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ओलम्पिक में कुश्ती का पहला पदक दिलाने वाला हो गया गुमनाम
15-Jan-2019    |    Views : 00071

LUCKNOW. भारत के प्रसिद्ध कुश्ती खिलाड़ी खाशाबा दादासाहेब जाधव का जन्म 15 जनवरी, 1926 को महाराष्ट्र में हुआ था । जिन्होंने सन 1952 में हेलसिंकी ओलम्पिक, फ़िनलैण्ड में देश के लिए कुश्ती की व्यक्तिगत स्पर्धा में सबसे पहले कांस्य पदक जीता था। वैसे तो 1952 के हेलसिंकी ओलम्पिक में भारतीय हॉकी टीम ने फिर से स्वर्ण पदक हासिल किया था, लेकिन चर्चा सोने से अधिक उस कांस्य पदक की होती है, जिसे पहलवान खाशाबा जाधव ने जीता था।

ओलम्पिक में कुश्ती का पहला पदक दिलाने वाला हो गया गुमनाम


LUCKNOW. भारत के प्रसिद्ध कुश्ती खिलाड़ी खाशाबा दादासाहेब जाधव का जन्म  15 जनवरी, 1926 को महाराष्ट्र में हुआ था । जिन्होंने सन 1952 में हेलसिंकी ओलम्पिक, फ़िनलैण्ड में देश के लिए कुश्ती की व्यक्तिगत स्पर्धा में सबसे पहले कांस्य पदक जीता था। वैसे तो 1952 के हेलसिंकी ओलम्पिक में भारतीय हॉकी टीम ने फिर से स्वर्ण पदक हासिल किया था, लेकिन चर्चा सोने से अधिक उस कांस्य पदक की होती है, जिसे पहलवान खाशाबा जाधव ने जीता था। खाशाबा को पॉकेट डायनमो के नाम से भी जाना जाता है। भारत को ओलम्पिक का पदक दिलाने वाला यह खिलाड़ी बाद में गुमनाम बनकर रह गया।

खाशाबा का जन्म सतारा ज़िला, महाराष्ट्र में कराड तहसील के गोलेश्वर नामक छोटे से गाँव में मराठा परिवार में 15 जनवरी 1926 को हुआ था। उनकी माँ का नाम 'पुतलीबाई' था और उनके पिता को सभी 'दादासाहब' कहते थे। खाशाबा सभी भाई बहनों में सबसे छोटे थे। उनके घर में खेती होती थी। उनके पिता कृषक थे तथा पहलवानी भी करते थे। कुश्ती का प्रारम्भिक प्रशिक्षण उन्हें घर पर ही मिला।

कोल्हापुर में क्रीड़ा शिक्षक पुरंदरे के रूप में खाशाबा को सर्वोत्कृष्ट गुरु मिले। उनके मार्गदर्शन में उन्होंने कुश्ती का जमकर अभ्यास किया। उन्होंने खाशाबा को 'अखिल महाराष्ट्र' एवं 'अखिल भारतीय क्रीड़ा स्पर्धा' में उतारने का निर्णय लिया।

सन 1949 में अखिल भारतीय एवं अखिल महाराष्ट्र मंडल की कुश्ती स्पर्धा नागपुर में आयोजित किए जाने की घोषणा हुई। इस स्पर्धा में खाशाबा की कुश्ती बड़े सम्मान से लगाई गयी थी। इस कुश्ती स्पर्धा में दक्षिण महाराष्ट्र के संस्थान संघ की ओर से उन्होंने भाग लिया। उन्होंने 11 दिसंबर 1949 को नागपुर की कुश्ती स्पर्धा में प्रतिस्पर्धी को मात्र पांच मिनट के भीतर ही चित कर दिया तथा अपनी बेजोड़ कुश्ती कला का कौशल नागपुरवासियों को दिखाया। सन 1950 से 1951, ये दो वर्ष खाशाबा के लिए बहुत अच्छे रहे। इस कालावधि में उन्होंने लगातार चार बार अंतर महाविद्यालीय स्पर्धा में सफलता प्राप्त की।

सन 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक, फ़िनलैण्ड में कांस्य पदक जीतने के बाद खाशाबा ने कोल्हापुर के राजाराम महाविद्यालय में कला शाखा में तीसरे वर्ष के लिए प्रवेश लिया। यह उनका महाविद्यालय का अंतिम वर्ष था। अक्टूबर 1952 में अखिल भारतीय विद्यापीठ क्रीड़ा स्पर्धा पुणे में संपन्न हुई। इस स्पर्धा में हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, दिल्ली के पहलवानों ने कुश्ती में वर्चस्व दिखाया।

स्पर्धात्मक कुश्ती से निवृत्त होने का विचार खाशाबा ने किया , ओलंपिक कांस्य पदक जीतने के बाद भी उन्हें नौकरी नही मिल रही थी, आर्थिक अड़चन होने के कारण उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था , नौकरी ढ़ूढ़ने के दौरान ही उन्हें पुलिस दल में नौकरी मिली यह नौकरी उन्हें खेल के क्षेत्र में बहुमूल्य कौशल दिखाने के कारण मिली. खाशाबा 4 जुलाई 1955 को सब इंस्पेक्टर के रूप में मुंबई में पुलिस विभाग में नियुक्त हुए. पुलिस प्रशिक्षण लेते समय दूसरा क्रमांक हासिल कर सर्वोत्कृष्ट खिलाडी के रूप में सम्मान की तलवार हासिल की।

खाशाबा ने क्रीड़ा क्षेत्र में पुलिस का नाम ऊंचा किया परंतु पदोन्नति के समय मात्र उन्हें अलग कर दिया जाता था, राजनीतिक दबाब के कारण उन्हें पदोन्नति नहीं मिल रही थी, उन्होंने इसके लिए दौड़भाग नहीं की वे सन् 1983 में सम्मानपूर्वक नियम आयु अनुसार सेवानिवृत्त हुए। निवृत्त होने के पश्चात् खाशाबा अपने गांव गोलेश्वर वापस लौटे तथा खेती करने लगे , उन्हें सरकार से निवृत्ति वेतन भी मंजूर नहीं किया उनकी निवृत्ति के पश्चात् का समय बड़ा कठिन व्यतीत हुआ। सेवानिवृत्ति के महज दो साल बाद एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया। खाशाबा अपनी बहन से मिलने के लिए बाहरगांव गए हुए थे, बहन से मिलकर वे रेठरे गांव से पैदल चलकर आ रहे थे तभी एक दुर्घटना का शिकार हो गए सामने से आने वाले ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी, उसमें ही उनकी 14 अगस्त 1984 को मृत्यु हो गई। आज दिल्ली में खाशाबा जाधव के नाम से स्टेडियम है, लेकिन उनके परिवार को कोई आर्थिक सहायता मुहैया नहीं हो सकी है।

15 जनवरी के इतिहास में बहुत सी घटनायें घटी, कई महान हस्तियों ने जन्म लिया और बहुत सी महान हस्तियां हमारे बीच से अलविदा कह गयी। उनके बारे में जानकर हम अपने सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकते है।

15 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

1759 - लंदन स्थित मोंटेगुवे हाउस में ब्रिटिश संग्रहालय की स्थापना हुई।

1784 - एशियेटिक सोसायटी आफ बंगाल की स्थापना।

1918 - यशवंत अग्रवाडेकर गोमांतक दल के बहुत उग्र क्रांतिकारी थे।

1934 - बिहार में जबरदस्त भूकंप से करीब 20 हजार लोगों की मौत।

1949 - के एम करियप्पा भारतीय थल सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ बने। तब से 15 जनवरी को सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है।

1965 - भारतीय खाद्य निगम की स्थापना।

1975 - पुर्तग़ाल ने अंगोला की आजादी के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किये।

1986 - थल सेना के प्रथम कमांडर इन चीफ के एम करियप्पा (सेवानिवृत्त) को फील्ड मार्शल की पदवी दी गई।

1988 - भारत के पूर्व गेंदबाज नरेंद्र हिरवानी ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुये वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच में ही 16 विकेट लिए।

1992 - बुल्गारिया ने बाल्कन के देश मैसिडोनिया को मान्यता दी।

1998 - ढाका में त्रिदेशीय भारत, बांग्लादेश तथा पाकिस्तान का शिखर सम्मेलन प्रारम्भ।

1999 - 'एनी फ़्रैंक घोषणा पत्र' पर हस्ताक्षर करने वाले प्रथम विश्व नेता संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव कोफी अन्नान बने, पाकिस्तान में सभी नागरिक प्रशासनिक कार्य सेना को हस्तांतरित।

2006 - ब्रिटिश हाईकोर्ट ने क्वात्रोच्चि के दो बैंक खातों पर से प्रतिबंध हटाने का आदेश दिया।

2007 - सद्दाम के सौतेले भाई एवं इराकी अदालत के पूर्व प्रमुख फ़ाँसी पर चढ़ाये गये।

2008 -

सरकारी क्षेत्र की कंपनी गैस अथोरिटी ऑफ़ इण्डिया लिमिटेड (गेल) के बोर्ड ने महाराष्ट्र के दाभोल से बंगलुरु तक गैस पाइप लाइन बिछाने के प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने 'गंगा र्क्सप्रेस वे परियोजना' का शिलान्यास किया।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा के दौरान भारत-चीन सीमा विवाद पर बातचीत की गई। खगोलविदों ने धरती से 25 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर की आकाश गंगा के जीवन के लिये ज़रूरी तत्त्व खोजने का दावा किया।

2009 - दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता व प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता तपन सिन्हा का निधन। फ़िल्म स्लमडॉग मिलेनियर को बाफ्टा पुरस्कार की श्रेणियों में स्थान मिला।

2010 - तीन घंटे से भी अधिक की अवधि वाला शताब्दी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण लगा। भारत में यह 11 बजकर 06 मिनट पर शुरू होकर 3 बजकर पाँच मिनट पर खत्म हुआ। दोपहर 1.15 पर सूर्य ग्रहण अपने चरम पर था. यह वलयाकार सूर्य ग्रहण था। इसके कारण ऊपरी वातावरण पर तथा पृथ्वी के वातावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के अध्ययन के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने छह रॉकेटों का प्रक्षेपण किया।

2013 - सीरिया की अलेप्पो यूनिवर्सिटी में रॉकेट हमले में 83 लोगों की मौत तथा 150 लोग घायल।

2016 - पश्चिमी अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में ऑगाडोगू के होटल में आतंकवादी हमले में 28 लोगों की मौत तथा 56 लोग घायल।

15 जनवरी को जन्मे व्यक्ति

1856 - अश्विनी कुमार दत्त - भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और देश भक्त

1921- बाबासाहेब भोसले - राजनीतिज्ञ, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री

1956- मायावती - राजनीतिज्ञ

1957- भानुप्रिया अभिनेत्री

1982- नील नितिन मुकेश अभिनेता

1888- सैफ़ुद्दीन किचलू- पंजाब के स्वतंत्रता सेनानी।

1938 - चुनी गोस्वामी - प्रसिद्ध भारतीय फ़ुटबॉलर हैं।

1926 - खाशाबा जाधव - भारत के ऐसे पहले कुश्ती खिलाड़ी थे, जिन्होंने हेलसिंकी ओलम्पिक में कांस्य पदक जीता था।

15 जनवरी को हुए निधन

1998 - गुलज़ारीलाल नन्दा - भारत के भूतपूर्व कार्यकारी प्रधानमंत्री

2009 - तपन सिन्हा - प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक

2012 - होमाई व्यारावाला - भारत की प्रथम महिला फ़ोटो पत्रकार।

1761 ई. - सदाशिवराव भाऊ - भारतीय इतिहास में प्रसिद्ध एक मराठा वीर थे।

15 जनवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव

थल सेना दिवस

 

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