EMAIL

info@unitefoundation.in

Call Now

+91-7-376-376-376

ब्लॉग

छत्रपति शिवाजी ने भारत में रखीं मराठा साम्राज्य की नींव
19-Feb-2019    |    Views : 00045

LUCKNOW. शिवाजी भारत के महान् योद्धा एवं रणनीतिकार थे, जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुग़ल साम्राज्य से संघर्ष किया। सन 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वे छत्रपति बने।

छत्रपति शिवाजी ने भारत में रखीं मराठा साम्राज्य की नींव

LUCKNOW. शिवाजी भारत के महान् योद्धा एवं रणनीतिकार थे, जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुग़ल साम्राज्य से संघर्ष किया। सन 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वे छत्रपति बने। शिवाजी ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों की सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने समर-विद्या में अनेक नवाचार किये तथा छापामार युद्ध की नयी शैली (शिवसूत्र) को विकसित किया। उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनैतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया और फ़ारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया।

भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में बहुत-से लोगों ने शिवाजी के जीवन-चरित से प्रेरणा लेकर भारत की स्वतन्त्रता के लिये अपना तन, मन धन न्यौछावर कर दिया। शिवाजी के पिता शाहजी भोंसले ने शिवाजी के जन्म के उपरान्त ही अपनी पत्नी जीजाबाई को प्रायः त्याग दिया था। उनका बचपन बहुत उपेक्षित रहा और वे सौतेली माँ के कारण बहुत दिनों तक पिता के संरक्षण से वंचित रहे।

जीजाबाई यादव वंश से थीं। उनके पिता एक शक्तिशाली और प्रभावशाली सामन्त थे। बालक शिवाजी का लालन-पालन उनके स्थानीय संरक्षक दादाजी कोणदेव, जीजाबाई तथा समर्थ गुरु रामदास की देखरेख में हुआ। माता जीजाबाई तथा गुरु रामदास ने कोरे पुस्तकीय ज्ञान के प्रशिक्षण पर अधिक बल न देकर शिवाजी के मस्तिष्क में यह भावना भर दी थी कि देश, समाज, गौ तथा ब्राह्मणों को मुसलमानों के उत्पीड़न से मुक्त कराना उनका परम कर्तव्य है। कुछ स्वामिभक्त लोगों का एक दल बनाकर उन्होंने उन्नीस वर्ष की आयु में पूना के निकट तोरण के दुर्ग पर अधिकार करके अपना जीवन-क्रम आरम्भ किया। उनके हृदय में स्वाधीनता की लौ जलती थी। उन्होंने कुछ स्वामिभक्त साथियों को संगठित किया। धीरे धीरे उनका विदेशी शासन की बेड़ियाँ तोड़ने का संकल्प प्रबल होता गया।

शिवाजी का विवाह साइबाईं निम्बालकर के साथ सन 1641 में बंगलौर में हुआ था। उनके गुरु और संरक्षक कोणदेव की 1647 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद शिवाजी ने स्वतंत्र रहने का निर्णय लिया।

सन 1640 और 1641 के समय बीजापुर महाराष्ट्र पर विदेशियों और राजाओं के आक्रमण हो रहे थें। शिवाजी महाराज मावलों को बीजापुर के विरुद्ध इकट्ठा करने लगे। मावल राज्य में सभी जाति के लोग निवास करते हैं, बाद में शिवाजी महाराज ने इन मावलो को एक साथ आपस में मिलाया और मावला नाम दिया। इन मावलों ने कई सारे दुर्ग और महलों का निर्माण करवाया था।

इन मावलो ने शिवाजी महाराज का बहुत भी ज्यादा साथ दिया। बीजापुर उस समय आपसी संघर्ष और मुगलों के युद्ध से परेशान था जिस कारण उस समय के बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह ने बहुत से दुर्गो से अपनी सेना हटाकर उन्हें स्थानीय शासकों के हाथों में सौप दी दिया था।

तभी अचानक बीजापुर के सुल्तान बीमार पड़ गए थे और इसी का फायदा देखकर शिवाजी महाराज ने अपना अधिकार जमा लिया था। शिवाजी ने बीजापुर के दुर्गों को हथियाने की नीति अपनायी और पहला दुर्ग तोरण का दुर्ग को अपने कब्जे में ले लिया था।

तोरण का दुर्ग पूना (पुणे) में हैं। शिवाजी महाराज ने सुल्तान आदिलशाह के पास अपना एक दूत भेजकर खबर भिजवाई की अगर आपको किला चाहिए तो अच्छी रकम देनी होगी, किले के साथ-साथ उनका क्षेत्र भी उनको सौपं दिया जायेगा। शिवाजी महाराज इतने तेज और चालाक थे की आदिलशाह के दरबारियों को पहले से ही खरीद लिया था।

शिवाजी जी के साम्राज्य विस्तार नीति की भनक जब आदिलशाह को मिली थी तब वह देखते रह गया। उसने शाहजी राजे को अपने पुत्र को नियंत्रण में रखने के लिये कहा लेकिन शिवाजी महाराज ने अपने पिता की परवाह किये बिना अपने पिता के क्षेत्र का प्रबन्ध अपने हाथों में ले लिया था और लगान देना भी बंद कर दिया था।

वे 1647 ई. तक चाकन से लेकर निरा तक के भू-भाग के भी मालिक बन चुके थें। अब शिवाजी महाराज ने पहाड़ी इलाकों से मैदानी इलाकों की और चलना शुरू कर दिया था। शिवाजी जी ने कोंकण और कोंकण के 9 अन्य दुर्गों पर अपना अधिकार जमा लिया था। शिवाजी महाराज को कई देशी और कई विदेशियों राजाओं के साथ-साथ युद्ध करना पड़ा था और सफल भी हुए थे।

बीजापुर के सुल्तान शिवाजी महाराज की हरकतों से पहले ही गुस्से में था। सुल्तान ने शिवाजी महाराज के पिता को बंदी बनाने का आदेश दिया था। शाहजी उनके पिता उस समय कर्नाटक राज्य में थें और दुर्भाग्य से शिवाजी महाराज के पिता को सुल्तान के कुछ गुप्तचरों ने बंदी बना लिया था। उनके पिता को एक शर्त पर रिहा किया गया कि शिवाजी महाराज बीजापुर के किले पर आक्रमण नहीं करेगा। पिताजी की रिहाई के लिए शिवाजी महाराज ने भी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए 5 सालों तक कोई युद्ध नहीं किया और तब शिवाजी अपनी विशाल सेना को मजबूत करने में लगे रहे।

शाहजी की रिहा के समय जो शर्ते लागू की थी उन शर्तो में शिवाजी ने पालन तो किया लेकिन बीजापुर के साउथ के इलाकों में अपनी शक्ति को बढ़ाने में ध्यान लगा दिया था पर इस में जावली नामक राज्य बीच में रोड़ा बना हुआ था। उस समय यह राज्य वर्तमान में सतारा महाराष्ट्र के उत्तर और वेस्ट के कृष्णा नदी के पास था। कुछ समय बाद शिवाजी ने जावली पर युद्ध किया और जावली के राजा के बेटों ने शिवाजी के साथ युद्ध किया और शिवाजी ने दोनों बेटों को बंदी बना लिया था और किले की सारी संपति को अपने कब्जे में ले लिया था और इसी बीच कई मावल शिवाजियो के साथ मिल गए थे।

मुगलों के शासक औरंगजेब का ध्यान उत्तर भारत के बाद साउथ भारत की तरफ गया। उसे शिवाजी के बारे में पहले से ही मालूम था। औरंगजेब ने दक्षिण भारत में अपने मामा शाइस्ता खान को सूबेदार बना दिया था। शाइस्ता खान अपने 150,000 सैनिकों को लेकर पुणे पहुँच गया और उसने 3 साल तक लूटपाट की।

एक बार शिवाजी ने अपने 350 मावलो के साथ उनपर हमला कर दिया था तब शाइस्ता खान अपनी जान निकालकर भाग खड़ा हुआ और शाइस्ता खान को इस हमले में अपनी 4 उँगलियाँ खोनी पड़ी। इस हमले में शिवाजी महाराज ने शाइस्ता खान के पुत्र और उनके 40 सैनिकों का वध कर दिया था। उसके बाद औरंगजेब ने शाइस्ता खान को दक्षिण भारत से हटाकर बंगाल का सूबेदार बना दिया था।

इस जीत से शिवाजी की शक्ति ओर मजबूत हो गयी थीं। लेकिन 6 साल बाद शाइस्ताखान ने अपने 15,000 सैनिको के साथ मिलकर राजा शिवाजी के कई क्षेत्रो को जला कर तबाह कर दिया था। बाद में शिवाजी ने इस तबाही को पूरा करने के लिये मुगलों के क्षेत्रों में जाकर लूटपाट शुरू कर दी। सूरत उस समय हिन्दू मुसलमानों का हज पर जाने का एक प्रवेश द्वार था। शिवाजी ने 4 हजार सैनिको के साथ सूरत के व्यापारियों को लुटा लेकिन उन्होंने किसी भी आम आदमी को अपनी लुट का शिकार नहीं बनाया।

शिवाजी महाराज को आगरा बुलाया गया जहाँ उन्हें लगा कि उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया गया है। इसके खिलाफ उन्होंने अपना रोष दरबार पर निकाला और औरंगजेब पर छल का आरोप लगाया। औरंगजेब ने शिवाजी को कैद कर लिया था और शिवाजी पर 500 सैनिको का पहरा लगा दिया। कुछ ही दिनों बाद 1666 को शिवाजी महाराज को जान से मारने का औरंगजेब ने इरादा बनाया था लेकिन अपने बेजोड़ साहस और युक्ति के साथ शिवाजी और संभाजी दोनों कैद से भागने में सफल हो गये।

संभाजी को मथुरा में एक ब्राह्मण के यहाँ छोड़ कर शिवाजी महाराज बनारस चले गये थे और बाद में सकुशल राजगड आ गये। औरंगजेब ने जयसिंह पर शक आया और उसने विष देकर उसकी हत्या करा दी। जसवंत सिंह के द्वारा पहल करने के बाद शिवाजी ने मुगलों से दूसरी बार संधि की। 1670 में सूरत नगर को दूसरी बार शिवाजी ने लुटा था, यहाँ से शिवाजी को 132 लाख की संपति हाथ लगी और शिवाजी ने मुगलों को सूरत में फिर से हराया था।

सन 1674 तक शिवाजी ने उन सारे प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था जो पुरंदर की संधि के अन्तर्गत उन्हें मुगलों को देने पड़े थे। बालाजी राव जी ने शिवाजी का सम्बन्ध मेवाड़ के सिसोदिया वंश से मिलते हुए प्रमाण भेजे थें। इस कार्यक्रम में विदेशी व्यापारियों और विभिन्न राज्यों के दूतों को इस समारोह में बुलाया था। शिवाजी ने छत्रपति की उपाधि धारण की और काशी के पंडित भट्ट को इसमें समारोह में विशेष रूप से बुलाया गया था। शिवाजी के राज्यभिषेक करने के 12वें दिन बाद ही उनकी माता का देहांत हो गया था और फिर दूसरा राज्याभिषेक हुआ।शिवाजी अपने आखिरी दिनों में बीमार पड़ गये थे और 3 अप्रैल 1680 में शिवाजी की मृत्यु हो गयी थी।

आज सारे भारत देश में खास कर महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्मदिन मनाया जा रहा हैं लेकिन उसके साथ ही 19 फ़रवरी के इतिहास में यानि आज के इतिहास में देश विदेश में बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएँ घटी हैं। जिसके बारेमें आज हम इस लेख में जानेंगे।

19 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

1389 में दिल्ली के सुल्तान गयासुद्दीन तुग़लक़ द्वितीय की हत्या हुई।

एंजाऊ के ड्यूक ने 1570 में दक्षिणी नीदरलैंड पर हमला किया जिसमे फ़्रांसीसी सेना ने उनकी मदत की।

वेनिस शांति संधि के तहत 1618 में आस्ट्रेलिया और वेनिस का युद्ध समाप्त हुआ।

ब्रिटिश फ़ौजें 1674 में डच युद्ध से हट गईं।

1719 को मुगल शासक फर्रुख सियर की हत्या।

तुर्की के साथ युद्ध में 1807 में रूस को मदद देने ब्रिटिश सैनिक पहुँचे।

थॉमस एडीसन ने 1878 में फोनोग्राफ का पेटेंट कराया।

अमृत बाजार पत्रिका का 1891 में दैनिक प्रकाशन शुरू हुआ।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 में उत्तरी ऑस्ट्रेलियाई शहर डार्विन पर जापानी लड़ाकू विमानों के हमले में लगभग 200 के करीब लोग मारे गए।

साइप्रस की स्वतंत्रता के बारे में ब्रिटेन, तुर्की और यूनान के बीच 1959 में एक समझौता हुआ।

सोवियत संघ 1963 में क्यूबा से अपने काफ़ी सैनिक हटाने के बारे में सहमत हुआ।

बांग्ला और हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गायक, संगीतकार और अभिनेता पंकज मलिक का निधन 1978 में हुआ।

भारत में 1986 में पहली बार कम्प्यूटरीकृत रेलवे आरक्षण टिकट की शुरूआत हुयी।

सन 1993 में हैतो के पास समुद्र में एक जहाज़ डूबने से लगभग 1500 यात्रियों जान गयी।

चीन में आर्थिक सुधारों की शुरुआत के लिए पहचाने जाने वाले डेंग शियाओ पिंग की 1997 में मृत्यु हो गई।

डेनमार्क के वैज्ञानिक डॉक्टर लेन वेस्टरगार्ड ने 1999 में वाशिंगटन में प्रकाश की गति धीमी करने में सफलता पाई।

तुवालू 2000 में संयुक्त राष्ट्र का 189वां सदस्य बना।

सन 2001 में ब्राजील की जेलों में दंगे, 8 मरे, 7000 लोगों को क़ैदियों ने बंधक बनाया, तालिबान लादेन के प्रत्यर्पण को तैयार।

संयुक्त अरब अमीरात ने 2003 में दाऊद के भाई इक़बाल शेख़ व उसके सहयोगी एजाज पठान को भारत को सौंपा।

पाकिस्तान ने 2006 में हत्फ़ द्वितीय (अब्दाली) मिसाइल का परीक्षण किया।

संस्कृत कवि स्वामी श्रीरामभद्राचार्य को उनके महांकाव्य श्री भार्वराधवीयम के लिए 2008 में वाचस्पति सम्मान प्रदान किया गया।

19 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति

1473 में प्रसिद्ध यूरोपिय खगोलशास्त्री व गणितज्ञ निकोलस कॉपरनिकस का जन्म हुआ।

1630 में मराठा साम्राज्य के पहले शासक छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म जुन्नर में हुआ।

1717 में अंग्रेज़ अभिनेता तथा मंच संचालक डेविड गैरिक का जन्म हुआ।

1898 में राजस्थान के प्रसिद्ध क्रांतिकारी तथा समाज सेवक गोकुलभाई भट्ट का जन्म हुआ।

1925 में भारत के सुप्रसिद्ध शिल्पकार राम वी. सुतार का जन्म हुआ।

1930 में दक्षिण भारतीय फ़िल्म निर्देशक के विश्वनाथ का जन्म हुआ।

1964 में फ़िल्म अभिनेत्री सोनू वालिया का जन्म हुआ।

19 फ़रवरी को हुए निधन

हिन्दी के जाने माने प्रकाशक मुंशी नवलकिशोर का निधन 1895 में हुआ।

स्वतंत्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले का निधन 1915 में हुआ।

भारत के प्रसिद्ध विद्वान, समाजवादी, विचारक, शिक्षाशास्त्री और देशभक्त नरेन्द्र देव का निधन 1956 में हुआ।

बांग्ला और हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गायक, संगीतकार और अभिनेता पंकज मलिक का निधन 1978 में हुआ।

प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार नारायण श्रीधर बेन्द्रे का निधन 1992 में हुआ।

फ़िल्म अभिनेता निर्मल पांडे का निधन 2010 में हुआ।

भारत के भूतपूर्व 39वें मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर का निधन 2017 में हुआ।

 

 

Save the Children India, Best NGO to Support Child Rights, Best NGO in Lucknow, Skills Development NGO, Health NGO Lucknow, Education NGO Lucknow, NGO for Women Empowerment, NGO in India, Non Governmental Organisations, Non Profit Organisations, Best NGO in India

 


All Comments

Leave a Comment

विशिष्ट वक्तव्य 

विशिष्ट महानुभावों के वशिष्ट अवसरों पर राय

Facebook
Follow us on Twitter
Recommend us on Google Plus
Visit To Website