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1500 युवाओं द्वारा सामूहिक सूर्य नमस्कार एवं योग का आयोजन
24-Jan-2019    |    Views : 000124

LUCKNOW. विवेकानन्द केंद्र लखनऊ तथा जय नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिवस के अवसर सूर्य नमस्कार एवं योग का आयोजन किया गया। जय नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रांगण में बुधवार को महाविद्यालय के एन.एस.एस., एन.सी.सी., बी.पी.एड. तथा अन्य संकाय के लगभग 1500 युवक/युवतियों के अतिरिक्त लखनऊ के अन्य 11 विभिन्न महाविद्यालयों से आये लगभग 1000 युवक और युवतियों ने भाग लिया।

1500 युवाओं द्वारा सामूहिक सूर्य नमस्कार एवं योग का आयोजन

LUCKNOW. विवेकानन्द केंद्र लखनऊ तथा जय नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिवस के  अवसर सूर्य नमस्कार एवं योग का आयोजन किया गया। जय नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रांगण में बुधवार को महाविद्यालय के एन.एस.एस., एन.सी.सी., बी.पी.एड. तथा अन्य संकाय के लगभग 1500  युवक/युवतियों के अतिरिक्त  लखनऊ के अन्य 11 विभिन्न महाविद्यालयों से आये लगभग 1000 युवक और युवतियों ने भाग लिया। कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप में राम कृष्ण मठ के मुक्तिनाथानंद और  विशिष्ठ अतिथि  मेजर जेनरल ए.के.चतुर्वेदी भी उपस्थित थे ।

अपने स्वागत सम्बोधन में प्राचार्य प्रो. एस.डी.शर्मा जी ने सुभाष चन्द्र बोस और स्वामी विवेकानंद दोनों महापुरुषों के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होने दोनों महापुरुषों के जीवन-चरित्र और देश के प्रति उनके अगाध प्रेम के सन्देश को अपने जीवन में आत्मसात करने को कहा ।

विवेकानन्द केंद्र के जीवनव्रती अश्वनी ने बताया कि स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती को केंद्र प्रत्येक वर्ष ‘समर्थ भारत पर्व’ के रूप में, 25 दिसम्बर से 23 जनवरी तक एक माह मनाता है और  सुभाष चन्द्र बोस जी के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर उनके जन्मदिन मनाने के साथ ‘समर्थ भारत पर्व’ का समापन भी करता है जिसमे युवाओं  के विशेष कार्यक्रम किये जाते हैं I उन्होंने बताया कि इस वर्ष पूरे माह में हमने प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों/ महाविद्यालयों में कुल 16 कार्यक्रम किये जो युवाओ के चरित्र निर्माण, बौद्धिक विकास के साथ शारीरिक विकास को ध्यान में रख कर किये गए ।

सुभाष चन्द्र बोस जी के व्यक्तिगत जीवन पर प्रकाश डालते हए मुख्य वक्ता एवं विशिष्ठ अतिथि  मेजर जेनरल ए.के.चतुर्वेदी ने बताया कि 1921 में भारत में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों का समाचार पाकर  बोस ने सिविल सर्विस से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और शीघ्र भारत लौट आए । सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों से सहमत नहीं थे । वास्तव में महात्मा गांधी उदार दल का नेतृत्व करते थे, वहीं सुभाष चंद्र बोस जोशीले क्रांतिकारी दल के प्रिय थे । महात्मा गाँधी और सुभाष चंद्र बोस के विचार भिन्न-भिन्न थे लेकिन वे यह अच्छी तरह जानते थे कि महात्मा गाँधी और उनका मक़सद देश की आज़ादी है इसीलिए सुभाष जी महात्मागांधी से अपने लक्ष्य में विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद चाहते थे । श्री  चतुर्वेदी जी ने बताया कि सुभाष जी ने तीन मुख्य नारा- ‘तुम हमें खून दो हम तुम्हें आजादी देंगें’, ‘इन्कलाब’  और ‘जय हिन्द’ देकर अपने क्रन्तिकारी जवानों का मनोबल बढाया I

मुख्य अतिथि स्वामी मुक्तिनाथानंद जी ने बताया कि भारत माता के प्रति दोनों लोगों के मन में अपार श्रद्धा थी । सुभाष जी विवेकानन्द जी को अपना गुरु मानते थे उनका कहना था कि यदि स्वामी जी जीवित होती तो मैं अपना जीवन उन्हें समर्पित कर देता I

कॉलेज के मंत्री एवं प्रबन्धक श्री जी.सी.शुक्ला जी ने उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया Iकार्यक्रम में केंद्र के पदाधिकारियों के अतिरिक्त जय नारायण महाविद्यालय तथा अन्य विद्यालयों से आये अध्यापक गण भी भारी संख्या में मौजूद थे  I

 

 

 

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