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गुणवत्ता में देशी गाय का दूध उत्तम
09-Dec-2018    |    Views : 000231

गुणवत्ता में देशी गाय का दूध उत्तम

Lucknow.  भारतीय संस्कृति में गाय व गो दुग्ध सनातन काल से रचा बसा है। गाय का दूध जहां पूर्ण आहार माना जाता है, वहीं बच्चों को मां के दूध के विकल्प के रूप में देखने से गाय को माता की संज्ञा दी जाती है। गाय का गोबर, गो मूत्र, दधि, गो घृत व गो दुग्ध पंचगव्य आधारित औषधि के रूप में प्रयोग करने से विभिन्न रोगों की चिकित्सा में भी उपयोगी है, जिसे काऊ थेरेपी के रूप में जाना जाता है। गाय के दूध के विभिन्न पदार्थ भारतीय व्यंजन में विशेष महत्व रखते है। अतः इसकी आध्यात्मिक व पोषकता के गुणों के कारण यह आज भी सामान्य जनजीवन में अपना स्थान बनाये है। देशी गाय का दूध हल्का मीठा, ठंडे स्वभाव का, पोषण युक्त टानिक, सरलता से पचने वाला और इसके लेने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के साथ आयवर्धक है।

देश में गत् कुछ दशकों से चलाये गये संकर प्रजनन कार्यक्रम जिसमें देशी गाय व विदेशी गौ नर के द्वारा उत्पादित संकर नस्ल के गौ पशुओं की दुग्ध क्षमता तो बढ़ गयी है परन्तु गुणवत्ता में हास हुआ, दूध में अपचता व विभिन्न रोगों का कारक भी हुआ।

विश्व में सभी गो वंश मूल रूप से बीटा केजीन ए2 टाइप की प्रोटीन युक्त दूध देती है। इस प्रोटीन में 229 अमीनों एसिड की चेन होती है। गो वंशी पशु के दूध में प्रोलीन विशिष्ट अमीनों एसिड होता है जिसके कारण इसे ए2 गाय भी कहते है। वस्तुतः यह मूल नस्ल के गायों के दूध में पाई जाती है।

लगभग 5000 वर्ष पूर्व प्रोलीन प्रोटीन अमीनों एसिड में म्यूटेशन होने के कारण जो कि हिस्टीडीन में परिवर्तित हो गया जिससे इस दूध वाली गाय को ए1 कहा गया।

प्रोलीन में बीसीएम 7 क्षुद्र प्रोटीन के साथ जुड़ाव रहता है। बीसीएम 7 का दूध में आना कम या न के बराबर हो गया है। यहां तक की बीसीएम 7 गो मूत्र , रक्त व आंतों में भी मूल नस्ल की ए2 गायों में नही पाया जाता है। जिसकी अनुपस्थिति में बीसीएम 7 मुक्त दूग्ध की गुणवत्ता बढ़ जाती है। उसी जगह ए1 वाली गो वंश के दुग्ध में प्रोलीन का म्यूटेंट हिस्टीडीन बीसीएम 7 क्षुद्र प्रोटीन होने के कारण मनुष्य व पशुओं के पेट में आहरण पर चला जाता है।

ए2 बीटा केजीन दूध पेप्टाइड में विभक्त होता है जो कि अमीनों एसिड में परिवर्तित होता है, जिसमें यह दूध अति पाचनशील हो जाता है। वहीं ए1 बीटा केजीन वाला दूध के पेप्टाइड अमीनों एसिड में परिवर्तित न होने से अपच हो जाते है।

बीसीएम 7 वाले ए1 दुग्ध आहारनाल के द्वारा रक्त वाहिनी में जाकर कारोनरी हार्ट डिजीज, टाइप- 1 डायबिटीज, आटिज्म रोग का कारक बनता है। कभी- कभी यह नाड़ी तंत्र को भी प्रभावित कर आटिस्टिक्स व सीजोफ्रेनिया रोग भी उत्पन्न करता है। शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने के साथ विभिन्न रोगों को उत्पन्न करने के कारण इस ए1 बीटा केजीन दूध को दूध में दैत्य डेविल इन मिल्क की संज्ञा दी गयी है।

ए1 दूध वाले गोवंश यूएसए, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड व अन्य यूरोपियन की अधिकांश गो नस्ल में पाया जाता है। जो कि जर्सी, होल्स्टीन, फ्रेजियन आदि बिना बूचड़ की है। भारत वर्ष के स्वदेशी गोवंश जिसमें बूचड़ होता है जैसे गीर, साहीवाल, रेड सिंधी, थार पारकर, राठी में शत प्रतिशत व अन्य देसी नस्लों में लगभग 94 प्रतिशत पाया जाता है।

 

गाय के दूध व मां के दूध में समानता ( प्रति 100 ग्राम दूध)

1 . अवयव ( ग्राम )

   जल                  88.00           87.00

  प्रोटीन                  1.2              3.3

कार्बोहाइड्रेड                7.0              4.8

   वसा                  3.4              4.1

 कैलोरी                  65               67

2 . खनिज ( मि.ग्रा.)

  कैल्शियम               28              120

  फास्फोरस               11               90

     लौह                0.1               0.2

    गंधक                0                 15

 पोटेशियम               0                140

 सोडियम                 0                16

3 . विटामिन ( मि.ग्रा.)

  विटामिन सी             3            2

 विटामिन ए (आई.यू.)       137         174

  निकोटिन एसिड           0            0.1

     थायमिन             0.02         0.05

    कैरोटिन               0            10

राइबोफ्लेविन               0.02          0.19

 

 

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