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निराला ने कठिन परिस्थितियों में भी नही त्यागा सिद्धांत
16-Feb-2019    |    Views : 000316

LUCKNOW. सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। वे जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा के साथ हिन्दी साहित्य में छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने कहानियाँ, उपन्यास और निबंध भी लिखे हैं किन्तु उनकी ख्याति विशेषरुप से कविता के कारण ही है।

निराला ने कठिन परिस्थितियों में भी नही त्यागा सिद्धांत

LUCKNOW. सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। वे जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा के साथ हिन्दी साहित्य में छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने कहानियाँ, उपन्यास और निबंध भी लिखे हैं किन्तु उनकी ख्याति विशेषरुप से कविता के कारण ही है।

सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' का जन्म बंगाल की महिषादल रियासत (जिला मेदिनीपुर) में माघ शुक्ल 11, संवत् 1955, तदनुसार 21 फ़रवरी, सन् 1899 में हुआ था। वसंत पंचमी पर उनका जन्मदिन मनाने की परंपरा 1930 में प्रारंभ हुई। उनका जन्म मंगलवार को हुआ था। जन्म-कुण्डली बनाने वाले पंडित के कहने से उनका नाम सुर्जकुमार रखा गया। उनके पिता पंडित रामसहाय तिवारी उन्नाव (बैसवाड़ा) के रहने वाले थे और महिषादल में सिपाही की नौकरी करते थे। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के गढ़ाकोला नामक गाँव के निवासी थे।

निराला की शिक्षा हाई स्कूल तक हुई। बाद में हिन्दी संस्कृत और बाङ्ला का स्वतंत्र अध्ययन किया। पिता की छोटी-सी नौकरी की असुविधाओं और मान-अपमान का परिचय निराला को आरम्भ में ही प्राप्त हुआ। उन्होंने दलित-शोषित किसान के साथ हमदर्दी का संस्कार अपने अबोध मन से ही अर्जित किया। तीन वर्ष की अवस्था में माता का और बीस वर्ष का होते-होते पिता का देहांत हो गया। अपने बच्चों के अलावा संयुक्त परिवार का भी बोझ निराला पर पड़ा। पहले महायुद्ध के बाद जो महामारी फैली उसमें न सिर्फ पत्नी मनोहरा देवी का, बल्कि चाचा, भाई और भाभी का भी देहांत हो गया। शेष कुनबे का बोझ उठाने में महिषादल की नौकरी अपर्याप्त थी। इसके बाद का उनका सारा जीवन आर्थिक-संघर्ष में बीता। निराला के जीवन की सबसे विशेष बात यह है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने सिद्धांत त्यागकर समझौते का रास्ता नहीं अपनाया, संघर्ष का साहस नहीं गंवाया। जीवन का उत्तरार्द्ध इलाहाबाद में बीता। वहीं दारागंज मुहल्ले में स्थित रायसाहब की विशाल कोठी के ठीक पीछे बने एक कमरे में 15 अक्टूबर 1961 को उन्होंने अपनी इहलीला समाप्त की।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की पहली नियुक्ति महिषादल राज्य में ही हुई। उन्होंने 1918 से 1922 तक यह नौकरी की। उसके बाद संपादन, स्वतंत्र लेखन और अनुवाद कार्य की ओर प्रवृत्त हुए। 1922 से 1923 के दौरान कोलकाता से प्रकाशित 'समन्वय' का संपादन किया, 1923 के अगस्त से मतवाला के संपादक मंडल में कार्य किया। इसके बाद लखनऊ में गंगा पुस्तक माला कार्यालय में उनकी नियुक्ति हुई जहाँ वे संस्था की मासिक पत्रिका सुधा से 1935 के मध्य तक संबद्ध रहे। 1935 से 1940 तक का कुछ समय उन्होंने लखनऊ में भी बिताया। इसके बाद 1942 से मृत्यु पर्यन्त इलाहाबाद में रह कर स्वतंत्र लेखन और अनुवाद कार्य किया। उनकी पहली कविता जन्मभूमि प्रभा नामक मासिक पत्र में जून 1920 में, पहला कविता संग्रह 1923 में अनामिका नाम से, तथा पहला निबंध बंग भाषा का उच्चारण अक्टूबर 1920 में मासिक पत्रिका सरस्वती में प्रकाशित हुआ।

16 फ़रवरी को इतिहास में बहुत कुछ हुआ परन्तु उसकी जानकारी हमें नही है। देश विदेश की उन घटनाओं के बारे में जानकर हम अपने सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकते है।

16 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

लॉस एंजिलिस और सैन फ्रांसिस्को के बीच 1914 में पहले विमान ने उड़ान भरी।

लुथियाना ने 1918 में खुद को स्वतंत्र घोषित किया।

मिर्जा गालिब की 1969 में 100वीं पुण्यतिथि पर डाक टिकट जारी किया गया।

जवाहरलाल नेहरू इंटरनेशनल गोल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन 1982 में पहली बार कलकत्ता में किया गया।

मेरिओ सोरेस 1986 में पुर्तग़ाल के प्रथम असैनिक राष्ट्रपति चुने गयें।

पनडुब्बी से पनडुब्बी पर मार करने की क्षमता वाले मिसाइल को 1987 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।

सैम नुजोमा 1990 में नामीबिया के पहले राष्ट्रपति चुने गयें।

इराक पर अमेरिकी व ब्रिटिश विमानों का 2001 में हमला।

विश्व की पहली क्लोन भेंड़ डोली को 2003 में दया मृत्यु दी गई।

मध्य प्रदेश शासन द्वारा 2008 में पार्श्व गायक नितिन मुकेश को लता मंगेशकर पुरस्कार प्रदान किया गया।

बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार ने 2008 से राज्य में ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ का शुभारम्भ किया।

16 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति

मराठा सामाज्य के चौथे पेशवा थोरले माधवराव का जन्म 1745 में हुआ।

हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि,साहित्यकार और लेखक सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म 1896 में हुआ।

भारत विद्या से संबंधित विषयों के प्रख्यात विद्वान राजेन्द्रलाल मित्रा का जन्म 1822 में हुआ।

एक फ्रेंच लेखक ओक्तवे मिर्बो का जन्म 1848 में हुआ।

भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफ़र का जन्म 1978 में हुआ।

अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्ध चित्रकार, लेखक एवं कला समालोचक गुलाम मोहम्मद शेख़ का जन्म 1937 में हुआ।

16 फ़रवरी को हुए निधन

1944 में हिन्दी सिनेमा के पितामाह दादासाहब फालके का निधन।

1956 में गणित व भौतिकी के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य करने वाले भारतीय वैज्ञानिक मेघनाद साहा का निधन।

2016 में संयुक्त राष्ट्र संघ के छठे महासचिव बुतरस घाली का निधन।

 

 

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