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समाज सुधारकों में से एक, मन्नत्तु पद्मनाभन
25-Feb-2019    |    Views : 000126

समाज सुधारकों में से एक, मन्नत्तु पद्मनाभन

LUCKNOW. मन्नत्तु पद्मनाभन, केरल के प्रसिद्ध समाज सुधारकों में से एक थे। उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। कई कठिनाइयों का सामना करते हुए इन्होंने मजिस्ट्रेटी की परीक्षा पास की थी, जिससे वकालत शुरू कर सकें। उस समय नायर समाज में जो अंध विश्वास और पाखण्ड व्याप्त था, उसे दूर करने के लिए मन्नत्तु पद्मनाभन ने 'नायर सर्विस सोसाइटी' नामक एक संस्था की स्थापना की थी। केरल का भारत में विलय कराने के आन्दोलन में उन्हें 68 साल की उम्र में जेल भी जाना पड़ा। बहुमुखी सेवा कार्यों के लिए इन्हें 1966 में 'पद्मभूषण' सम्मान प्रदान किया गया था।

केरल के प्रसिद्ध समाज सुधारक मन्नत्तु पद्मनाभन का जन्म 2 जनवरी, 1878 ई. को कोट्टायम ज़िले के चंगनाशेरी गाँव में एक ग़रीब नायर परिवार में हुआ था। प्यार से लोग उन्हें 'मन्नम' कहते थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने और उनके जन्म के कुछ महीने बाद ही माता-पिता में सम्बन्ध विच्छेद हो जाने के कारण मन्नम का बचपन बड़े अभाव की स्थिति में बीता। शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाए। 16 वर्ष की उम्र में पांच रुपये प्रतिमाह वेतन पर मन्नम ने एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापक का काम आरम्भ किया और दस वर्षों तक इस पद पर रहे।

इसके बाद मन्नत्तु पद्मनाभन ने वकालत करने का निश्चय किया। उस समय मजिस्ट्रेटी की परीक्षा पास करने पर वकालत कर सकते थे। उन्होंने परीक्षा पास की और वकालत करने लगे। पांच रुपये प्रतिमाह वेतन के स्थान पर अब उनकी आमदनी चार सौ रुपये प्रतिमाह होने लगी। अब मन्नम ने अपने नायर समाज की ओर ध्यान दिया।

समाज में अंध विश्वास, आडंबर और पाखंड आदि का बोलबाला था। विवाह सम्बन्धी अनेक अनुचित प्रथाएँ प्रचलित थीं। इन सब कारणों से किसी समय का उन्नत नायर समाज बड़ी दीन-हीन दशा को पहुँच चुका था। मन्नत्तु पद्मनाभन ने इस स्थिति को सुधारने के लिए अपने कुछ सहयोगियों के साथ 1914 ई. में 'नायर सर्विस सोसाइटी' नामक एक संस्था बनाई। आरम्भ से ही मन्नम इस संस्था के सचिव थे। फिर उन्होंने अपनी वकालत भी छोड़ दी और पूरा समय सोसाइटी के कार्यों में लगा दिया। उनके प्रयत्न से नायर समाज की अनेक बुराइयाँ दूर हुईं। समाज के अनेक दोषों को दूर करने के लिए उन्हें सरकार से क़ानून बनवाने में भी सफलता मिली। परन्तु मन्नम का कार्यक्षेत्र केवल नायर जाति सुधार तक ही सीमित नहीं था। उन्होंने छुआछूत की कुप्रथा को दूर करने में भी आगे बढ़कर भाग लिया। पहले 'अवर्णों' को नायर सोसाइटी के मन्दिरों में पूजा करने का अधिकार प्रदान किया गया। फिर गांधी जी की अनुमति लेकर अन्य मन्दिरों में हरिजन प्रवेश के लिए सत्याग्रह किया। फलस्वरूप 1936 में त्रावनकोर के महाराजा ने सबके लिए मन्दिर खोल दिये।

अपने समाजसेवा के कार्य में मन्नत्तु पद्मनाभन ने शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं को भी सम्मिलित किया। उन्होंने केरल के अनेक भागों में विद्यालयों की स्थापना की। केरल का भारत में विलय कराने के आन्दोलन में उन्हें 68 साल की उम्र में जेल भी जाना पड़ा था। 1948 में वे राज्य विधान सभा के सदस्य बने। स्वतंत्रता के बाद केरल में बनी प्रथम साम्यवादी सरकार के जनविरोधी कार्यों का उन्होंने इतना ज़ोरदार विरोध किया कि सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इस आन्दोलन के बाद मन्नम भारत केसरी के नाम से भी विख्यात हुए।

मन्नत्तु पद्मनाभन के बहुमुखी सेवा कार्यों के सम्मान में भारत सरकार ने 1966 में उन्हें 'पद्मभूषण' से अलंकृत किया था। मलयालम भाषा के लेखक के रूप में भी उनकी ख्याति थी। साधारण स्थिति में जन्मा व्यक्ति भी अपने समाज और देश की कितनी सेवा कर सकता है, पद्मनाभन का जीवन इसका उदाहरण है। 25 फ़रवरी, 1970 को उनका देहान्त हो गया।

 देश और दुनिया के इतिहास में आज के दिन कई घटनाएं हुईं, जानते हैं आज के दिन यानि 25 फरवरी के इतिहास के बारेमें –

25 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

अकबर के दरबारी कवि बीरबल 1586 में विद्रोही यूसुफजई के साथ एक लड़ाई में मारे गये।

पिट्स रेग्यूलेट्री एक्ट 1788 में पारित किया गया।

सैमुएल कॉल्ट ने कॉल्ट रिवॉल्वर के लिए 1836 में पेटेंट लिया।

रूस ने जार्जिया की राजधानी तिब्लिसी पर 1921 में कब्जा किया।

पूर्व सोवियत संघ और जापान के बीच 1925 में राजनयिक रिश्ते कायम हुये।

जर्मनी पर 1945 में दूसरे विश्‍व युद्ध के दौरान टर्की ने युद्ध की घोषणा की।

नार्वे की राजधानी ओस्लो में 1952 में छठे शीतकालीन ओलंपिक खेलों का समापन हुआ।

1962 में आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत हुई।

मारिया कोराजोन अकीनो के सन 1986 में फिलीपिंस की राष्ट्रपति बनने के साथ ही देश में तानाशाह फर्डिनांड मार्कोस का शासन भी खत्म हो गया।

सतह से सतह तक मार करने वाली भारत की प्रथम मिसाइल पृथ्वी का 1988 में सफल प्रक्षेपण।

खाड़ी युद्ध: इराक के एक मिसाइल ने 1991 में सउदी अरब स्थित लगभग 30 के करीब अमेरिकी सैनिकों को मार डाला था।

भारत के साथ रूस की निचली संसद ड्यूमा द्वारा 2000 में द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि का अनुमोदन।

दीपा मेहता की फ़िल्म ‘वाटर’ को 2006 में ‘गोल्डेन किन्नारी’ पुरस्कार मिला।

सेंचुरियन बैंक ऑफ़ पंजाब व एच.डी.एफ.सी. के विलय के लिए 2008 में शेयर अनुपात को मंज़ूरी दी गई।

फ़िल्म ‘नौ कंट्री फ़ॉर ओल्ड मैन’ को 2008 में 80वें आस्कर एकेडमी में वर्ष की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म चुना गया।

आईपीएल टूर्नामेंट के निदेशक के रूप में 2009 में पूर्व सैन्य अधिकारी धीरज मल्होत्रा नियुक्त हुए।

25 फ़रवरी को हुए जन्म

1707 में प्रसिद्ध इतालवी नाटककार कार्लो गोल्दोनी का जन्म।

1894 में भारतीय धार्मिक नेता मेहर बाबा का जन्म।

1897 में भारत के प्रसिद्ध विद्वान, साहित्यकार और शिक्षा शास्त्री अमरनाथ झा का जन्म।

1925 में नाइजीरिया के राष्ट्रपति सेहु शगारी का जन्म।

1948 में भारतीय अभिनेता डैनी डैनज़ोंग्पा का जन्म।

1981 में भारतीय अभिनेता शाहिद कपूर का जन्म।

1994 में बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी उर्वशी रौतेलाका जन्म।

25 फ़रवरी को हुए निधन

जर्मन पत्रकार पॉल जूलियस रॉयटर का 1899 में निधन।

केरल के प्रसिद्ध समाज सुधारक मन्नत्तु पद्मनाभन का 1970 में निधन।

हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार एस. एच. बिहारी का 1987 में निधन।

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर डॉन ब्रैडमैन का 2001 में निधन।

दक्षिण भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक बी. नागी रेड्डी का 2004 में निधन।

हंस राज खन्ना, भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश का 2008 में निधन।

 

 

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