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सही उपचार से बचायी जा सकती है मरीजों की जान
12-Oct-2018    |    Views : 000271

सही उपचार से बचायी जा सकती है मरीजों की जान

LUCKNOW. सही समय पर मरीज को अस्पताल नही पहुंचने के कारण करीब 20 प्रतिशत मरीजों की जान जा रही है। इंग्लैंड के डॉ. महेश निर्मल और डॉ. अजय शर्मा ने पीजीआई में एक्यूट क्रिटिकल केयर पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।

पीजीआई के एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. संदीप साहू की अगुवायी में आयोजित कार्यशला में शहर के 40 डॉक्टरों को एक्यूट क्रिटिकल केयर का प्रशिक्षण दिया गया। लंदन के डॉ. शैलवा कुमार, डॉ. शांतनु भट्टाचार्य, डॉ. गीता शेट्टी, डॉ. सृष्टि जैन व डॉ. अक्षय कुमार ने प्रशिक्षण दिया।

सही इलाज से बच सकती है मरीज की जान

 डॉ. महेश निर्मल ने कहा कि यदि मरीजों को शुरूआती दौर में प्राथमिक इलाज सही मिल जाए, तो उनकी जान बचायी जा सकती है। करीब 20 फीसदी मरीजों को जिले स्तर के डॉक्टर चाहें तो प्राथमिक इलाज दे सकते हैं लेकिन वो मरीज की सांस, ब्लड प्रेशर व दिल धड़कन समेत अन्य जरूरी चीजें बिना देखे ही सुपर स्पेशियल्टी संस्थान को रेफर कर देते हैं। जब वो चाहे तो प्राथमिक इलाज देकर मरीज को राहत दे सकते हैं। ऐसे में सुपर स्पेशियल्टी अस्पताल तक पहुंचने में मरीज की हालत और गंभीर हो जाती है। ऐसे में मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है।

एक्यूट क्रिटिकल केयर का प्रशिक्षण जरूरी है

डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि देश के डॉक्टरों को एक्यूट क्रिटिकल केयर का प्रशिक्षण दिया जाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड में बिना एक्यूट क्रिटिकल केयर का प्रशिक्षण के कोई भी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता है।

पीजीआई बना नोडल सेंटर

पीजीआई को एक्यूटर क्रिटिकल केयर का नोडल सेंटर बनाया गया है। एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. संदीप साहू को सेंटर का को-आर्डिनेटर बनाया गया है। डॉ. साहू बताते हैं कि विदेश की तर्ज पर प्रदेश के मेडिकल कालेज और जिला अस्पतालों के डॉक्टरों को एक्टूट क्रिटिकल केयर का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 

 

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