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अपने आकर्षक व्यक्तित्व ने चढ़ाया इस क्रान्तिकारी को फांसी
22-Jan-2019    |    Views : 00040

LUCKNOW. ठाकुर रोशन सिंह भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के एक क्रान्तिकारी थे। असहयोग आन्दोलन के दौरान उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हुए गोली-काण्ड में सजा काटकर जैसे ही शान्तिपूर्ण जीवन बिताने घर वापस आये कि हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसियेशन में शामिल हो गये।

अपने आकर्षक व्यक्तित्व ने चढ़ाया इस क्रान्तिकारी को फांसी

LUCKNOW. ठाकुर रोशन सिंह भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के एक क्रान्तिकारी थे। असहयोग आन्दोलन के दौरान उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हुए गोली-काण्ड में सजा काटकर जैसे ही शान्तिपूर्ण जीवन बिताने घर वापस आये कि हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसियेशन में शामिल हो गये। यद्यपि ठाकुर साहब ने काकोरी काण्ड में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लिया था फिर भी आपके आकर्षक व रौबीले व्यक्तित्व को देखकर काकोरी काण्ड के सूत्रधार पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल व उनके सहकारी अशफाक उल्ला खाँ के साथ 19 दिसम्बर 1927 को फाँसी दे दी गयी। ये तीनों ही क्रान्तिकारी उत्तर प्रदेश के शहीदगढ़ कहे जाने वाले जनपद शाहजहाँपुर के रहने वाले थे। इनमें ठाकुर साहब आयु के लिहाज से सबसे बडे, अनुभवी, दक्ष व अचूक निशानेबाज थे।

क्रान्तिकारी ठाकुर रोशन सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जनपद में फतेहगंज से 10किलोमीटर दूर स्थित गाँव नबादा में 22 जनवरी 1892 को हुआ था। आपकी माता जी का नाम कौशल्या देवी एवं पिता जी का ठाकुर जंगी सिंह था। पूरा परिवार आर्य समाज से अनुप्राणित था। आप पाँच भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। असहयोग आन्दोलन में उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर और बरेली जिले के ग्रामीण क्षेत्र में आपने अद्भुत योगदान दिया था। यही नहीं, बरेली में हुए गोली-काण्ड में एक पुलिस वाले की रायफल छीनकर जबर्दस्त फायरिंग शुरू कर दी थी जिसके कारण हमलावर पुलिस को उल्टे पाँव भागना पडा। मुकदमा चला और ठाकुर रोशन सिंह को सेण्ट्रल जेल बरेली में दो साल वामशक्कत कैद की सजा काटनी पडी थी।

बरेली गोली-काण्ड में सजायाफ्ता रोशन सिंह की भेंट सेण्ट्रल जेल बरेली में कानपुर निवासी पंडित रामदुलारे त्रिवेदी से हुई जो उन दिनों पीलीभीत में शुरू किये गये असहयोग आन्दोलन के फलस्वरूप 6 महीने की सजा भुगतने बरेली सेण्ट्रल जेल में रखे गये थे। गान्धी जी द्वारा सन 1922 में हुए चौरी चौरा काण्ड के विरोध स्वरूप असहयोग आन्दोलन वापस ले लिये जाने पर पूरे हिन्दुस्तान में जो प्रतिक्रिया हुई उसके कारण ठाकुर साहब ने भी राजेन्द्र नाथ लाहिडी़, रामदुलारे त्रिवेदी व सुरेशचन्द्र भट्टाचार्य आदि के साथ शाहजहाँपुर शहर के आर्य समाज पहुँच कर राम प्रसाद बिस्मिल से गम्भीर मन्त्रणा की जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित कोई बहुत बडी क्रान्तिकारी पार्टी बनाने की रणनीति तय हुई। इसी रणनीति के तहत ठाकुर रोशनसिंह को पार्टी में शामिल किया गया था। ठाकुर साहब पक्के निशानेबाज थे यहाँ तक कि उडती हुई चिडिया को खेल-खेल में ही मार गिराते थे।

ठाकुर साहब द्वारा कही गयी ये अंतिम पंक्ति-

जिन्दगी जिन्दा-दिली को जान ऐ रोशन! 

वरना कितने ही यहाँ रोज फना होते हैं। 

देश दुनिया में 22 जनवरी को बहुत कुछ हुआ आइये उसके बारे में जानते है।

22 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

1517 - तुर्की ने काहिरा पर कब्जा किया।

1673 - न्यूयॉर्क एवं बोस्टन के बीच डाक सेवा की शुरुआत हुई।

1760 - वांदीवाश के युद्ध में अंग्रेजों ने फ्रांसिसियों को हराया।

1837 - दक्षिणी सीरिया में भूकंप से हजारों लोग मरे।

1905 - रूस के सेंट पीट्सबर्ग में मजदूरों पर गोलियां चलाई गयी जिसमें 500 से ज्यादा लोग मरे।

1924 - रैमसे मैकडोनाल्ड ब्रिटेन में लेबर पार्टी के पहले प्रधानमंत्री बने।

1963 - देहरादून में दृष्टिहीनों के लिए राष्ट्रीय पुस्तकालय की स्थापना हुई।

1981 - रोनाल्ड रीगन का सं.रा. अमेरिका के 40वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण।

1993 - इंडियन एयरलांइस का विमान औरंगाबाद मे दुर्घटनाग्रस्त, 61 यात्रियों की मौत।

1970 - बोइंग 747 का न्यूयॉर्क एवं लंदन के बीच पहली व्यावसायिक उड़ान शुरु हुई।

1996 - कैलीफ़ोर्निया विश्वविद्यालय की वेधशाला के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से लगभग 3,50,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर दो नये ग्रहों की खोज की।

1998 - अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर मोनिका लेविंस्की ने अवैध शारीरिक संबंध स्थापित करने का आरोप लगाया।

2002 - फ़िलिस्तीनी शहर तुल्कोरम पर इस्रायल का कब्ज़ा, अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए टोकियो में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की बैठक में 3.5 अरब डॉलर की मदद की घोषणा।

2006 - श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने विद्रोही संगठन लिट्टे से बातचीत की पेशकश की।

इवा मोराल्स ने बोलीविया के राष्ट्रपति पद की शपथ ली।

2008-

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी को आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश करने के प्रस्ताव का समर्थन किया।

पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान में लाक्या क़िले पर आतंकवादियों के हमले में पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गये।

2009- फ़िल्म स्लमडॉग मिलेनियर का ऑस्कर के लिए नामांकन हुआ। सरकार ने सार्वजनिक निजी भागीदारी आधार वाली तीन बंदरगाह परियोजनाओं को मंज़ूदी दी।

2015 - उक्रेन के दोनेत्स्क में हुए विस्फोट में 13 लोगों की मौत।

22 जनवरी को जन्मे व्यक्ति

1934 - विजय आनन्द

1972 - नम्रता शिरोडकर, भारतीय अभिनेत्री

1892 - ठाकुर रोशन सिंह - भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिकारियों में से एक।

1976 - टी. एम. कृष्णा - कर्नाटक संगीत शैली के प्रसिद्ध गायक तथा मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त व्यक्ति।

1977 - तरुण राम फुकन, असम के सामाजिक कार्यकर्ता

1909 - यू. थांट - बर्मा के राजनयिक तथा संयुक्त राष्ट्र के तीसरे महासचिव थे।

1949 - माणिक सरकार- राजनीतिज्ञ एवं त्रिपुरा के 9वें मुख्यमंत्री।

22 जनवरी को हुए निधन

1666 - शाहजहाँ, भारत के मुग़ल सम्राट

1901 - महारानी विक्टोरिया - इंग्लैंड।

2014 - ए. नागेश्वर राव - भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध तेलुगु फ़िल्म अभिनेता और फ़िल्म निर्माता।

 

 

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