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पुरुष बनकर महिला क्रांतिकारी ने अंग्रेजों को किया पस्त
08-Feb-2019    |    Views : 000276

LUCKNOW. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों में हर किसी वर्ग और समुदाय ने अपना योगदान दिया. एक तरफ जहां पुरुष क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों से लोहा लिया वहीं महिलाओं ने भी आंदोलनों में कूद कर ईट से ईट बजा दी थी। उन्हीं महिला क्रांतिकारियों में एक नाम कल्पना दत्त का है, जिन्होंने अंग्रेजों से बड़ी निडरता और साहस के साथ जमकर लोहा लिया था।

पुरुष बनकर महिला क्रांतिकारी ने अंग्रेजों को किया पस्त

LUCKNOW. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों में हर किसी वर्ग और समुदाय ने अपना योगदान दिया. एक तरफ जहां पुरुष क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों से लोहा लिया वहीं महिलाओं ने भी आंदोलनों में कूद कर ईट से ईट बजा दी थी। उन्हीं महिला क्रांतिकारियों में एक नाम कल्पना दत्त का है, जिन्होंने अंग्रेजों से बड़ी निडरता और साहस के साथ जमकर लोहा लिया था।

कल्पना दत्त का जन्म 27 जुलाई 1913 को चटगांव के श्रीपुर गांव में हुआ था, जो अब बांग्लादेश का हिस्सा है। ये एक मध्यम वर्गीय परिवार से थीं। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चटगांव से हासिल किया। 1929 में मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद कलकत्ता चलीं गईं। वहां पर विज्ञान में स्नातक के लिए बेथ्यून कॉलेज में दाखिला ले लिया। इस बीच कल्पना मशहूर क्रांतिकारियों की जीवनियाँ भी पढ़ने लगी थीं। जल्द ही छात्र संघ से जुड़ गईं और क्रांतिकारी गतिविधियों में रूचि लेनी लगी। तभी इनकी मुलाकात स्वतंत्रता सेनानी सूर्य सेन से हुई, जिन्हें ‘मास्टर दा’ के नाम से भी जाना जाता है। कल्पना इनके विचारों से बहुत प्रभावित हुईं और सूर्य सेन के संगठन ‘इंडियन रिपब्लिकन आर्मी’ में शामिल हो गईं। इसके बाद कल्पना खुलकर अंग्रेजों के खिलाफ अपनी मुहिम छेड़ चुकी थीं।

1930 में जब इस संगठन ने ‘चटगांव शास्त्रानगर लूट’ को अंजाम दिया, तो कल्पना अंग्रेजों की नज़र में चढ़ गई थीं। ऐसे में इन्हें कलकत्ता से पढ़ाई छोड़कर वापस चटगांव आना पड़ा। हालांकि इन्होंने संगठन का साथ नहीं छोड़ा और लगातार सूर्य सेन के संपर्क में बनी रहीं। इस हमले के बाद कई क्रांतिकारी नेता गिरफ्तार किये गए थे, जो अपने ट्रायल का इन्तेज़ार कर रहे थे। वहीं कल्पना को कलकत्ता से विस्फोटक सामग्री सुरक्षित ले जाने की ज़िम्मेदारी दी गई थी। कल्पना चटगांव में गुप्तरूप से संगठन के लोगों को हथियार पहुँचाने लगीं। फिर, कल्पना ने इन क्रांतिकारियों को आज़ाद कराने का फैसला लिया। इसके लिए इन्होंने जेल की अदालत को बम से उड़ाने की योजना बनाई। इनकी इस योजना में प्रीतिलता जैसी क्रांतिकारी महिला भी शामिल थीं। सितम्बर 1931 को कल्पना और प्रीतिलता ने चटगांव के यूरोपीयन क्लब पर हमला करने का फैसला किया। जिसके लिए इन्होंने अपना हुलिया बदल रखा था।

कल्पना एक लड़के के भेष में इस काम को अंजाम देने वाली थीं, मगर पुलिस को इनकी इस योजना के बारे में पता चल चुका था। इसीलिए, अपने मिशन को अंजाम देने से पहले ही कल्पना को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में अभियोग सिद्ध न होने पर उनको रिहा कर दिया गया था। जेल से रिहा होने के बाद भी पुलिस उन पर पैनी नज़र रखे हुई थी। यहां तक की उनके घर पर भी पुलिस का पहरा लगा दिया गया था। परन्तु, कल्पना पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहीं और घर से भागकर सूर्य सेन से जा मिलीं। 17 फ़रवरी 1933 को पुलिस ने सूर्य सेन को गिरफ्तार कर लिया, जबकि कल्पना अपने साथी मानिन्द्र दत्ता के साथ भागने में कामयाब रहीं। कुछ महीनों तक ये इधर उधर छुपती रहीं, मगर  मई 1933 को ही कल्पना को पुलिस ने घेर लिया था। कुछ देर तक चली इस मुठभेड़ के बाद कल्पना और उनके साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। जब इन क्रांतिकारियों पर मुकदमा चलाया गया। तब 1934 में सूर्य सेन और उनके साथी तारकेश्वर दस्तीकार को फांसी की सजा सुनाई गई। जबकि, कल्पना दत्त को उम्र कैद की सजा हुई।

21 वर्षीय कल्पना को आजीवन करावास की सजा मुकर्र हो चुकी थी। अब वो किसी भी क्रांतिकारी आंदोलनों का हिस्सा नहीं बनने वाली थीं, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। 1937 में पहली बार प्रदेशों में मंत्रिमंडल बनाये गए। तब महात्मा गांधी और रवीन्द्रनाथ टैगोर आदि नेताओं ने क्रांतिकारियों को छुड़ाने की मुहीम छेड़ दी थी। जिसके बाद अंग्रेजों को बंगाल के कुछ क्रांतिकारियों को छोड़ना पड़ा था। उन्हीं क्रांतिकारियों में कल्पना दत्त भी शामिल थीं।

1943 में कल्पना भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव पूरन चंद जोशी से विवाह के बंधन में बंध गईं। इस तरह कल्पना दत्त अब कल्पना जोशी बन चुकी थीं। यह वही दौर था, जब बंगाल की स्थिति आकाल और विभाजन के चलते गंभीर थी। कल्पना ने इस समय बंगाल के लोगों के साथ हमदर्दी बांटी और राहत कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया था। इसके बाद कल्पना देश की आज़ादी के साथ ही भारतीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाने लगी।

1946 में कल्पना ने बंगाल विधानसभा चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी की उम्मीदवार चुनी गईं, मगर वो इस चुनाव को जीतने में असफल रहीं। इसके बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में कुछ विवादों के चलते इनके पति ने पार्टी छोड़ दी। ऐसे में इन्होंने भी पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था। बाद में कल्पना बंगाल से दिल्ली आ गईं और इंडो सोवियत सांस्कृतिक सोसायटी का हिस्सा बनीं। 1979 में कलपना जोशी को इनके कामों को देखते हुए ‘वीर महिला’ की उपाधि से नवाज़ा गया था। 8 फ़रवरी 1995 को कल्पना दिल्ली में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

8 फरवरी को देश-विदेश के इतिहास की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में जानते है, इतिहास में हुई तमाम घटनाओं से अपने आप को अपडेट रख सकते हैं।

8 फरवरी की महत्वपूर्ण घटनायें

व्लादिमीर नामक रूसी शहर को मंगोलों ने 1238 में आग के हवाले किया.

1774 से 1785 तक गर्वनर जनरल रहे वारेन हेस्टिंग्स ने 1785 में भारत छोड़ा.

अंडमान जेल यानि सेल्यूलर जेल में शेर अली ने 1872 में गवर्नर पर हमला करके शहादत प्राप्त की.

यूरोपीय देश जर्मनी और फ्रांस के बीच 1909 में मोरक्को संधि पर हस्ताक्षर किये गये.

स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस 1943 में जर्मनी के केल से एक नौका के जरिये जापान के लिये रवाना हुये.

महारानी एलिजाबेथ 1952 में ब्रिटेन की महारानी और राष्ट्रमंडल देशों की अध्यक्ष बनी थीं.

दुनिया के पहले इलेक्‍ट्रॉनिक शेयर बाजार नैस्‍डैक की शुरुआत 8 फ़रवरी 1971 को हुई.

लाओस पर दक्षिणी वियतनामी सेना ने 1971 में हमला किया.

दिल्ली हवाई अड्डे पर 1986 में पहली बार प्रीपेड टैक्सी सेवा शुरु की गई.

क्रिकेटर कपिल देव ने 1994 में टेस्ट मैचों में 432 विकेट लेकर रिचर्ड हैडली के सबसे अधिक विकेट लेने के विश्व रिकार्ड को तोड़ दिया था.

केनेडी अंतरिक्ष केंद्र से अमेरिकी अंतरिक्ष यान स्टारडस्ट 1999 में रवाना.

सिओल में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 2006 में तीन समझौते सम्पन्न.

बैंगलौर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस के वरिष्ठ वैज्ञानिक शांतनु भट्टाचार्य को 2008 में जी.डी. बिड़ाला पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

उड़ीसा के शिशुपालगढ़ में 2008 में खुदाई के दौरान 2500 वर्ष पुराना शहर मिला.

8 फरवरी को जन्मे व्यक्ति

1897 में देश के तीसरे राष्‍ट्रपति जाकिर हुसैन का जन्‍म हुआ था.

1925 में प्रसिद्ध भारतीय ठुमरी गायिका शोभा गुर्टू का जन्‍म हुआ था.

1941 में गजलों को भारत के हर घर में जगह दिलाने वाले जगजीत सिंह का जन्‍म हुआ था.

1939 में भारत के बारहवें ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ जेम्स माइकल लिंगदोह का जन्‍म हुआ था.

1951 में हिन्दी के मंचीय कवियों में से एक अशोक चक्रधर का जन्‍म हुआ था.

1963 में क्रिकेटर मोहम्मद अज़रुद्दीन का जन्‍म हुआ था.

1928 में गोमांतक दल के सदस्य बाला देसाई का जन्‍म हुआ था.

1986 में भारतीय महिला क्रिकेटर एकता बिष्ट का जन्‍म हुआ था.

1881 में भारतीय सिविल सेवक और प्रशासक वी.टी. कृष्णमाचारी का जन्‍म हुआ था.

8 फरवरी को हुए निधन

1265 में ‘इलख़ानी साम्राज्य’ के संस्थापक हुलेगु ख़ान का

1265 में ‘इलख़ानी साम्राज्य’ के संस्थापक हुलेगु ख़ान का निधन.

1995 में आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाली महिला क्रांतिकारियों में से एक कल्पना दत्त का निधन.

1971 में महान् लेखक कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का निधन.

 

 

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