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बाल कलाकार से मशहूर अभिनेता बन गया यह कलाकार
18-Mar-2019    |    Views : 000239

लखनऊ. शशि कपूर हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। शशि कपूर हिन्दी फ़िल्मों में लोकप्रिय कपूर परिवार के सदस्य थे। वर्ष 2011 में उनको भारत सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्ष 2015 में उनको 2014 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया।

बाल कलाकार से मशहूर अभिनेता बन गया यह कलाकार

लखनऊ. शशि कपूर हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। शशि कपूर हिन्दी फ़िल्मों में लोकप्रिय कपूर परिवार के सदस्य थे। वर्ष 2011 में उनको भारत सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्ष 2015 में उनको 2014 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। इस तरह से वे अपने पिता पृथ्वीराज कपूर और बड़े भाई राजकपूर के बाद यह सम्मान पाने वाले कपूर परिवार के तीसरे सदस्य बन गये।

शशि कपूर का असली नाम बलबीर राज कपूर था। इनका जन्म जाने माने अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के घर पर हुआ। अपने पिता एवं भाइयो के नक़्शे कदम पर चलते हुए इन्होने भी फ़िल्मो में ही अपनी तक़दीर आजमाई। शशि कपूर ने 40 के दशक से ही फ़िल्मो में काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने कई धार्मिक फ़िल्मो में भूमिकायें निभाई। इन्होने मुंबई के डॉन बोस्को स्कूल से पढ़ाई पूरी की। पिता पृथ्वीराज कपूर इन्हें छुटिट्यो के दौरान स्टेज पर अभिनय करने के लिए प्रोत्साहित करते रहते थे। इसका नतीजा रहा कि शशि के बड़े भाई राजकपूर ने उन्हें 'आग' (1948) और 'आवारा' (1951) में भूमिकाएं दी। आवारा में उन्होंने राजकपूर (जय रुद्) बचपन का रोल किया था। 50 के दशक मे पिता की सलाह पर वे गोद्फ्रे कैंडल के थियेटर ग्रुप 'शेक्स्पियाराना' में शामिल हो गए और उसके साथ दुनिया भर में यात्रायें की।

इसी दोरान गोद्फ्रे की बेटी और ब्रिटिश अभिनेत्री जेनिफर से उन्हें प्रेम हुआ और मात्र 20 वर्ष की उम्र में 1950 में विवाह कर लिया। शशि कपूर ने गैर परम्परागत किस्म की भूमिकाओ के साथ सिनेमा के परदे पर आगाज किया था। उन्होंने सांप्रदायिक दंगो पर आधारित धर्मपुत्र (1961) में काम किया था। उसके बाद चार दीवारी और प्रेमपत्र जैसी ऑफ बीत फ़िल्मों में नजर आये। वे हिंदी सिनेमा के पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने हाउसहोल्डर और शेक्सपियर वाला जैसी अंग्रेजी फ़िल्मो में मुख्या भूमिकायें निभाई। वर्ष 1965 उनके लिए एक महत्वपूर्ण साल था। इसी साल उनकी पहली जुबली फ़िल्म 'जब जब फूल खिले' रिलीज हुई और यश चोपड़ा ने उन्हें भारत की पहली बहुल अभिनेताओ वाली हिंदी फ़िल्म 'वक्त' के लिए कास्ट किया। बॉक्स ऑफिस पर लगातार दो बड़ी हिट फ़िल्मो के बाद व्यावहारिकता का तकाजा यह था की शशि कपूर परम्परागत भूमिकाये करे, लेकिन उनके अन्दर का अभिनेता इसके लिए तैयार नहीं था। इसके बाद उन्होंने 'ए मत्तेर ऑफ़ इन्नोसेंस' और 'प्रीटी परली 67' जसी फ़िल्मे की. वहीँ हसीना मन जाएगी, प्यार का मौसम ने उन्हें एक चोकलेटी हीरो के रूप में स्थापित किया। वर्ष 1972 की फ़िल्म सिथार्थ के साथ उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय सिनेमा के मंच पर अपनी मौजुदगी कायक राखी. 70 के दशक में शशि कपूर सबसे व्यस्त अभिनेताओं में से एक थे। इसी दशक में उनकी 'चोर मचाये शोर', दीवार, कभी - कभी, दूसरा आदमी और 'सत्यम शिवम् सुन्दरम' जैसी हिट फ़िल्मे रिलीज हुयी। वर्ष 1971 में पिता पृथ्वीराज की मृत्यु के बाद शशि कपूर ने जेनिफर के साथ मिलकर पिता के स्वप्न को जारी रखने के लिए मुंबई में पृथ्वी थियेटर का पुनरूत्थान किया। लंबी बीमारी के बाद 4 दिसंबर 2017 को उनका निधन हो गया।

इतिहास में 18 मार्च के दिन यानि आज के दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी थी। आज हम उन महान लोगों को याद करेंगे जिन्होंने आज के दिन इस दुनिया में अपना कदम रखा और साथ उन्हें जो आज ही के दिन हमारे बीच से हमेशा के लिए चले गए।

18 मार्च की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

अनिवार्य और मुफ्त प्राथमिक शिक्षा प्रावधान के लिए गोपाल कृष्ण गोखले ने सन 1910 में ब्रिटिश विधान परिषद के सामने अपना प्रस्ताव रखा था।

ब्रितानी अदालत ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के बाद सन 1922 में राजद्रोह मामले में महात्मा गांधी को छह साल की सजा सुनाई थी।

मुसोलिनी और अडोल्फ़ हिटलर के बीच 1940 में हुए मीटिंग में मुसोलिनी ने ब्रिटेन और फ्रांस के खिलाफ़ युद्ध में जर्मनी का साथ देने पर अपनी सहमती जताई।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज ने सन 1944 में बर्मा की सीमा पार की।

सोवियत संघ के वायुसेना पायलट एलेक्सी लियोनोव ने सन 1965 में पहली बार स्पेसवॉक किया था।

सन 1990 में अमरीकी संग्रहालय से लगभग 500 मिलियन डॉलर की कलाकृतियों की चोरी हो गई।

उगांडा में प्रलय दिवस सम्प्रदाय के 230 सदस्यों ने सन 2000 में आत्मदाह किया।

संयुक्त राष्ट्र ने 2006 में ‘मानवाधिकार परिषद’ के गठन का प्रस्ताव मंजूर किया।

उत्तर कोरिया ने 2007 में परमाणु कार्यक्रम बन्द करने का कार्य प्रारम्भ किया।

केन्द्रीय मंत्री मण्डल ने 2009 में मेघालय में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफ़ारिश की।

18 मार्च को जन्मे व्यक्ति

1914 में आज़ाद हिन्द फ़ौज के अधिकारी गुरबख्श सिंह ढिल्लों का जन्म।

1914 में अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के पूर्व अध्यक्ष एवं भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त रह चुके नागेन्द्र सिंह का जन्म।

1938 में हिन्दी सिनेमा जगत के प्रसिद्ध अभिनेताओं में से एक शशि कपूर का जन्म।

18 मार्च को हुए निधन

प्रसिद्ध मराठी विद्वान नारायण शास्त्री मराठे का 1956 में निधन।

हिन्दी सिनेमा की जानीमानी गायिका राजकुमारी दुबे का 2000 में निधन।

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कोच बॉब वूल्मर का 2007 में निधन।

 

 

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