समाज की विकृति को दूर करने के लिये होना होगा एकजुट

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समाज की विकृति को दूर करने के लिये होना होगा एकजुट

15-Sep-2018

बी- 1/80, सेक्टर जी, जानकीपुरम, लखनऊ- 226021

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समाज की विकृति को दूर करने के लिये होना होगा एकजुट

युवा अपने रास्ते से भटक चुके है- श्याम किशोर बाजपेयी

गरीबों और वंचितों की मदद से भागना नही चाहिये- संदीप भटनागर

LUCKNOW. हम समाज के मध्य रहकर दूसरों से तो उम्मीद रखते है कि वह सही काम करें किन्तु समाज में अपनी भागीदारी को भूल जाते है। इसी विषय पर समाज के बुद्धिजीवियों की राय जानने के लिये  यूनाइट फाउण्डेशन की ओर से जानकीपुरम स्थित कार्यालय में समाज के प्रति हमारी भागीदारी विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें तमाम सामाजिक संगठनों समाधान फाउण्डेशन से अरूणेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, बैदेही वेलफेयर फाउण्डेशन से डा. रूबी राज सिन्हा और प्रशांत सिन्हा , वरिष्ठ नागरिकजन कल्याण समिति से वीर चन्द्र द्विवेदी, श्याम किशोर वाजपेयी तथा गुलाब चन्द्र सिंघल और ज्यूपिटर एकेडमी के संदीप भटनागर और कई वरिष्ठ बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित ने किया।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ नागरिकजन कल्याण समिति के उपाध्यक्ष वीर चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि आज समाज में समाज में तमाम विकृतियां पैदा हो गई है, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें इसके लिए एकजुट हो काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या है कि सामाजिक संगठनों की ओर से अभियान तो तमाम शुरू किए जाते हैं, लेकिन वह अभियान सिर्फ अभियान बन कर ही रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि लोग समाज के लिए कुछ करना ही नहीं चाहते हैं। उन्होंने बुजुर्गों की समस्याओं पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में परम्परा शुरू हो गई, जो चीज हमारे काम की नहीं रह गई है, उसे हम छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में बुजुर्गों को भी छोड़ दिया जाता है, जो बहुत ही चिंताजनक है।

वरिष्ठ नागरिकजन कल्याण समिति के श्याम किशोर वाजपेयी ने कहा कि आज के समाज में तमाम विकृतियां पैदा हो गई है। आज युवा भी अपने रास्ते से भटक चुका है। युवा आज नशीले पदार्थों की चपेट में आ चुके हैं। समाज में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा समाज में आज चार लोग अगर अच्छी बात करने वाले हैं तो चार सौ लोग समाज में विकृतियां पैदा करते हैं। इसके बावजूद हमें अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज समाज भटक चुका है, हम देखकर भी कुछ नहीं कर सकते। आज माता—पिता को यह तक नहीं पता है कि उनके बच्चे क्या कर रहे हैं और  कहां जा रहे हैं। यही नहीं उन्होंने कहा कि आज बुजुर्ग अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। अपने ही घर में डरे और सहमे रहते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में बड़े प्रयास की जरूरत है। 

वरिष्ठ नागरिकजन कल्याण समिति के अध्यक्ष गुलाब चन्द्र सिंघल ने कहा कि समाज में बहुत कुछ बदलाव की जरूरत है। बुजुर्गों, गरीबों और मजलूमों की मदद करने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे में मुद्दों पर चर्चा करने की बजाय हमें जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है। समाज को जागरूक करने के लिए हमें एकजुट होना होगा।

ज्यूपिटर एकेडमी के संदीप भटनागर ने कहा कि हमें कभी भी गरीबों और वंचितों की मदद से भागना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भी तमाम गरीब परिवारों के बच्चें शिक्षा से वंचित है। हमें ऐसे लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब हम समाज के लिए अच्छे काम करते हैं तो आलोचना जरूर होती है। उन्होंने हमें आलोचना से नहीं डरना चाहिए क्योंकि आलोचना ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। 

मुमकिन फाउण्डेशन के सचिव श्याम मुरारी ने कहा कि समाज समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था हो या किशोरावस्था या वृद्धावस्था सभी का अपना महत्व है। समाज में कोई किसी को दूर नहीं करता है, लेकिन हमें भी इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है हमारे अंदर कौन सी कमियां हैं। हमें अपनी कमी के बारे में भी सोचना होगा। उन्होंने बताया कि हमारी संस्था कम्युनिटी किचन पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हम समाज के लिए क्या—क्या योगदान दे सकते हैं, जिससे जिससे सभी का फायदा हो। ऐसे योगदान करने में पीछे नहीं हटना चाहिए।

बैदेही वेलफेयर फाउण्डेशन की डॉ. रूबीराज सिन्हा ने कहा कि हमेशा बेटा—बेटी ही नहीं, बहू भी अपने सास—ससुर का नाम रौशन करती है। उन्होंने कहा कि हम भाषण दे सकते हैं, लेकिन हम उस पर पहल करने के लिए कभी आगे नहीं आते हैं। अगर हम खुद से पहल करें तो काफी कुछ बदलाव हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें कभी भी कोई नियम नहीं तोड़ने चाहिए, अगर हम नियम नहीं तोड़ेंगे तो हमें कोई समस्या नहीं होगी। उन्होंने कहा कि घर छोटे होने लगे हैं। परिवार छोटे हो गए है, डिजिटल जमाना हो गया है। हमें संतुलन बनाकर काम करना चाहिए। संतुलन बिगड़ेगा तो समस्या जरूर आएगी। सामाजिक समस्या साक्षरता की वह से है। गरीब बस्तियों में सैनेटरी नैपकिन बांटने के अलावा तमाम काम कर चुकी है। 

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भाग संचालक अनिल जैन ने कहा कि संवाद की कमी की वजह से समस्या उत्पन्न हुई है। समाज में संवाद होगा तो समस्या दूर हो जाएगी। किसी को दोष देने से अच्छा है कि हम उसके साथ खड़े हो जाएं तो समस्या का अपने आप समाधान हो जाएगा।

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