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महिलाओं को घर से निकालकर रोजगार के लिए प्रेरित करना, बड़ी चुनौती
09-Mar-2019    |    Views : 000148

लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार की प्रदेश अध्यक्ष राजेश्वरी त्रिपाठी ने कहा कि उनके परिवार की तरफ से उन्हें सभी प्रकार से सहयोग मिला जिसकी वजह से वह इस मुकाम पर हैं। उन्होंने कहा कि जो आज़ादी हमें अपने माता-पिता से मिलती है। उतनी ही आज़ादी हमें अपने बच्चों को भी देना चाहिए।

महिलाओं को घर से निकालकर रोजगार के लिए प्रेरित करना, बड़ी चुनौती

लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार की प्रदेश अध्यक्ष राजेश्वरी त्रिपाठी ने कहा कि उनके परिवार की तरफ से उन्हें सभी प्रकार से सहयोग मिला जिसकी वजह से वह इस मुकाम पर हैं। उन्होंने कहा कि जो आज़ादी हमें अपने माता-पिता से मिलती है। उतनी ही आज़ादी हमें अपने बच्चों को भी देना चाहिए।  उन्होने महिला दिवस के मौके पर शनिवार को लखनऊ के जानकीपुरम क्षेत्र स्थित पंचवटी पार्क में यूनाइट फाउण्डेशन द्वारा आयोजित यूनाइट शक्ति सम्मेलन में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि हमे अपने बच्चों का सहयोग करना चाहिए और जो चीजें हमें नहीं मिल पायी, हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने बच्चो को दें। उन्होंने कहा कि अगर हमारा परिवार हमें सहयोग करता है तो ये सोचे बिना आगे बढ़ना चाहिए कि समाज क्या कहेगा। 

मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर जूट की बनी वस्तुएं बनाने वाली अंजली सिंह ने कहा कि महिलाओं के बिना कोई काम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घर से निकालकर रोजगार के लिए प्रेरित करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रेरित करने की जरूरत है और काम करने के लिए इच्छा शक्ति होनी चाहिए। 

विमला त्रिवेदी ने कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन इस उद्देश्य से किया गया है कि वो यहां मौजूद महिलाओं इस बात के लिए प्रेरित कर सकें कि कैसे घर बैठे वह रोजगार के अवसर तलाश सकती हैं। जिसमें सिलाई, आचार और पापड़ बनाने जैसे काम ऐसे हैं जो महिलाओं को घर बैठे रोजगार प्रदान कर सकते हैं।  उन्होंने सबका ध्यान केन्द्रित किया कि ईर्ष्या या जलन की वजह से महिलाएं एक दूसरे के खिलाफ रहती हैं और सबके बीच सहयोग की भावना नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि अगर सभी महिलाएं एकजुट हों तो किसी भी समस्या से लड़ सकती हैं। 

 चित्रा रस्तोगी ने कहा कि महिलाओं को अपने परिवार के लिए कोई उद्देश्य रखना चाहिए। उन्हें सबसे पहले अपने आस-पास की चीजों को व्यवस्थित करने बारे में सोचना चाहिए तभी वह आगे बढ़ सकती हैं।

इस दौरान के बीच समन्वय के अभाव की समस्या को सामने रखते हुए माधुरी ने कहा कि अक्सर हम सबके सामने अच्छी बातें करते हैं लेकिन उनके पीठ पीछे उनकी बुराई करते हैं। साथ ही बच्चों के लिए सभ्यता भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि हम सब अगर मिलकर रहेंगे तभी आगे बढ़ सकेंगे। वहीं, इस पर राधे श्याम दीक्षित ने अपना सुझाव रखते हुए कहा कि जब हम कोशिश करेंगे तभी आगे बढ़ पाएंगे।   

 इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अपने जीवन में समस्याओं और संघर्षों को साझा किया। पेशे से नर्स रिंकू ने बताया कि अगर आपके मन में किसी चीज को लेकर रुचि है तो वो काम होता है और अगर घर के सदस्यों का मिलता है तो आपकी हिम्मत और भी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें इसके लिए सहयोग नहीं मिला। लेकिन बाद में उनके पति ने उनका साथ दिया और वह उनके काम में सहयोग भी करते हैं। 

शक्ति संगठन की उपाध्यक्ष सुधा श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए आपस में संपर्क में आना जरूरी है। हमें सबकी समस्याओं को सुनना चाहिए और पढ़े लिखे लोगों को इसके लिए आगे आने की जरूरत है। 

श्रीमति चटर्जी ने अफगानिस्तान के लूटेरे मोहम्मद गजनवी के जीवन से जुड़ी एक कहानी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इंसान का मनोबल हर काम को कर सकता है और अगर कोई ऐसा ही मनोबल वाला उसे मिला जाये तो उसका मनोबल और बढ़ जाता है।  उन्होंने कहा कि अगर हम इच्छा रखते हैं तो कोई भी काम कर सकते हैं। 

 युनाइट फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने भी अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि घरेलू महिलाएं बिना स्वार्थ के घर का सब काम करती हैं और मर्द कहते हैं कि वह कोई काम नहीं करती।  उन्होंने कहा कि अगर हम उनकी जगह पर कोई घर का काम करने वाली नौकरानी रखते हैं तो उसे वेतन देते हैं, लेकिन हमारे घर की महिलाएं बिना किसी के वेतन के निस्वार्थ भाव से काम करती हैं।  उन्होंने कहा कि सभी कामों को अर्थ से नहीं जोड़ना चाहिए हमे खुद भी कुछ काम निस्वार्थ भाव से करने चाहिए। 

 इस दौरान कार्यक्रम में आए अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया।  

 

 

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