EMAIL

Call Now

ब्लॉग

कुष्‍ठरोगियों की सेवा को ही बनाया जीवन का लक्ष्य
09-Feb-2019    |    Views : 000114

LUCKNOW. बाबा आम्टे पूरा नाम 'मुरलीधर देवीदास आम्टे' (विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, मुख्‍यत: कुष्‍ठरोगियों की सेवा के लिए विख्‍यात ‘परोपकार विनाश करता है, कार्य निर्माण करता है’ के मूल मंत्र से उन्‍होंने हजारों कुष्‍ठरोगियों को गरिमा और साथ ही बेघर तथा विस्‍थापित आदिवासियों को आशा की किरण दिखाई दी।

कुष्‍ठरोगियों की सेवा को ही बनाया जीवन का लक्ष्य

LUCKNOW. बाबा आम्टे पूरा नाम 'मुरलीधर देवीदास आम्टे' (विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, मुख्‍यत: कुष्‍ठरोगियों की सेवा के लिए विख्‍यात ‘परोपकार विनाश करता है, कार्य निर्माण करता है’ के मूल मंत्र से उन्‍होंने हजारों कुष्‍ठरोगियों को गरिमा और साथ ही बेघर तथा विस्‍थापित आदिवासियों को आशा की किरण दिखाई दी।

विख्यात समाजसेवक बाबा आम्टे का जन्म 24 दिसंबर, 1914 ई. को वर्धा महाराष्ट्र के निकट एक ब्राह्मण जागीरदार परिवार में हुआ था। पिता देवीदास हरबाजी आम्टे शासकीय सेवा में थे। उनका बचपन बहुत ही ठाट-बाट से बीता। वे सोने के पालने में सोते थे और चांदी की चम्मच से उन्हें खाना खिलाया जाता था। बाबा आम्टे को बचपन में माता-पिता 'बाबा' पुकारते थे। इसलिए बाद में भी वे बाबा आम्टे के नाम से प्रसिद्ध हुए। बाबा आम्टे के मन में सबके प्रति समान व्यवहार और सेवा की भावना बचपन से ही थी। 9 वर्ष के थे तभी एक अंधे भिखारी को देखकर इतने द्रवित हुए कि उन्होंने ढेरों रुपए उसकी झोली में डाल दिए थे।

बाबा आम्टे का विवाह भी एक सेवा-धर्मी युवती साधना से विचित्र परिस्थितियों में हुआ। बाबा आम्टे को दो संतान प्राप्त हुई प्रकाश आम्टे, एवं विकास आम्टे।

बाबा आम्टे ने एम.ए., एल.एल.बी. तक की पढ़ाई की। उनकी पढ़ाई क्रिस्चियन मिशन स्कूल नागपुर में हुई और फिर उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय में क़ानून की पढ़ाई की और कई दिनों तक वर्धा में वकालत करने लगे। परंतु जब उनका ध्यान अपने तालुके के लोगों की ग़रीबी की ओर गया तो वकालत छोड़कर वे अंत्यजों और भंगियों की सेवा में लग गए।

1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल गए। नेताओं के मुकदमें लड़ने के लिए उन्‍होंने अपने साथी वकीलों को संगठित किया और इन्‍ही प्रयासों के कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्‍हे गिरफ्तार कर लिया, लेकिन वरोरा में कीड़ों से भरे कुष्‍ठ रोगी को देखकर उनके जीवन की धारा बदल गई। उन्‍होंने अपना वकालती चोगा और सुख-सुविधा वाली जीवन शैली त्‍यागकर कुष्‍ठरोगियों और दलितों के बीच उनके कल्‍याण के लिए काम करना प्रारंभ कर दिया।

बाबा आम्टे ने कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों की सेवा और सहायता का काम अपने हाथ में लिया। कुष्ठ रोगियों के लिए बाबा आम्टे ने सर्वप्रथम ग्यारह साप्ताहिक औषधालय स्थापित किए, फिर 'आनंदवन' नामक संस्था की स्थापना की। उन्होंने कुष्ठ की चिकित्सा का प्रशिक्षण तो लिया ही, अपने शरीर पर कुष्ठ निरोधी औषधियों का परीक्षण भी किया। 1951 में 'आनंदवन' की रजिस्ट्री हुई। सरकार से इस कार्य के विस्तार के लिए भूमि मिली। बाबा आम्टे के प्रयत्न से दो अस्पताल बने, विश्वविद्यालय स्थापित हुआ, एक अनाथालय खोला गया, नेत्रहीनों के लिए स्कूल बना और तकनीकी शिक्षा की भी व्यवस्था हुई। 'आनंदवन' आश्रम अब पूरी तरह आत्मनिर्भर है और लगभग पाँच हज़ार व्यक्ति उससे आजीविका चला रहे हैं।

बाबा आम्‍टे ने राष्‍ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए 1985 में कश्मीर से कन्याकुमारी तक और 1988 में असम से गुजरात तक दो बार भारत जोड़ो आंदोलन चलाया। नर्मदा घाटी में सरदार सरोवर बांध निर्माण और इसके फलस्‍वरूप हजारों आदिवासियों के विस्‍थापन का विरोध करने के लिए 1989 में बाबा आम्‍टे ने बांध बनने से डूब जाने वाले क्षेत्र में निजी बल (आंतरिक बल) नामक एक छोटा आश्रम बनाया। उनकी मृत्यु 9 फरवरी 2008 को महाराष्ट्र में हुआ।

बाबा आम्टे को उनके इन महान् कामों के लिए बहुत सारे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। उन्हें मैगसेसे अवॉर्ड, पद्मश्री, पद्मविभूषण, बिड़ला पुरस्कार, मानवीय हक पुरस्कार, महात्मा गांधी पुरस्कार के साथ-साथ और भी कई पुरस्कारों से नवाजा गया।

9 फरवरी की तारीख भी कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं की गवाह बनीं। जिसके बारे में जानकर हम अपने सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकते है।

9 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

स्‍वतंत्र देश बनने के लिए जमैका ने 1962 में दस्‍तावेजों पर हस्‍ताक्षर किए।

पोलैंड और रूस के बीच 1667 में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये गये।

आस्ट्रिया ने 1788 में रूस के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की।

आस्ट्रिया और फ्रांस ने 1801 में लुनेविल्लै शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये।

उन्नीसवीं सदी के प्रसिद्ध बंगाली कवि और नाटककार माइकल मधुसूदन दत्ता ने 1824 में ईसाई धर्म अपनाया।

भारत में 1931 में पहली बार किसी व्यक्ति के सम्मान में चित्र समेत डाक टिकट जारी किया गया।

लीबिया के तटीय शहर अल अघीला पर ब्रिटिश सेना ने 1941 में कब्जा किया।

1951 में स्वतंत्र भारत में पहली जनगणना करने के लिये सूची बनाने का कार्य शुरु किया गया।

“अपोलो 14 मिशन” 1971 में चांद से पृथ्‍वी पर लौटा।

बीजू पटनायक 1973 में उड़ीसा की राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता चुने गए।

रूसी अंतरिक्ष यान “सोयुज 17” अंतरिक्ष से 29 दिन बाद 1975 में धरती पर लौटा।

अफ्रीकी देश नाइजीरिया में 1979 में संविधान बदला गया।

लिथुआनिया में मतदाताओं ने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए 1991 में मतदान किया।

भारतीय निर्देशक शेखर कपूर की फिल्म ‘एलिजाबेथ’ 9 फरवरी, 1999 को ऑस्कर के लिए नॉमिनेट की गई।

पाकिस्तान की विपक्ष पार्टी जमायती उलेमा इस्लामी ने 9 फरवरी, 2007 को जिन्ना को स्वतंत्रता सेनानी की लिस्ट से हटा दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी, 2009 को ताज और उसके आसपास के अवैध निर्माण पर यूपी सरकार को नोटिस दिया।

भारत सरकार ने बीटी बैंगन की व्यावसायिक खेती पर 9 फरवरी, 2010 को अनिश्चित काल के लिए रोक लगाई।

जर्मनी के बवारिया प्रांत में 9 फरवरी, 2016 के दिन दो ट्रेनों की जोरदार टक्कर हो गई , जिसमें करीब 12 लोगों की मौत हो गई , जबकि लगभग 85 लोग बुरी तरह घायल हो गए थे।

9 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति

भारतीय ग्रैंड मास्टर खिलाड़ी परिमार्जन नेगी का 1993 में जन्म हुआ।

भारतीय फ़िल्म अभिनेता राहुल रॉय का 1968 में जन्म हुआ।

भारत के प्रसिद्ध होटल उद्योगपति तथा ‘होटल लीला समूह’ के संस्थापक सी. पी. कृष्णन नायर का 1922 में जन्म हुआ।

भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ श्याम चरण गुप्ता का 1945 में जन्म हुआ।

भारतीय अभिनेत्री अमृता सिंह का 9 फरवरी, 1958 में जन्म हुआ।

भारतीय अभिनेत्री उदिता गोस्वामी का 9 फरवरी, 1984 में जन्म हुआ।

भारत के मशहूर लेखक विष्णु खरे का 9 फरवरी, 1940 को जन्म हुआ।

भारतीय राजनीतिज्ञ अब्दुल रहमान अंतुले का 9 फरवरी, 1929 में जन्म हुआ।

9 फ़रवरी को हुए निधन

1760 में मराठा सेनापति दत्ताजी शिन्दे का निधन।

1984 में ‘भरतनाट्यम’ की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना टी. बालासरस्वती का निधन।

1899 में स्वतंत्रता सेनानी बालकृष्ण चापेकर का निधन।

2006 में भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री नादिरा का निधन।

2008 में कुष्‍ठरोगियों के देवता तथा महान सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आमटे का निधन।

2012 में भारतीय निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक ओ. पी. दत्ता का निधन।

2016 में नेपाल के 37वें प्रधानमंत्री सुशील कोइराला का निधन।

9 फरवरी के महत्वपूर्ण दिवस

चॉकलेट डे

वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)

 

 

Save the Children India, Best NGO to Support Child Rights, Best NGO in Lucknow, Skills Development NGO, Health NGO Lucknow, Education NGO Lucknow, NGO for Women Empowerment, NGO in India, Non Governmental Organisations, Non Profit Organisations, Best NGO in India

 


All Comments

Leave a Comment

विशिष्ट वक्तव्य 

विशिष्ट महानुभावों के वशिष्ट अवसरों पर राय

Facebook
Follow us on Twitter
Recommend us on Google Plus
Visit To Website