप में काम करना शुरू किया, उन्होंने वहाँ वी/एसटीओएल में सीएफ़डी पर अनुसंधान किया।

कल्पना जी मार्च 1995 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल हुईं और उन्हें 1998 में अपनी पहली उड़ान के लिए चुनी गयीं थी। उनका पहला अंतरिक्ष मिशन 19 नवम्बर 1997 को छह अंतरिक्ष यात्री दल के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान एसटीएस-87 से शुरू हुआ। कल्पना जी अंतरिक्ष में उड़ने वाली प्रथम भारत में जन्मी महिला थीं और अंतरिक्ष में उड़ाने वाली भारतीय मूल की दूसरी व्यक्ति थीं। राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत अंतरिक्ष यान में एक उड़ान भरी थी। कल्पना जी अपने पहले मिशन में 1.04 करोड़ मील का सफ़र तय कर के पृथ्वी की 252 परिक्रमाएँ कीं और अंतरिक्ष में 360 से अधिक घंटे बिताए। एसटीएस-87 के दौरान स्पार्टन उपग्रह को तैनात करने के लिए भी ज़िम्मेदार थीं, इस खराब हुए उपग्रह को पकड़ने के लिए विंस्टन स्कॉट और तकाओ दोई को अंतरिक्ष में चलना पड़ा था। पाँच महीने की तफ़्तीश के बाद नासा ने कल्पना चावला को इस मामले में पूर्णतया दोषमुक्त पाया, त्रुटियाँ तंत्रांश अंतरापृष्ठों व यान कर्मचारियों तथा ज़मीनी नियंत्रकों के लिए परिभाषित विधियों में मिलीं।

1983 में वे एक उड़ान प्रशिक्षक और विमानन लेखक, जीन पियरे हैरीसन से मिलीं और शादी की और 1990 में एक देशीयकृत संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिक बनीं।

अंतरिक्ष पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ही उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। सभी तरह के अनुसंधान तथा विचार - विमर्श के उपरांत वापसी के समय पृथ्वी के वायुमंडल में अंतरिक्ष यान के प्रवेश के समय जिस तरह की भयंकर घटना घटी वह अब इतिहास की बात हो गई। नासा तथा विश्व के लिये यह एक दर्दनाक घटना थी। 1 फ़रवरी 2003 को कोलंबिया अंतरिक्षयान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया। देखते ही देखते अंतरिक्ष यान और उसमें सवार सातों यात्रियों के अवशेष टेक्सास नामक शहर पर बरसने लगे और सफ़ल कहलया जाने वाला अभियान भीषण सत्य बन गया।

ये अंतरिक्ष यात्री तो सितारों की दुनिया में विलीन हो गए लेकिन इनके अनुसंधानों का लाभ पूरे विश्व को अवश्य मिलेगा। इस तरह कल्पना चावला के यह शब्द सत्य हो गए,” मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूँ। प्रत्येक पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए ही मरूँगी।“

1 फ़रवरी का इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के बारेंमे, उन लोगों के जन्मदिन के बारे में जिन्होंने दुनिया में आकर बहुत बड़ा नाम किया साथ ही उन मशहूर लोगों के बारेंमे जो इस दुनिया से चले गए।

1 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

लॉर्ड कार्नवालिस 1786 में भारत के गवर्नर जनरल बने।

न्यूयार्क शहर में 1790 में पहली बार ‘सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स’ का आयोजन किया गया।

‘यूनाइटेड किंगडम’ और नीदरलैंड पर फ़्रांस ने 1793 में युद्ध की घोषणा की।

लार्ड काॅर्नवालिस ने 1797 में बंगाल के गवर्नर जनरल के पद की शपथ ली।

फिलीपींस में 1814 में ज्वालामुखी फटने से करीब 1,200 लोगों की मौत हुई।

कलकत्ता बंगाल क्लब की स्थापना 1827 में हुई।

मॉरीशस में ‘ग़ुलामी प्रथा’ का समापन 1835 में हुआ।

ईस्ट इंडिया रेलवे का विधिवत उद्घाटन 1855 में हुआ।

दिल्ली के सबसे पुराने कॉलेज सेंट स्टीफन काॅलेज की स्थापना 1881 में हुई।

डाक बीमा योजना 1884 में लागू हुई।

1884 में ऑक्सफ़ोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी’ का पहला वॉल्यूम ‘ए टू आंट’ का प्रकाशन।

सन 1908 ईसवी को पुर्तगाल के राजा कार्रलोस प्रथम की उनके पुत्र के साथ लिसबन में हत्या कर दी गयी।

असहयोग आंदोलन तेज करने की जानकारी महात्मा गाँधी ने 1922 में भारत के वायसराय को दी।

यू.एस.एस.आर. ने 1924 में यूनाइटेड किंगडम को मान्यता प्रदान की।

द टाइम्‍स ने 1930 में पहली बार क्रास वर्ड पजल को प्रकाशित किया।

1946 ईसवी को नार्वे के नेता ट्रेग्वे लाई को संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रथम महासचिव चुना गया।

‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ ने 1949 में ‘एसोसिएटेड प्रेस ऑफ इंडिया’ का अधिग्रहण कर लिया।

दक्षिण अफ्रीका ने 1956 में सोवियत संघ के वाणिज्य दूतावास के कर्मचारियों को वापिस बुलाने की माँग की।

सीरिया और मिस्र को 1958 में ‘यूनाइटेड अरब रिपब्लिक’ में मिला दिया गया, जो कि 1961 तक बना रहा।

भारत में ‘यूनिट ट्रस्ट’ की स्थापना 1964 में हुई।

‘भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विमान पतनन प्राधिकरण’ का गठन 1972 में हुआ।

‘राष्ट्रीय संवाद समिति समाचार’ का गठन 1976 में हुआ।

‘भारतीय तट रक्षक बल’ का गठन 1977 में हुआ।

भारत के पहले राष्ट्रीय रेल संग्रहालय दिल्ली की स्थापना 1977 में हुयी।

15 वर्षों तक निर्वासित जीवन बिताने के बाद 1979 में अयातुल्ला खुमैनी का ईरान आगमन।

मोहम्मद अजहरूद्दीन ने 1985 में कानपुर में शतक बनाकर लगातार तीन टेस्टों में शतक का विश्व रिकार्ड बनाया।

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में 1991 में आये भूकंप से लगभग 1000 लोगों की मृत्यु हुयी।

भोपाल के मुख्य न्यायाधीश ने 1992 में ‘यूनियन कार्बाइड’ के पूर्व सी ई ओ वारेन ऐन्डरसन फ़रार घोषित किया।

केन्द्रशासित प्रदेश दिल्ली को 1992 में नया नाम ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली’ दिया गया।

पीटर कोर्डा ने 1998 में मार्सिलो रियोस को हराकर आस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस चैंपियनशिप का ख़िताब जीता।

अंतर्राष्ट्रीय इस्लामी धर्मसभा का 1999 में टांगी (बांग्लादेश) में आयोजन।

ईसवी 2000 को न्यू मैक्सिको की लॉस एलेम्स राष्ट्रीय प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों ने एड्ज़ के जीवाणुओं की उत्पत्ति का पता लगाने की घोषणा की।

अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की 2002 में आतंकवादियों ने सिर कलम करके हत्या की।

अंतरिक्ष से वापिस लौटते वक़्त 2003 में हुई ‘कोलम्बिया यान दुर्घटना’ में भारत की कल्पना चावला सहित सात अंतरिक्ष यात्री मारे गये।

सऊदी अरब में 2004 में हज यात्रा के दौरान मची भगदड़ में लगभग 300 लोगों की मौत और 250 घायल।

नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने 2005 में प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा को हटाकर तीन वर्ष के लिए सारे कार्यकारी अधिकार अपने पास लिए।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2006 में दस वर्षीय ‘अमेरिकी प्रतिस्पर्धी योजना’ की घोषणा की।

इफ़को ने 2007 में जार्डन कंपनी जेपीएम के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया।

चार देशों के ‘पंजाब गोल्ड कप हॉकी टूर्नामेंट’ में 2009 में भारत ने न्यूज़ीलैंड को 2-0 से हराया।

मेलबर्न, आस्ट्रेलिया में भारत के महेश भूपति और सानिया मिर्ज़ा की जोड़ी ने 2009 में पहली बार मिक्स्ड डबल का ख़िताब जीता।

1 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति

1914 में अभिनेता अवतार किशन हंगल का जन्‍म हुआ था।

1955 में भारत के प्रसिद्ध कुश्ती पहलवान सतपाल सिंह का जन्‍म हुआ था।

1956 में भारतीय फ़िल्म अभिनेता ब्रह्मनंदन का जन्‍म हुआ था।

1957 में फ़िल्म अभिनेता जैकी श्रॉफ़ का जन्‍म हुआ था।

1967 में भारतीय राजनीतिज्ञ शिशुपाल नाथु पाटले का जन्‍म हुआ था।

1971 में भारतीय क्रिकेटर अजय जडेजा का जन्‍म हुआ था।

1915 में हैजा के जीवाणु पर शोध कार्य करने वाले भारतीय वैज्ञानिक शंभुनाथ डे का जन्‍म हुआ था।

1861 में भारतीय स्वतंत्रता सेनानी ब्रह्मबांधव उपाध्याय का जन्‍म हुआ था।

1 फ़रवरी को हुए निधन

1882 में हिमालयी इलाकों की खोज करने वाले पहले भारतीय नैन सिंह रावत का निधन हुआ था।

1969 में प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक और शिक्षाविद मगन भाई देसाई का निधन हुआ था।

2003 में पहली भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री कल्‍पना चावला का निधन हुआ था।

 

 

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