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चौरी चौरा काण्ड ने रोका गांधी का असहयोग आंदोलन
04-Feb-2019    |    Views : 000245

LUCKNOW. 5 फरवरी 1922 को गोरखपुर का चौरीचौरा काण्ड हुआ था। अंग्रेजी हुकूमत के समय सम्भवत: देश का पहला यह काण्ड है जिसमें पुलिस की गोली खाकर जान गंवाने वाले आजादी के दीवानों के अलावा गुस्से का शिकार बने पुलिसवाले भी शहीद माने जाते हैं।

चौरी चौरा काण्ड ने रोका गांधी का असहयोग आंदोलन

LUCKNOW. 5 फरवरी 1922 को गोरखपुर का चौरीचौरा काण्ड हुआ था। अंग्रेजी हुकूमत के समय सम्भवत: देश का पहला यह काण्ड है जिसमें पुलिस की गोली खाकर जान गंवाने वाले आजादी के दीवानों के अलावा गुस्से का शिकार बने पुलिसवाले भी शहीद माने जाते हैं। पुलिसवालों को अपनी ड्यूटी के लिए शहीद माना जाता है तो आजादी की लड़ाई में जान गवाने से सत्याग्रहियों को। 5 फरवरी को दोनों अपनी-अपनी शहादत दिवस के रूप में मनाते हैं। थाने के पास बनी समाधी पर पुलिसवाले शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हैं। वहीं अंग्रेजी पुलिस के शिकार सत्याग्रहियों को पूरा देश श्रद्धांजलि देकर नमन करता है।

महात्मा गांधी ने विदेशी कपड़ों के बहिष्कार, अंग्रेजी पढ़ाई छोड़ने और चरखा चलाकर कपड़े बनाने का अह्वान किया था। उनका यह सत्याग्रह आंदोलन पूरे देश में रंग ला रहा था। 5 फरवरी 1922 दिन शनिवार को चौरीचौरा के भोपा बाजार में सत्याग्रही इकट्ठा हुए और थाने के सामने से जुलूस की शक्ल में गुजर रहे थे। तत्कालीन थानेदार ने जुलूस को अवैध मजमा घोषित कर दिया। एक सिपाही ने वालंटियर की गांधी टोपी को पांव से रौंद दिया। गांधी टोपी को रौंदता देख सत्याग्रही आक्रोशित हो गए। उन्होंने इसका विरोध किया तो पुलिस ने जुलूस पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसमें 11 सत्याग्रही मौके पर ही शहीद हो गए जबकि 50 से ज्यादा घायल हो गए। गोली खत्म होने पर पुलिसकर्मी थाने की तरफ भागे। फायरिंग से भड़की भीड़ ने उन्हें दौड़ा लिया। थाने के पास स्थित एक दुकान से एक टीना केरोसीन तेल उठा लिया। मूंज और सरपत का बोझा थाना परिसर में बिछाकर उस पर केरोसीन उड़ेलकर आग लगा दी। थानेदार ने भागने की कोशिश की तो भीड़ ने उसे पकड़कर आग में फेंक दिया। इस काण्ड में एक सिपाही मुहम्मद सिद्दिकी भाग निकला और झंगहा पहुंच कर गोरखपुर के तत्कालीन कलेक्टर को उसने घटना की सूचना दी।

इस घटना में थानेदार गुप्तेश्वर सिंह, उप निरिक्षक सशस्त्र पुलिस बल पृथ्वी पाल सिंह, हेड कांस्टेबल वशीर खां, कपिलदेव सिंह, लखई सिंह, रघुवीर सिंह, विषेशर राम यादव, मुहम्मद अली, हसन खां, गदाबख्श खां, जमा खां, मगरू चौबे, रामबली पाण्डेय, कपिल देव, इन्द्रासन सिंह, रामलखन सिंह, मर्दाना खां, जगदेव सिंह, जगई सिंह, और उस दिन वेतन लेने थाने पर आए चौकीदार बजीर, घिंसई,जथई व कतवारू राम की मौत हुई थी।

अदालत में अब्दुल्ला, भगवान, विक्रम, दुदही, काली चरण, लाल मुहम्मद, लौटी, मादेव, मेघू अली, नजर अली, रघुवीर, रामलगन, रामरूप, रूदाली, सहदेव, सम्पत पुत्र मोहन, संपत, श्याम सुंदर व सीताराम को घटना के लिए दोषी मानते हुए फांसी दी गई थी।

गोरखपुर जिला कांग्रेस कमेटी के उपसभापति प. दशरथ प्रसाद द्विवेदी ने घटना की सूचना गांधी जी को चिट्ठी लिखकर दी थी। इस घटना को हिंसक मानते हुए गांधी जी ने अपना असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया था।

चौरीचौरा काण्ड के लिए पुलिस ने सैकड़ों लोगों को अभियुक्त बनाया। गोरखपुर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश मिस्टर एचई होल्मस ने 9 जनवरी 1923 को 418 पेज के निर्णय में 172 अभियुक्तों को सजाए मौत का फैसला सुनाया। दो को दो साल की कारावास और 47 को संदेह के लाभ में दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी गोरखपुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अभियुक्तों की तरफ से अपील दाखिल की जिसका क्रमांक 51 सन 1923 था। इस अपील की पैरवी पं. मदन मोहन मालवीय ने की। मुख्य न्यायाधीश सर ग्रिमउड पीयर्स तथा न्यायमूर्ति पीगट ने सुनवाई शुरू की। 30 अप्रैल 1923 को फैसला आया जिसके तहत 19 अभियुक्तों को मृत्यु दण्ड, 16 को काला पानी, इसके अलावा बचे लोगों को आठ, पांच व दो साल की सजा दी गई। तीन को दंगा भड़काने के लिए दो साल की सजा तथा 38 को छोड़ दिया गया।

भारत के साथ साथ देश विदेश की दुनिया में 4 फरवरी के इतिहास में कुछ विशेष घटनाएँ घटी है जिसने अपना दर्जा इतिहास में अंकित कर दिया है। इतिहास में बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएँ घटी है, आज हम उसी घटनाओं के बारेमें जानते हैं।

4 फरवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

बांका महार भागवतभक्त ने 1318 में आज के दिन समाधि ली थी।

शाहजहां को आगरा का सम्राट 1628 में घोषित किया गया था।

सन 1789 में जॉर्ज वॉशिंगटन को अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में चुना गया

लोकमान्‍य तिलक के संपादन में दैनिक समाचार पत्र ‘केसरी’ का पहला अंक 1881 में आया था।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन समय हुआ चौरीचौरा काण्ड 1922 को हुआ।

महात्मा गांधी को ख़राब स्वास्थ्य के कारण 1924 में बिना किसी शर्त के मुंबई जेल से छोड़ दिया गया।

भारत की सातवीं आर्मी बर्मा पर 1944 में जपान ने हमला किया था।

RSS ने 1948 में रिज़र्व बैंक की राष्ट्रीयता पर बैन लगा दिया।

श्रीलंका 1948 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ।

भारत पाकितान के बीच 1953 में कश्मीर के मुद्दे पर पहली बार बात हुई थी।

सन 1976 में लोक सभा को एक साल के लिये बढ़ा दिया गया था।

एर्नाकुलम को 1990 में भारत का सबसे पहला शिक्षित राज्य घोषित किया था।

दुनिया को बदलने वाली सोशलनेटवर्किंग साइट फेसबुक को मार्क ज़ुकेरबर्ग ने 2004 में लांच किया था।

4 फरवरी को जन्मे व्यक्ति

1909 में बल्लेबाज़ और भारतीय अंपायर का विदर्भा में जन्म हुआ था।

1922 में मशहूर शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी का जन्म हुआ था।

1924 में भारत के नवें उपराष्ट्रपति कोचेरिल रमन नारायण का जन्म हुआ था।

1938 में देश के मशहूर कथक कलाकार बिरजू महाराज का जन्‍म हुआ था।

1974 में भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर का जन्‍म हुआ था।

4 फरवरी को हुए निधन

1934 में भारत के देशभक्त मधुसूदन दास का निधन हुआ था।

1974 में प्रसिद्ध गणितज्ञ सत्येन्द्र नाथ बोस का निधन हुआ था।

2001 में क्रिकेटर पंकज रॉय का निधन हुआ था।

2002 में प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता भगवान दादा का निधन हुआ था।

4 फरवरी के महत्वपूर्ण दिवस

विश्‍व कैंसर दिवस

 

 

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