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स्वरोजगार से ही दूर हो सकती है  बेरोजगारी
12-Jan-2019    |    Views : 000235

LUCKNOW. सरकार सभी बेरोजगारों को नौकरी नही दे सकती है, इसलिये नौकरी के भरोसे न रहे। स्वरोजगार के जरिये ही बेरोजगारी को दूर किया जा सकता है। समाधान फाउण्डेशन के अरूणेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने परिचर्चा के दौरान यह बात कही। यूनाइट फाउण्डेशन हर माह के दूसरे और चौथे शनिवार को यूनाइट मंथन कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है।

स्वरोजगार से ही दूर हो सकती है बेरोजगारी

LUCKNOW. सरकार सभी बेरोजगारों को नौकरी नही दे सकती है, इसलिये नौकरी के भरोसे न रहे। स्वरोजगार के जरिये ही बेरोजगारी को दूर किया जा सकता है। समाधान फाउण्डेशन के अरूणेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने परिचर्चा के दौरान यह बात कही। यूनाइट फाउण्डेशन हर माह के दूसरे और चौथे शनिवार को यूनाइट मंथन कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। इसी कड़ी में 12 जनवरी को यूनाइट फाउण्डेशन कार्यालय में यूनाइट मंथन के तहत फूड सेफ्टी एण्ड एग्री बिजनेस और कन्ज्यूमर अमेंडमेंट एक्ट की उपयोगिता पर एक परिचर्चा हुई। जिसमें विभिन्न संस्थाओं ने भाग लिया।

उन्होने कहा कि स्वरोजगार करके आप 5 सालों में वहां पहुंच सकते है जहां आप नौकरी करके आप नही जा सकते है। हमारें बीच ऐसे कई उदाहरण जो अपनी मेहनत से वहां पहुंच गये।

समाधान फाउण्डेशन के अध्यक्ष यतीन्द्र गुप्ता ने कहा कि मार्केटिंग में जब हम आते है बहुत सारी संभावनायें रहती है , मगर मौजूदा समय में छोटे व्यापार के लिये संभावनायें बढ़ने वाली है । वहीं बड़ें व्यापार के लिये मुश्किलें पैदा होने वाली है। उन्होने कहा कि कन्ज्यूमर एक्ट पास हुआ है जिसमें अथारिटी बनाई गयी है जो बड़े व्यापारियों पर नजर रखेगी और किसी पर भी प्रतिबंध लगा सकती है। इस बिल में उपभोक्ता ही सबकुछ होगा। वह चाहे तो अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके साथ ही उन्होने कहा कि जीएसटी का असर छोटे व्यापारियों पर ज्यादा असर नही होगा।

समाजसेवी मनोज सिंह ने स्कूलों के मनमाने रवैय्ये पर कहा कि बड़े स्कूलों में मनमाने तरीके से बच्चों के दाखिले के लिये साक्षात्कार लिये जाते है, वह तरीका सही नही है। बच्चों से बंद कमरे में साक्षात्कार लेने की बजाये उनसे लिखित परीक्षा होनी चाहिये। उन्होने कहा कि स्कूलो द्वारा कार्यक्रमों के बहाने  बच्चों के अभिभावको से अतिरिक्त फीस वसूली जाती है, जब कि इन कार्यक्रमों का कोई मतलब नही है। वहीं राष्ट्रीय पर्वो की अनदेखी की जाती है।

शाश्वत सौभाग्य संस्थान की शिवानी ने स्व- सहायता समूह के मुद्दे को उठाया। इस दौरान बहस में यह निष्कर्ष निकल कर सामने आया कि समन्वय की कमी, कार्य पर फोकस, कागजाती अभाव, पदों को लेकर मतभेद, लैंगिक भेदभाव और मार्गदर्शक की कमी स्व- सहायता समूह के लिये बड़ी चुनौतियां है। जिनके निवारण के बिना इसे आगे बढ़ाना नामुमकिन है।

कार्यक्रम का संचालन यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित ने किया। इस दौरान समाजसेवी डा. अलका, राघव दुनेजा, शिवम कुमार गुप्ता, नवनीत कुमार, रवि वर्मा, सोनाली वर्मा, सुप्रिया वर्मा, शैलेश कुमार, अमन मौर्या, अभिषेक अग्निहोत्री समेत दर्जनों लोग मौजूद थे।

 

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