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गुमशुदा बच्चों में केवल पचास प्रतिशत ही होते है बरामद
29-Dec-2018    |    Views : 000322

LUCKNOW. मानव तस्करी, बाल संरक्षण व गुमशुदा बच्चों को लेकर लखनऊ में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन आशा ज्योति केंद्र, लोक बन्धु चिकित्सालय परिसर आशियाना में किया गया। इसका आयोजन शक्तिवाहिनी, नई दिल्ली व ह्यूमन यूनिटी मूवमेंट (हम) संस्था, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

गुमशुदा बच्चों में केवल पचास प्रतिशत ही होते है बरामद

LUCKNOW. मानव तस्करी, बाल संरक्षण व गुमशुदा बच्चों को लेकर लखनऊ में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन आशा ज्योति केंद्र, लोक बन्धु चिकित्सालय परिसर आशियाना में किया गया। इसका आयोजन शक्तिवाहिनी, नई दिल्ली व ह्यूमन यूनिटी मूवमेंट (हम) संस्था, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

शक्ति वाहिनी संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष निशिकान्त ने मानव तस्करी पर चर्चा करते हुए संस्था द्वारा चलाये जा रहे अभियान के बारे में जानकारी दी। जिसके तहत आई.टी.पी.ए. एक्ट, रेस्क्यू आपरेशन से पहले तैयारी व बाल तस्करी से सम्बंधित कानूनी प्राविधान के बारे में बताया, साथ ही पुलिस, सरकारी विभाग व स्वयंसेवी संगठनों को आपसी सामंजस्य से साथ कार्य करने पर बल दिया। उन्होने कहा कि एक दूसरे की मदद के बिना मानव तस्करी रोकना असम्भव है।

ह्यूमन यूनिटी मूवमेंट के अध्यक्ष अंशुमालि शर्मा ने बाल संरक्षण व पाक्सो एक्ट पर बात करते हुए कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय बाल अधिकार समझौता होने के बाद से भारत में भी बाल संरक्षण में काफी बदलाव आ गये हैं जो कि आवश्यकतानुसार न होकर अधिकार के आधार पर संरक्षित किये जा रहे है जिसके लिए सरकार द्वारा भी समय समय पर विभिन्न तरह के कानून व बिल भी लाये गये जिसमे किशोर न्याय (देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, पाक्सो एक्ट के साथ साथ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के बारे में विस्तृत चर्चा की, पाक्सो एक्ट में दिए गये क़ानूनी विषयों के साथ साथ बच्चों के प्रति हो रहे यौन शोषण से बचाव के लिए पुलिस, बाल कल्याण समिति, चाइल्डलाइन व जिला बाल संरक्षण इकाई की भूमिका के बारे में बताया।

चाइल्डलाइन लखनऊ के केन्द्र समन्वयक अजीत कुशवाहा ने गुमशुदा बच्चों के विषय में चर्चा करते हुए कहा कि 10 मई 2013 को बचपन बचाओ आन्दोलन बनाम भारत संघ के मामले में उच्चतम न्यायालय ने एतिहासिक निर्णय दिया है, जिसमे बच्चों के मिसिंग की शत प्रतिशत एफ.आई.आर. करना अनिवार्य है। इसके लिए ट्रैक मिसिंग चाइल्ड, खोया पाया पोर्टल के साथ सभी सम्बंधित विभाग के साथ बच्चे की जानकारी साझा करना आवश्यक है ताकि जल्द से जल्द बच्चे के परिजन का पता चल सके। गुमशुदा बच्चों के आंकड़ों पर जानकारी देते हुए बताया कि दर्ज मिसिंग में केवल 50 प्रतिशत बच्चे ही बरामद हो पाते है, जबकि 50 प्रतिशत बच्चों का पता नहीं चलता जो बालगृह में, सड़क पर, भिक्षावृत्ति या बालश्रम आदि कार्यों में लिप्त हो जाते है।

बाल कल्याण समिति की सदस्य डा. संगीता शर्मा ने सी.डब्लू.सी. की भूमिका पर चर्चा की साथ ही बाल संरक्षण, रात्रि के समय बच्चों को आश्रय में आने वाली समस्या, चिकित्सीय परीक्षण व काउंसिलिंग के बारे में जानकारी दी। इस कार्यशाला के समापन से पहले समाज में बच्चों के प्रति बढती हिंसा, यौन अपराध व शोषण से बचाव के लिए चाइल्डलाइन व वर्ल्ड विज़न के संयुक्त अभियान के तहत शपथ भी दिलाई गयी।

उक्त अवसर पर बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष कुलदीप रंजन, सदस्य सुधारानी, विनय श्रीवास्तव, बाल संरक्षण इकाई से आसंमा जुबैर, प्रथम संस्था से अमर सिंह, वर्ल्ड विज़न के कार्यक्रम प्रबंधक स्टीव डेनिअल राव सहित विशेष किशोर पुलिस इकाई, अनैतिक मानव व्यापार निवारण इकाई, विभिन्न जनपदों से चाइल्डलाइन, रेलवे पुलिस, आशा ज्योति केन्द्र, चेतना संस्था, कारितास इंडिया के प्रतिनिधियों सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

 

 

 

 

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