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अपने प्रभुत्व को जमाने के लिए दी जाती आतंकवाद को पनाह
09-Mar-2019    |    Views : 000219

लखनऊ। अपने प्रभुत्व को जमाने और अपनी मजबूती दिखाने के लिए आतंकवाद को पनाह दी जाती है। हर तरह से कमजोर बल, बुद्धि, विवेक से कमजोर व्यक्ति ही इसकी ओर रूख करता है। विश्व के पटल पर पाकिस्तान का यही हाल है।

अपने प्रभुत्व को जमाने के लिए दी जाती आतंकवाद को पनाह

लखनऊ। अपने प्रभुत्व को जमाने और अपनी मजबूती दिखाने के लिए आतंकवाद को पनाह दी जाती है। हर तरह से कमजोर बल, बुद्धि, विवेक से कमजोर व्यक्ति ही इसकी ओर रूख करता है। विश्व के पटल पर पाकिस्तान का यही हाल है। यूनाइट फाउण्डेशन द्वारा यूनाइट मंथन कार्यक्रम में आयोजित परिचर्चा जिसका विषय आतंकवाद मामले में भारत की नयी चुनौतियां  विषय पर बोलते हुए समाजसेवी राधेश्याम पाण्डेय ने यह बात कही। यूनाइट फाउण्डेशऩ द्वारा हर माह के दूसरे व चौथे शनिवार को यूनाइट मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जिसमें ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

राधेश्याम पाण्डेय ने कहा कि भारत के पास तकनीकी संस्थान का सही उपयोग नही हो पा रहा है। उन्होने कहा कि भारत के संविधान में सुरक्षा बलो के लिए सुरक्षा तकनीकी की कोई व्यवस्था नही है। उन्होने पुलवामा की घटना के बारे में कहा कि भारत की एजेन्सियां स्वतंत्र नही है एलर्ट पर सही कार्य नही किया, समय पर एक्शन नही लिया वरना घटना न होती। सरकार ध्यान दे तो भारत आतंकवाद से मुक्त हो सकता है।

समाधान फाउण्डेशन के अरूणेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि सतर्कता ही हमारी सुरक्षा और समाधान का जरिया बन सकता है। यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष डा. पी.के. त्रिपाठी ने कहा कि हिजुबुल की मानसिकता वाले लोग अभी भी वहां पल रहे है। क्षेत्र के लोगों में सतर्कता भी बहुत जरुरी है। हमें सही दिशा में काम करने की जरूरत  है। कश्मीर में आतंकवाद न पनपे, उसके लिए उनके बच्चों के लिए रोजी रोटी की व्यवस्था करके इसे रोक सकते है, जिससे वह कुछ रूपयों के लिए काम न करें।

महर्षि विश्वविद्यालय के डीन डा. एच.के. द्विवेदी ने कहा कि कश्मीर की हमारी समस्याएं है, उनको कम किया जाए। इसमें जनता का सहयोग जरूरी है, हमें चाहिए कि विषमता और विषंगति को उत्पन्न न करें। होम्योपैथिक चिकित्सक डा. अमित त्रिपाठी ने कहा कि कश्मीर के संबंध में अलग नियम कानून है।  समान नागरिक संहिता नही है। वहां रोजगार की कमी है, इसलिए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत है, तभी कश्मीर में आतंकवाद समाप्त हो सकता है।

नैचुरोपैथिक ख्वाजा तारिक हसन  ने कहा कि अगर युवाओं को रोजगार मिल जायें तो वो लोग आतंकवाद की राह न पकड़ेंगे और समाज की मुख्यधारा में आ जायेंगे। किसी भी तरह का आतंकवाद समाज के लिए सही नही है।

इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार श्रीवास्तव, विनीता त्रिवेदी, सुधा श्रीवास्तव, अर्चना, राकेश शुक्ला, संगमा शुक्ला और कलीम अहमद समेत दर्जनों लोगो ने भाग लिया। मंच का संचालन यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित ने किया।

 

 

 

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