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नीली आंखों वाले इस कलाकार ने कम समय में नाम कमाया
16-Mar-2019    |    Views : 00024

LUCKNOW. दयाकिशन सप्रू, हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेताओं में से एक थे। अपने फ़िल्मी कॅरियर में उन्हें 'सप्रू' नाम से अधिक जाना गया। 1960 और 1970 के दशक में उन्होंने कई फ़िल्मों में खलनायक की भूमिका निभाई थी, जिससे उन्हें काफ़ी ख्याति मिली थी। खलनायक से पहले दयाकिशन जी ने कई चरित्र किरदार भी निभाए थे। उन्होंने करीब 350 फ़िल्मों में काम किया।

नीली आंखों वाले इस कलाकार ने कम समय में नाम कमाया

LUCKNOW. दयाकिशन सप्रू, हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेताओं में से एक थे। अपने फ़िल्मी कॅरियर में उन्हें 'सप्रू' नाम से अधिक जाना गया। 1960 और 1970 के दशक में उन्होंने कई फ़िल्मों में खलनायक की भूमिका निभाई थी, जिससे उन्हें काफ़ी ख्याति मिली थी। खलनायक से पहले दयाकिशन जी ने कई चरित्र किरदार भी निभाए थे। उन्होंने करीब 350 फ़िल्मों में काम किया। चेतन आनन्द की फ़िल्म 'कुदरत' उनकी अंतिम फ़िल्म थी।

दयाकिशन सप्रू का जन्म 16 मार्च, 1916 को कश्मीर, भारत में हुआ था। उनके पिता कश्मीर के महाराजा के दरबार में वित्त विभाग में ऊंचे ओहदे पर थे।

अंग्रेज़ों का जमाना था और उस दौर में बी.ए. करने के बाद युवा दयाकिशन सप्रू ने पी.डब्ल्यू.डी. विभाग में ठेकेदारी शुरू कर दी थी। उसी समय उनके फुफेरे भाई फ़िल्मी पर्दे पर दिखाई देने लगे। दया से भी उनके साथी कॉलेज के जमाने से कह रहे थे कि प्रभावशाली व्यक्तित्व के ऊंचे कद, गोरे-चिट्टे और नीली आँखों वाले इस कश्मीरी लड़के को फ़िल्मों में जाना चाहिए। ऐसे में अक्सर रूपहले पर्दे की कशिश दयाकिशन को अपनी ओर खींचने लगती थी। एक दिन दयाकिशन मुंबई जा पहुंचे, फ़िल्मों में हाथ आजमाने के लिए। वह साल था 1944। उनके फुफेरे भाई ओंकारनाथ धर उर्फ जीवन ने दयाकिशन को फ़िल्म निर्माताओं से खुद जाकर बात करने की सलाह दी। दयाशिन वी. शांताराम से मिलने प्रभात स्टूडियो जा पहुँचे। कमरे के बाहर बैठे दयाकिशन पर नजर पड़ी तो वी. शांताराम ने उन्हें बुला लिया। जब दयाकिशन ने अपना परिचय देने के लिए बोलना शुरू किया तो मंत्रमुग्ध वी. शांताराम उनकी गरजदार आवाज़ को सुनते रहे। वी. शांताराम हिन्दी, पंजाबी, अंग्रेज़ी और उर्दू में धाराप्रवाह बात करने वाले इस जवान से खासे प्रभावित हुए। नतीजा यह हुआ की वी. शांताराम ने अपनी फ़िल्म 'रामशास्त्री' के लिए दयाकिशन को चुन लिया। यही दयाकिशन आगे चलकर 'सप्रू' के रूप में मशहूर हुए।

सप्रू की पहली फ़िल्म 'रामशास्त्री' में उन्होंने पेशवा का छोटा-सा रोल किया। यह फ़िल्म अपने समय की हिट फ़िल्म थी। प्रभात की ही अगली फ़िल्म 'लाखारानी' में उन्हें बतौर हीरो लिया गया और वेतन तय हुआ तीन हज़ार रुपये। इतनी बड़ी रकम की उन दिनों कोई अभिनेता कल्पना भी नहीं कर सकता था। अपनी असरदार उपस्थिति के चलते जल्द ही कई फ़िल्में सप्रू के हाथ लग गईं। उन्होंने जहाँ 'चांद' (1944) में बेगम पारा के साथ काम किया। वहीं 'रोमियो जूलियट' में नर्गिस के हीरो बने। उस दौर में फ़िल्मों में बतौर हिरोइन हेमावती ने भी शुरुआत की। सप्रू की हेमावती से मुलाकात हुई, तो मामला पहली नजर के प्यार वाला हो गया। बहरहाल सप्रू ने जल्द ही हेमावती से विवाह कर लिया। 'अदले जहांगीर', 'काला पानी', 'झाँसी की रानी', 'तानसेन', 'गंगा मैया' और 'वामनावतार' सहित कई फ़िल्मों में काम करते-करते सप्रू पौराणिक विषयों पर बनने वाली फ़िल्मों के पसंदीदा किरदार बन गए। 'शबिस्तान' (1951) वह फ़िल्म थी, जिसमें सप्रू ने पहली बार खलनायक का किरदार किया और उस रोल में भी उनकी जमकर तरीफ़ हुई।

दयाकिशन सप्रू का शानदार कॅरियर जारी था कि कुछ लोगों की राय पर उन्होंने फ़िल्म निर्माण में हाथ आजमा लिया। पहली फ़िल्म बनाई 'पतीतपावन' (1955)। इससे उन्हें कोई आर्थिक फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने फ़िल्म 'बहादुरशाह जफ़र' शुरू की। इसमें बहादुर शाह की भूमिका खुद सप्रू ने निभाई। फ़िल्म पूरी करने के सिलसिले में सप्रू कर्जदार हो गए। यहां तक कि उन्हें अपना घर भी बेचना पड़ा।

इसके बाद सप्रू को जो भी रोल मिला, वह करते गए। उन्होंने पंजाबी और गुजराती फ़िल्मों में भी काम किया। सप्रू की बेटी रीमा अपनी पढ़ाई पुरी करने के बाद फ़िल्म राइटर बनीं। उन्होंने एक फ़िल्म लिखी। सप्रू ने एक बार फिर फ़िल्म बनाने का फैसला किया। फ़िल्म का नाम रखा गया 'जीवन चलने का नाम'। इसके लिए संजीव कुमार, रेखा और शशि कपूर को साइन किया गया। मगर तभी सप्रू को मधुमेह की बीमारी ने अपनी चपेट मे ले लिया। इस एक बीमारी ने उन्हें कई और बीमारियों के हवाले कर दिया। फ़िल्म का काम रुक गया। बीमारी के बावजूद सप्रू उन फ़िल्मों का काम निपटाते रहे, जो उन्होंने साइन की थीं।

16 मार्च के इतिहास में बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएं, आज ही के दिन कई महान व्यक्ति इस धरती पर आये और कई महान लोगों ने आज ही दिन इस दुनिया को अलविदा कह गये। ऐसे लोगों के बारे में जानकर हम अपना सामान्य ज्ञान बढ़ा सकते है।

16 मार्च की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

फ्रांस के राजा लुईस चौदहवें ने 1690 में आयरलैंड में सेना भेजी।

अमृतसर समझौते के मुताबिक कश्मीर का आधिपत्य 1846 में जम्मू के हिंदू राजा गुलाब सिंह के अधीन कर दिया गया।

इंग्लैंड ने 1922 में मिस्र को मान्यता दी।

चेकोस्लोवाकिया पर जर्मनी ने 1939 में कब्जा किया।

V-2 रॉकेट 1942 में लांच किया गया, लेकिन उसी दौरान इसमें ब्‍लास्‍ट हो गया।

इराक और सोवियत संघ ने 1959 में अार्थिक एवं तकनीक समझौते पर हस्ताक्षर किये।

अमेरिका ने 1966 में मानवयुक्त अंतरिक्ष यान “जेमिनी 8” लांच किया।

आठ सालों तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और 13 वर्षों तक लेबर पार्टी के नेता रहे, हैरल्ड विल्सन ने 1976 में त्यागपत्र देकर सबको चौंका दिया था।

अमेरिका ने 1978 में नेवादा में परमाणु परीक्षण किया।

रूस ने 1982 में पश्चिम यूरोप में नए परमाणु मिसाइलों की तैनाती रोकने की घोषणा की।

मिस्र में चिपोज के पिरामिड में 1989 में 4400 साल पुरानी ममी मिली।

नासा अंतरिक्ष यात्री नॉर्मन रूसी 1995 में अंतरिक्ष स्टेशन मीर का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी बने।

चीनी राष्ट्रपति जियांग जेमिन 1998 में अगले कार्यकाल के लिए पुन: राष्ट्रपति निर्वाचित।

ग्रीन स्मिथ 2003 में दक्षिण अफ़्रीका के क्रिकेट कप्तान बने।

रूस में 2004 में नौ मंजिला इमारत में विस्फोट, 21 मरे।

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने 2005 में सुपाचयी पानिचपकड़ी को अंकटाड का नया अध्यक्ष नामांकित किया।

सन 2006 में चुनाव के तीन महिने बाद ईराक की नयी संसद ने शपथ ग्रहण की।

दक्षिण अफ़्रीका के हर्शेल गिब्स ने 2007 में एक ओवर में छह छक्के लगाकर विश्व रिकार्ड बनाया।

परवेज मुशर्रफ़ ने 2008 में पाकिस्तान में सज़ा-ए-मौत पा चुके भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह के डेथ वारंट पर दस्तखत किये।

भारत के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर 2012 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक बनाने वाले पहले खिलाड़ी बने।

पाकिस्तान के रावलपिंडी में 2013 में हुए बस दुर्घटना में लगभग 25 सैनिकों की जान गयी।

यूक्रेन छोड़कर रूस में शामिल होने के पक्ष में क्रीमिया के लोगों ने 2014 में मतदान किया।

16 मार्च को जन्मे व्यक्ति

इंदौर के होल्कर वंश का प्रवर्तक मल्हारराव होल्कर का 1693 में जन्म।

गांधी जी के अनुयायी स्वतन्त्रता सेनानी पोट्टि श्रीरामुलु का 1901 में जन्म।

भारत के जाने-माने शिक्षाविद और हिन्दी साहित्यकार अम्बिका प्रसाद दिव्य का 1906 में जन्म।

हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध खलनायक तथा फ़िल्म निर्माता दयाकिशन सप्रू का 1916 में जन्म।

अमेरिकी टेलीविजन पटकथा लेखक और नाटककार हार्डिंग लेमेयका 1922 में जन्म।

16 मार्च को हुए निधन

1947 में प्रसिद्ध कवि, साहित्यकार अयोध्यासिंह उपाध्याय का निधन।

1999 में फैंटम जैसे हास्य चरित्र के जनक लियोन ली फ़ाक का निधन।

1955 में प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकारविजयानन्द त्रिपाठी का निधन।

 

 

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