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राज्य सरकार से नही संस्थाओं से चलती है- डा. आलोक धवन
15-Dec-2018    |    Views : 000148

राज्य सरकार से नही संस्थाओं से चलती है- डा. आलोक धवन

लखनऊ। कोई भी राज्य किसी सरकार से नही ,वरन् संस्थाओं से चलती है। जितना भी जमीनी स्तर पर कार्य हुआ है वह यही संस्थायें करती है। अब हमें अपनी सोच को बदलते हुए राष्ट्र को आगे ले जाने के लिये हमें कार्य करना होगा। हमें कोई भी चीज खराब न बताकर, उसे कैसा ठीक किया जाये इस पर कार्य करना होगा। आईआईटीआर (सीएसआईआर) के निदेशक डा. आलोक धवन ने विज्ञान भारती के सामाजिक विंग विभा वाणी द्वारा बायोटेक पार्क में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि यह बात कही। इस कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के विभिन्न संस्थाओं ने भाग लिया।

उन्होने कहा कि हम जो तकनीकि का इस्तेमाल कर 2 यूनिट बनाते है, संस्थाओं की वजह से इसे 200 यूनिट तक बना सकते है। जो अच्छी चीजें हो रही है उसको जन जन तक पहुंचाना है। सभी लोग एक जुट होकर कार्य करें। डा. धवन ने कहा कि 2 गांव को चिन्हित कर उसको वैज्ञानिक रूप से विकसित करें, एक माडल का रूप दे, जिससे आगे अच्छा संदेश जा सके। उन्होने कहा कि हम सभी को नेटवर्क के रूप में कार्य करना होगा, जिससे सभी एक दूसरे की मदद कर सामाजिक विकास कर सके। इस कार्यशाला में विभिन्न संस्थाओं ने अपने कार्यो और भविष्य की योजनाओं के बारें में सभी को अवगत कराया।

समाज के लिये विकास जरूरी है

विभा वाणी के कार्यकारी निदेशक एन.पी. राजीव ने कहा कि राजनीति के लिये समाज नही है, समाज के लिये राजनीति है। किसी भी समाज के लिये विकास बहुत जरूर है। इसके लिये वैज्ञानिक तकनीकि की जरूरत है। उन्होने कहा कि देश में समाज के विकास के लिये कार्य करने वाले संस्थान कम है जिसकी जरूरत है। हमें सामाजिक विकास का माडल बनाना है जिससे कि प्रदेश का विकास किया जा सके। उन्होने कहा कि हम सभी को मिलकर अपनी क्षमता को बढ़ाना होगा और वर्ष 2022 तक विकास का प्लान बनाना होगा। जिससे समाज का विकास हो सके, यह मिलकर ही संभव है।

किसानों की आय करनी होगी दुगनी

लखनऊ के जिला कृषि अधिकारी ओ.पी. मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि किसानों की आय कैसे दुगनी हो सके। जिनको जिस क्षेत्र में अनुभव है वह अपने अनुभव को साझा करें जिससे ग्रामीणों के जीवन में सुधार हो सके। उन्होने कहा कि किसान अपनी पारंपरिक खेती पर ही ध्यान देता है , उसको सही जानकारी देकर सही खेती पर फोकस करना पड़ेगा। इसके लिये किसान पाठशाला बनाई गयी है जहां उनको इसकी विधिवत जानकारी दी जाती है। उन्होने किसानों के लिये सरकारी योजनाओं के बारें में जानकारी भी दी। उन्होने यह भी कहा कि बहुत सी संस्थायें छोटे किसानों के लिये काफी समय से कार्य कर रही है जिससे जीवन स्तर अच्छा हो सके। उन्होने कहा कि हमें टीम स्प्रिट की तरह कार्य करना होगा तभी सामाजिक कार्य कर सकते है।

महिलाओं के लिये है कई योजनायें

स्टेट हेड वीमेन एमआरसी डा. सौम्या शंकर ने महिलाओं एवं बच्चों के लिये कार्य करने वाली कई सरकारी योजनाओं के बारें में विधिवत जानकारी दी, जिसमें विधवा विवाह, शरणालय, घरेलु हिंसा आदि मुख्य रूप से शामिल थी। उन्होने कहा कि किसी भी प्रकार की सहायता के लिये उनका विभाग हमेशा तत्पर है।

पानी की समस्या जटिल है

लखनऊ विश्वविद्यालय के जियोलोजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विभूति राय ने लगातार गिरते भूजल स्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होने कहा कि पानी को रिचार्ज करने वाले जितने स्रोत तालाब और झील के रूप में मौजूद थे, उनको पाटकर अब इमारते और मकान बन गये है। हम पीने के पानी का जितना सही इस्तेमाल करते है उससे कहीं ज्यादा हम उसको बर्बाद करते है। उन्होने कहा कि पृथ्वी में जितना पानी है उसका केवल  0.76 प्रतिशत जल ही मानव उपयोगी है। पानी की बचत के लिये जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होने यह भी कहा कि मानव को जितनी बिमारी होती है उसमें से 80 प्रतिशत  जल जनित है अतः जल प्रबंधन जरूरी है।

पर्यावरण को बचाना है

कानपुर से आयी पर्यावरण विज्ञान विभाग की डा. द्रौपदी यादव ने बताया कि हमें पर्यावरण की महत्ता को समझना होगा।ऐसा न हुआ तो आने वाला समय काफी भयावह है। जलस्तर गिरता जा रहा है, कल कारखाने प्रदूषण का बड़ा स्रोत है। उन्होने ऋषिकेश और कानपुर के प्रदूषण को सामने रखते हुए अपना व्यख्यान दिया।

भारत में प्रतिभा की नही है कमी

स्किल इण्डिया के बारे में बताते हुए संजय सिंह ने कहा कि भारत में प्रतिभाओं की कमी नही है मगर कोई पहल नही करना चाहता है। वह कोई भी फैसला लेने से डरते है। वह नौकरी करके खुश है हमारें विचारों में गुलामी रच बस गयी है। उसके लिये अपने अंदर के आत्म विश्वास को जगाना होगा , लक्ष्य को निर्धारित करना होगा। तब प्रयास करे सफलता जरूर मिलेगी। संजय ने कहा कि राष्ट्रीय कौशल विकास के तहत 100 से ज्यादा लोग काम कर रहे है। जिसमें प्रदेश से ही 8 के आसपास लोग शामिल है।

 

 

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