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 सरकारी स्कूलों की बदहाली जिम्मेदार कौन
27-Oct-2018    |    Views : 000342

सरकारी स्कूलों की बदहाली जिम्मेदार कौन

लखनऊ. यूनाइट फाउंडेशन ने अपने पाक्षिक कार्यक्रमों की कड़ी में शनिवार (27 अक्टूबर) को जानकीपुरम स्थित कार्यालय में परिचर्चा का आयोजन किया। इस परिचर्चा का विषय सरकारी स्कूलो की व्यवस्था में सुधार था। जिसमें विभिन्न संस्थाओं समाधान फाउण्डेशन, वरिष्ठ जन नागरिक समिति, विनोबा सेवा आश्रम और खुशहाल स्वास्थ्य सेवा संस्थान आदि के पदाधिकारियों ने परिचर्चा में भाग लिया।

यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित ने कहा कि यूनाइट ने अब तक तकरीबन 10 स्कूलों का औचक निरीक्षण करके वहां की खामियों को परखा है। इसके साथ ही उनमें से गुडम्बा में एक स्कूल मॉडल की तरह दिखा है। कार्यक्रम में इसके अलावा यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष डा. पी.के. त्रिपाठी, के अलावा संदीप पाण्डेय, प्रणय विक्रम सिंह, करिश्मा श्रीवास्तव आदि समेत 40 लोग मौजूद थे।

 हम लोग सरकार का कार्य कर रहे हैं

 शनिवार की इस बैठक में मौजूद यतीन्द्र ने कहा कि स्कूलों को लेकर हमारी संस्था या हम लोग जो कार्य कर रहे हैं वह काफी सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग सरकार का कार्य कर रहे हैं सरकार हमारे पैसे से सब काम करती है। यतीन्द्र जी ने कहा कि स्कूलों का निरीक्षण हम लोग यूनाइट का नाम लेकर करेंगे तो ज्यादा असर पड़ेगा और किसी प्रकार की समस्या से गुजरना नहीं पड़ेगा।

 जनप्रतिनिधि को बुलाकर राय लेनी चाहिए

 शनिवार की इस बैठक में मौजूद यूनाइट फाउंडेशन के उपाध्यक्ष पी.के त्रिपाठी ने कहा कि स्कूलों के निरीक्षण से पहले आस—पास के जनप्रतिनिधि को बुलाकर एक बार उनसे हमें राय लेनी चाहिए। त्रिपाठी ने कहा कि इससे आपके कार्य में दिक्कत नहीं होगी। इसके साथ ही अगला संगठन आप पर उंगली भी नहीं उठा सकेगा इसलिए जनप्रतिनिधि से राय लेनी बहुत जरूरी है।

 बेसिक शिक्षा अधिकारी को सर्वे कापी भेजी जानी चाहिए

 समाजसेवी संजय सिंन्हा ने कहा कि हमारी संस्था द्वारा सरकारी स्कूल के जो सर्वे कराए जा रहे हैं उनकी एक कॉपी बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजी जानी चाहिए। इससे अधिकारी को पता हमारे कार्यों के बारे में पता चल सकेगा साथ ही उनको सरकारी स्कूलों की दुर्दशा भी दिखेगी।

 महिलाओं को सक्षम बनाने पर हुई बात

 महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए अल्का ने कहा कि हम लखनऊ मैं चिकन वर्कर के साथ काम कर रहीं हूं चिकन का काम जरुरतमंद महिलाओं को सिखाने का प्रयास करेंगे। इसके बाद हम इसकी मार्केटिंग करेंगे।

 स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपये की बर्बादी

 समाजसेवी मनोज सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार देश में स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने में लगी हुई है। इस दौरान सिन्हा ने राजनाथ सिंह के स्वच्छता के कार्यक्रम का जिक्र भी किया। सिन्हा ने सुझाव दिया कि अगर सरकार वाकई में स्वच्छता अभियान चलाना चाहती है तो वह मजूदरों द्वारा सफाई कराकर उसे पैसे दें दे। इससे मजदूर का भी कल्याण हो जाएगा साथ ही स्वच्छता अभियान का असर दिखेगा।

 समाज में चोर बहुत हैं

संजय सिन्हा ने कहा कि हम अपने सोसायटी को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं मगर समाज में चोर बहुत हैं। स्कूलों की हालत पहले से खराब है बच्चों को बेंच पर नहीं बल्कि टाट पट्टी पर बैठाया जाता है सरकार की तरफ से पैसा आता है मगर कहां जाता है इसका पता नहीं है। 

 बने रहो पगला काम करे अगला

इस दौरान जे एल दास ने कहा कि बैंकों की दुर्दशा बहुत ही खराब है। आज से 8 साल पहले तो बैंकों में कर्मचारी काम ही नहीं करते थे। उन्होंने  बैंक की दशा को लेकर कए कहावत भी कही। बने रहो पगला काम करे अगला।

 

 

 

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