EMAIL

info@unitefoundation.in

Call Now

+91-7-376-376-376

ब्लॉग

वरिष्ठ प्रचारक शरदराव चौथाइवाले
07-Sep-2018    |    Views : 00050

वरिष्ठ प्रचारक शरदराव चौथाइवाले

विशेष

श्री शरद कृष्णराव चौथाइवाले का जन्म सात सितम्बर, 1935 (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी) को कलमेश्वर (महाराष्ट्र) में हुआ था। इनके सबसे बड़े भाई श्री मुरलीधर कृष्णराव (बाबूराव) चौथाइवाले नागपुर में संघ कार्यालय के पास रहते थे। वे सरसंघचालक श्री गुरुजी और फिर बालासाहब देवरस का पत्र-व्यवहार संभालते थे। यह परिवार मूलतः बारसी (सोलापुर) का निवासी है।

शरदराव का नंबर भाइयों में चौथा था। उनके बाद के दोनों भाई शशिकांत एवं अरविन्द चौथाइवाले भी प्रचारक बने। शशिकांत जी प्रारम्भ से ही असम में कार्यरत हैं। अरविंद चौथाइवाले उड़ीसा में प्रांत प्रचारक रहने के बाद विश्व हिन्दू परिषद में केन्द्रीय मंत्री रहते हुए सेवा विभाग संभालते रहे। अरविन्द जी का 2011 में देहांत हुआ। शरदराव के पिता श्री कृष्णराव पहले कलमेश्वर और फिर नागपुर के न्यू इरा हाई स्कूल (वर्तमान नवयुग विद्यालय) में अध्यापक थे। आगे चलकर बाबूराव भी उसी विद्यालय में प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए।

शरदराव 1956 में नागपुर से बी.एस-सी. पूर्णकर तृतीय वर्ष का संघ शिक्षा वर्ग कर रहे थे। वहां एकनाथ जी ने पूछा कि अब क्या करने का विचार है ? शरदराव ने कहा कि अभी कुछ निश्चय नहीं किया। इस पर एकनाथ जी ने कहा कि तुम छह भाई हो, अतः तुम्हें प्रचारक बनना चाहिए। शरदराव ने हां कर दी और इस प्रकार उनका प्रचारक जीवन प्रारम्भ हो गया।

मंगरूलनाथ तथा खामगांव जिला प्रचारक (66-71) के बाद 1971 में शरदराव अकोला में विभाग प्रचारक बने। 1975 में प्रतिबंध काल में वे भूमिगत रहकर प्रवास कर रहे थे; पर एक दिन वे पुलिस की नजर में आ गये। उन्हें पकड़कर पहले अकोला और फिर नागपुर कारागार में बंद कर दिया गया। मीसा लगने के कारण वे फिर आपातकाल की समाप्ति के बाद ही जेल से छूटे।

जिन दिनों वे अकोला में विभाग प्रचारक थे, उन्हीं दिनों श्री मोहन भागवत ने वहां से पढ़ाई पूरी की थी। शरदराव बहुत समय से उन्हें जानते थे। वे उन्हें प्यार से मोहन कहते थे। जब मोहन जी कार्यालय आये, तो शरदराव ने उनसे प्रचारक बनने का आग्रह किया। यद्यपि उनका संकल्प पहले से ही पक्का था; पर शरदराव के आग्रह ने सोने में सुहागे के समान उसे और दृढ़ कर दिया और वे प्रचारक बन गये। आजकल वे हमारे परम पूज्य सरसंघचालक हैं।

प्रतिबंध समाप्ति के बाद वे 1982 तक अकोला तथा फिर 1986 तक अमरावती में विभाग प्रचारक रहे। 1986 से 1999 तक वे नागपुर स्थित डा0 हेडगेवार स्मृति भवन की व्यवस्था देखते रहे। 1991 में जब श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान संघ पर प्रतिबंध लगा, तो पुलिस स्मृति भवन को भी सील करने आई। इस पर शरदराव ने कहा कि यह विद्यालय और छात्रावास का संचालन करने वाला स्वतन्त्र न्यास है। भवन का कुछ भाग सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध रहता है। कई सरकारी विभाग भी यहां अपने कार्यक्रम करते हैं। ऐसे में इसे बंद करना अनुचित होगा। उनके तर्क एवं आवश्यक कागज-पत्र देखकर पुलिस और प्रशासन के लोग वापस लौट गये।

जीवन के संध्याकाल में शरदराव को अनेक रोगों ने घेर लिया। फिर भी वे स्मृति भवन में लगने वाली शाखा में खाकी निक्कर पहन कर, बिना किसी का सहयोग लिये, धीरे-धीरे पहुंच जाते थे। उनकी स्मृति अंत तक बहुत ठीक रही। सात दिसम्बर, 2012 को नागपुर में ही उनका देहांत हुआ।

Save the Children India, Best NGO to Support Child Rights, Best NGO in Lucknow, Skills Development NGO, Health NGO Lucknow, Education NGO Lucknow, NGO for Women Empowerment, NGO in India, Non Governmental Organisations, Non Profit Organisations, Best NGO in India

 


All Comments

Leave a Comment

विशिष्ट वक्तव्य 

विशिष्ट महानुभावों के वशिष्ट अवसरों पर राय

Facebook
Follow us on Twitter
Recommend us on Google Plus
Visit To Website