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अभिभावक बच्चों को माने अपना दोस्त
22-Dec-2018    |    Views : 00073

लखनऊ। समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करते हुए वहां फैली बुराइयों को दूर करने के लिये यूनाइट फाउण्डेशन हर माह के दूसरे और चौथे शनिवार को यूनाइट मंथन कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। इसी क्रम में 22 दिसंबर को यूनाइट कार्यालय में यूनाइट मंथन के तहत बाल संरक्षण और शिक्षा तथा फूड सेफ्टी एण्ड एग्री बिजनेस पर एक परिचर्चा रखी गयी।

अभिभावक बच्चों को माने अपना दोस्त

Lucknow. समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करते हुए वहां फैली बुराइयों को दूर करने के लिए यूनाइट फाउण्डेशन हर माह के दूसरे शनिवार को यूनाइट मंथन कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। इसी कड़ी में 22 दिसंबर को यूनाइट फाउण्डेशन कार्यालय में यूनाइट मंथन के तहत बाल संरक्षण, शिक्षा तथा फूड सेफ्टी एण्ड एग्री बिजनेस पर एक परिचर्चा हुई। परिचर्चा में आए आगंतुकों ने रोजगार और शिक्षा पर जोर दिया।

 रोजगार पर बात करते हुए योग गुरू प्रशांत शुक्ला ने कहा कि हर काम के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। अभी तक 35 लोगों को रोजगार दिला चुका हूं। उन्होंने कहा कि वह लखनऊ में पांच योग सेण्टर चल रहे हैं। जिसमें उन्हीं के द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किये हुए प्रशिक्षु योग सिखा रहे हैं। रिचा बाजपेयी ने कहा कि सरकार पर हम निर्भर नहीं रह सकते है। हमें स्वरोजगार की ज्यादा जरूरत है। इसके लिए गो साइंस फाउण्डेशन के साथ अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी संस्था में काम करके लोग अच्छा पैसा कमा सकते हैं। राधे श्याम पाण्डेय ने कहा कि हमारे प्रदेश में बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है। बेरोजगारी के कारण ही अपराध बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए तीन साल पहले सरकार को समाधान दिया था। इसके साथ ही कई अधिकारियों से बैठक कर चुका हूं, पर कुछ निदान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि किसी भी गलत चीज का विरोध करना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि नई समस्या को जन्म देता है।

 डॉ. अनीता त्रिपाठी ने अभिभावकों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह बच्चों पर ध्यान नहीं देते हैं, जिस वजह से बच्चे बिगड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे हर बात अभिभावकों को नहीं बताते, अभिभावक भाग दौड़ की जिंदगी में ध्यान नहीं दे पाते, जिससे बच्चे क्या कर रहे पता नहीं चल पाता है, उसके लिए बच्चों का दोस्त बनना पड़ेगा। यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष डॉ. पी.के. त्रिपाठी ने कहा कि गांव में कृषि 110 दिन की है। मनरेगा का काम 100 दिन मिलता है, बाकी दिन वह क्या करें। वहीं, उन्होंने बढ़ रहे बाल अपराधों पर भी लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि मां बाप को अपने बच्चों को समय देना चाहिए। उनसे बात करनी चाहिए, उन्हें जागरुक करना चाहिए। बबिता सक्सेना ने कहा कि बच्चों के लिए पहली पाठशाला उसका घर होता है, आज के समय में बच्चों को संस्कार देने चाहिये। चित्रा रस्तोगी ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों को अपना दोस्त बना लेना चाहिये। इससे बच्चे और ज्यादा घुले मिले, जिससे वह आपसे पूरी बात कर सके। मुमकिन फाउण्डेशन के श्याम मुरारी ने कहा कि जिस स्कूल में आपका बच्चा पढ़ता है, वहां के अभिभावक की मीटिंग के साथ रिक्शे और बस ड्राइवर को भी बुलाया जाए। जिससे स्कूल आने जाने में बच्चों को किसी तरह का खतरा न रहे।

 रमा तिवारी ने कहा कि यूनाइट फाउण्डेशन बहुत अच्छी तरह काम कर रहा है, उसको जब भी उनकी जरूरत होगी, वह हर समय तैयार है। महेंद्र पाल ने कहा कि उनकी संस्था स्वास्थ्य पर काम कर रही है। इसके लिए जरुरतमंदों को दवाएं दी जाती है, दवाईयां घर तक पहुंचाई जाती हैं। शैलेश गौड़ ने ब्लड की उपयुक्तता पर कहा कि ज्यादातर अस्पताल बाहर के ब्लड बैंक के ब्लड को स्वीकार नहीं करते हैं, ऐसे में जिसके पास डोनर नहीं है, वह परेशान हो जाता है। अगर बाहर का ब्लड स्वीकार नहीं करना है तो बाहर के ब्लड बैंको को बंद कर देना चाहिए। 

 चाइल्ड वेलफेयर की सुधा रानी ने कहा कि सभी को जागरुक होना होगा, तभी बाल अपराध रुकेगा। उन्होंने आवाहन किया कि अगर आप एक बच्चे को बाल मजदूरी व वेश्यावृत्ति से रोक लेते हैं तो यह अपने आप में सबसे बड़ा काम है। बाल संरक्षण अधिकारी आसमां जुबेर ने कहा कि बच्चों के शोषण पर काम करते हैं, बच्चों के किसी भी प्रकार के शोषण की जानकारी मिलने पर उनसे संपर्क कर सकते हैं।

रिलायंस फाउण्डेशन के पवन कुमार सिंह ने बताया कि देश के 16 राज्यों के कृषि क्षेत्र पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके यहां रिटायर्ड वैज्ञानिकों की टीम है, जो किसानों की हर समस्या का समाधान करते हैं। इसके लिये हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिया गया है। प्रबल भारत हिन्दू संगठन के अतुल द्विवेदी ने बताया कि हमारे समाज में बहुत से बच्चे जो बाल अपराध का शिकार हो रहे हैं, उनकी संस्था ऐसे बच्चों की मदद करती है। वहीं, समाजसेवी मनोज ने कहा कि गरीब बच्चों को फंडिंग की जाती है। बच्चों के अकाउंट में पैसे डाल कर उन्हें लालच दिया जाता है। इसका सबसे ज्यादा शिकार लड़कियां हो रही है। ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है।

 इसरों के वैज्ञानिक राजेश उपाध्याय ने बताया कि कृषि में रोजगार बहुत है बस अपने नजरिये को बदलिये, मार्केट के हिसाब से खेती करते है तो अच्छा धन कमा सकते है। उसके लिये किसान पाठशाला में जाकर भी ज्ञान लिया जा सकता है।

इसके अलावा बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि विषयों के विशेषज्ञ डा. मनु चौहान, महिन्द्र पाल, शैलजा मिश्रा, अवधेश श्रीवास्तव, लक्ष्मी हजैला, ज्योत्सना सिंह, चित्रा रस्तोगी, अमित शुक्ला, आफरीन मुजीब, वैशाली सिंह ने भी परिचर्चा में भाग लिया।

कार्यक्रम का संचालन यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित ने किया। इस मौके पर डॉ. पी.के. त्रिपाठी, संयोजक संदीप पाण्डेय, शेखर उपाध्याय, अभिषेक मिश्रा आदि समेत तमाम लोगा मौजूद रहे।

 

 

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