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स्वदेशी अपनाकर ही चीन को  दे सकते है झटका
13-Oct-2018    |    Views : 000289

स्वदेशी अपनाकर ही चीन को दे सकते है झटका

LUCKNOW. समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए यूनाइट फाउंडेशन ने अपने पाक्षिक कार्यक्रमों की कड़ी में शनिवार (10 अक्टूबर) को जानकीपुरम स्थित कार्यालय में परिचर्चा का आयोजन किया। इस परिचर्चा का विषय  चीन का चुनौती और हमारा कर्तव्य और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ का राष्ट्र निर्माण में योगदान था। विभिन्न संस्थाओं जिसमें समाधान फाउण्डेशन, वरिष्ठ जन नागरिक समिति, विनोबा सेवा आश्रम और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आदि के पदाधिकारी ने परिचर्चा में भाग लिया।

यूनाइट फाउंडेशन के सचिव सौरभ मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि यूनाइट फाउंडेशन समाज के संगठनों को जोड़ने का काम कर रहा है। जिससे संगठनों और आपस के विचारों की दूरी समाप्त हो सके। यूनाइट का मुख्य काम समाज में जो भी अच्छा हो रहा उसे बढ़ावा देना है।  उन्होने कहा कि हम जो कार्य करें उसकी उपयोगिता स्वयं, समाज और देश के लिये काम आ सके। उन्होने कहा कि हमें आनंद की तलाश करते है जबकि हर पल को आनन्द ले तो जीवन में रस भर जायेगा।

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के जिला संघचालक अनिल जैन ने कहा कि हम स्वदेशी अपनाकर ही चीन को झटका दे सकते हैं। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संगठन एक अनुशासित संगठन है। जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में सक्रिय भागीदारी रखना है। अगर हम सुधरेंगे तभी जग सुधरेगा।

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के आनन्द मूर्ति श्रीवास्तव ने स्वामी विवेकानन्द का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने शिकागों में अपने संबोधन के दौरान मौजूद लोगों का संबोधन भाईयो और बहनों कहकर किया जिसके बाद उसका अभिनन्दन जोरदार तालियों के साथ हुआ। वह इसलिये क्योकि भारत वसुधैव कुटुंबकम पक विश्वास करता है। जो कि सनातन है। लोग भले ही भारत को बाजार की नजर से देखते हो लेकिन वास्तविकता में यह एक परिवार है। 

वरिष्ठ जन नागरिक समिति के उपाध्यक्ष दीप चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ पर शोध किया जाना जरूरी है। भले ही लोगों को राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के बारे में जानकारी संक्षिप्त है लेकिन इसकी परिकल्पना बहुत ही विस्तृत है। इस संगठन में अनुशासन देखने को मिलेगा।

समाधान फाउंडेशन के यतेन्द्र कुमार ने इस दौरान कहा कि आज के समय में राष्ट्र और राष्ट्रवाद दोनों को समझना बहुत ही जरूरी है। भारत आज जो भी कदम उठा रहा है उससे साफ तौर पर जो एक संदेश जा रहा है कि आने वाले समय में भारत लीड करेगा। भले ही लोग इसे अभी गंभीरता से नहीं ले रहे लेकिन इसके परिणाम आगामी दिनों में देखने को मिलेंगे। वहीं इस विषय पर समाधान फाउंडेशन के ही जे एल दास ने कहा कि चीन हमारे स्तर की नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की चुनौती है। हमें चीन को भारतीय बाजारों से हटाने के लिए यह समझना होगा कि कैसे चीन की सस्ती चीजों की जगह लोग स्वदेशी चीजों का चुनाव करें। लोग अपने थोड़े फायदे के चलते न चाहते हुए भी चाइना को बल दे रहे हैं। 

विनोबा सेवा आश्रम से डॉ अल्का ने कहा कि चीन को चुनौती की तरह देखने के लिए सामरिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सोचना जरूरी होगा। इसी के साथ राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ में महिलाओं की सहभागिता को लेकर भी विचार किया जाना आवश्यक है। इसमें समयकाल के अनुसार बदलाव जरूरी है। फिलहाल हम सभी आर्थिक मुद्दों पर चीन के प्रभाव को लेकर ज्यादा चर्चा करते हैं और सामरिक विषयों पर यह प्रभाव बहुत कम चर्चा का विषय बनता है।  

इस परिचर्चा कार्यक्रम का संचालन यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित ने किया। कार्यक्रम में इसके अलावा यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष डा. पी.के. त्रिपाठी, वरिष्ठ जन नागरिक समिति से गुलाब चन्द्र सिंघल, श्याम किशोर बाजपेयी के अलावा संदीप पाण्डेय, प्रणय विक्रम सिंह, करिश्मा श्रीवास्तव आदि समेत 30 लोग मैजूद थे।

 

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