कानून के राज को स्थापित करना ही सबसे अच्छी संस्कृति होगी

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कानून के राज को स्थापित करना ही सबसे अच्छी संस्कृति होगी

24-Aug-2018

राष्ट्रीय सांस्कृतिक सम्पदा संरक्षण अनुसंधानशाला जानकीपुरम, लखनऊ

सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करना होगा- महेंद्र मोदी

सांस्कृतिक धरोहर ग्रामीण भारत में आज भी सुरक्षित है- आचार्य श्यामलेश तिवारी

प्राकृतिक आपदाओं के लिए हम लोग ही जिम्मेदार हैं- भरत राज सिंह

सांस्कृतिक धरोहर का मतलब स्मारक संरक्षण तक ही सीमित नहीं- सौरभ मिश्र

यूनाइट फाउण्डेशन की ओर से 71वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हमारी सांस्कृतिक धरोहर और आजाद अभिव्यक्ति कार्यक्रम के तहत शुक्रवार 24 अगस्त को संवाद परिचर्चा एवं रचनात्मक प्रतियोगिता सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय सांस्कृतिक सम्पदा संरक्षण अनुसंधानशाला जानकीपुरम के प्रेक्षागृह में किया गया। कार्यक्रम के सहअयोजक कला एवं शिल्प महाविद्यालय ललित कला संकाय लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं छात्रछात्राओं ने भाग लिया।

मुख्य अतिथि यूपी के पुलिस महानिदेशक (तकनीकी सेवाएं) महेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारी सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करना होगा। इनके संरक्षण के लिए हम सभी को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि अगर हम मंत्रियों, अधिकारियों की शक्तियों को बढ़ाते गए तो हम अवसंस्कृति को बढावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारी संस्कृति को सबसे ज्यादा जरूरत है कानून के राज की। उन्होंने कहा कि अगर हम कानून के राज को स्थापित कर दें तो ये हमारी सबसे अच्छी संस्कृति होगी।

विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के उपाध्यक्ष आचार्य श्यामलेश तिवारी ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर सार्वजनिक है, लेकिन आजाद अभिव्यक्ति व्यक्तिगत है। उन्होंने कि हम न तो स्वतंत्र है और न हो स्वतंत्र होना चाहते हैंउन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर ग्रामीण भारत में आज भी सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज ने हमें पैसा कमाने की मशीन बना रखा है। जब तक हम पैसा कमाने की मशीन रहेंगे तब तक हम सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए हमें आगे आना होगा।

दि इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स इंडिया के अध्यक्ष भरत राज सिंह ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब ये नहीं कि हम निरंकुश हो जाएं। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में हमें गुरुकुल में केवल शिक्षा ही नहीं दी जाती थी। बल्कि हमें पूर्ण रूप से विकसित भी किया जाता था। उन्होंने कहा कि हम व्यवसायिक हो गए हैं। मानो ऐसा लगता है हम वृद्धाश्रम बन गए हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के लिए हम लोग ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर में सभी को जोड़ने की शक्ति है, विश्व को आगे बढ़ाने की शक्ति है इसलिए हमें संरक्षण की जरूरत है।

यूनाईट फाउंडेशन के सचिव सौरभ मिश्रा ने बताया कि सांस्कृतिक धरोहर का मतलब सिर्फ मंदिर या स्मारक संरक्षण तक ही सीमित नहीं है। इसके तहत कला, लोकगीत आदि का संरक्षण भी शामिल है। यूनाईट का संकल्प सभी लोगों को साथ लेकर चलने का है। वह कोई भी व्यक्ति जो दैनिक कार्यों के अतिरिक्त कोई भी अच्छे कार्य में सामिल है उसको साथ लेकर आगे चलना हमारा संकल्प है।

कार्यक्रम के दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय कला संकाय के बीसी लिटिल ने बताया कि मेरा मुख्य कार्य फोटोग्राफी औऱ ग्राफिक्स डिजाइनिंग का है। एक फोटो एक हजार शब्दों के बराबर होती है। इसका कहने का तात्पर्य है कि यदि आप किसी स्थिति को 1000 शब्दों के माध्यम से किसी के सामने रखना चाहते हैं तो उसके लिए सिर्फ एक तस्वीर ही काफी होती है। वह एक तस्वीर ही उन सभी परिस्थितियों को बयां करने के लिए काफी होती है।

महर्षि प्रौद्योगिकी तकनीकी विश्वविद्यालय के डीन प्रो. एच.के. द्विवेदी ने कहा कि संस्कृति एक शिक्षक की तरह है जो हमें आगे बढ़ने में मदद करती है। हमारी धराहरों हमें सत्य के पास जाने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि हमें धरोहरों को संरक्षित करने की जरूरत है।

राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपदा संरक्षण अनुसंधानशाला के महानिदेशक बी.वी. खरबड़े ने कहा कि कल्चर और हेरिटेज हमारी विरासतें हैं। उन्होंने कहा कि अभिलेखागार, म्यूजियम, पुरातन बिल्डिंगें हमारी धरोहर हैं। हमारे देश में हर पांच से दस किमी में भाषा बदलती है यही हमारी विविधता है।  अगर हम अपनी संस्कृति को बचा नहीं पाए तो ये हमारा दुर्भाग्य होगा। उन्होंने कहा कि हम सांस्कृतिक धरोहरों को तभी संरक्षित कर पाएंगे जब हम जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि फ्रांस के पास एक मोनालिसा है, लेकिन हमारे पास हजारों मोनालिसा हैं। बस हमें पहचानने की जरूरत है। वहीं, कार्यक्रम में यूनाइट फाउण्डेशन के मासिक न्यूजलेटर का अनावरण भी किया गया।

 कार्यक्रम का संचालन यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित ने किया। यूनाइट फाउण्डेशन की ओर से हमारी सांस्कृतिक धरोहर और आजाद अभिव्यक्ति कार्यक्रम के तहत 7 अगस्त से 20 अगस्त तक आॅनलाइन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसी के साथ ही लखनऊ विश्वविद्यालय के कला एवं शिल्प महाविद्यालय ललित कला संकाय में भी कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, जिसमें 100 से अधिक छात्रों ने प्रतिभाग किया था। कार्यक्रम में प्रतिभागी छात्रों प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वाले 24 छात्रछात्राओं को पुरस्कार वितरण किया गया। इस कार्यक्रम में संदीप पाण्डेय, शेखर उपाध्याय, करिश्मा श्रीवास्तव, गौरव शुक्ला, अभिषेक मिश्र, सुजीत कुमार, अपूर्व, रुपाली वर्मा समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

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