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कान की बीमारी में भी आता है चक्कर
12-Feb-2019    |    Views : 000239

LUCKNOW. अगर आपको चलने-फिरने के दौरान तेज चक्कर आता, चलते समय बैलेंस नहीं बनता और सिर घूमने लगता है। ऐसे में न्यूरॉलजी या आंख के डॉक्टर से इलाज करवाते हैं, लेकिन यह बीमारी कान से भी संबंधित हो सकती है।

कान की बीमारी में भी आता है चक्कर

LUCKNOW. अगर आपको चलने-फिरने के दौरान तेज चक्कर आता, चलते समय बैलेंस नहीं बनता और सिर घूमने लगता है। ऐसे में न्यूरॉलजी या आंख के डॉक्टर से इलाज करवाते हैं, लेकिन यह बीमारी कान से भी संबंधित हो सकती है। इसे बाइलेटरल वेस्टीबुलर लॉस कहते हैं। ये बातें सोमवार को नीदरलैंड के मैसट्रियल विवि के डॉ.हरमेन किंगमा ने केजीएमयू के सेल्बी हॉल में हुए डॉ.आरएन मिश्रा मेमोरियल लेक्चर में कही।

डॉ.हरमेन किंगमा ने कहा कि सिर्फ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में ही चक्कर नहीं आता, बल्कि कान की बीमारी होने पर भी चक्कर आने की दिक्कत होती है। कान में लेबरियंथ होता है जो कि शरीर का बैलेंस बनाता है। इसमें डैमेज की वजह से शरीर का बैलेंस नहीं बनता। कान में किसी तरह का इंफेक्शन होने पर, वायरल फीवर या सर्जरी, सिर पर चोट लगने से भी यह बीमारी हो सकती है। कई बार यह बीमारी जन्मजात भी होती है, जिसमें बच्चे एक साल बाद भी चलने-फिरने में लड़खड़ाते हैं। इस बीमारी में वेस्टीबुलर इम्प्लांट किया जाता है। इसके अलावा असिस्टिंग डिवाइस भी बनाई गई है, जो पेट में बेल्ट की तरह बांधी जाती है। यह दोनों इलाज अभी प्रयोगात्मक स्टेज पर हैं।

 

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